अब यदि विपक्ष के द्वारा संवैधानिक अवहेलना एवं संस्थागत अवमानना पर विचार किया जाए, तो कई सारे उदाहरण और मिल जाएँगे। और यदि उनके इतिहास के बारे में सोचा जाए, तो ऐसे उदाहरणों की कोई कमी नहीं होगी। एक भारतीय के रूप में हमें इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि संविधान व संस्थाएँ, दोनो ही मोदी सरकार मैं पूर्ण रूप से संरक्षित हैं।
दोनों पुस्तकों के पिछले कई महीनों से बाज़ार में उपलब्ध होने का अर्थ यह है कि इनके पाठकों की संख्या उनसे कई गुना अधिक है जो निमंत्रण पाकर या गाहे बगाहे बुक लॉन्च में पहुँचते। बुक लॉन्च जैसे आयोजन लेखकों को अपनी वह बात कहने का मंच देते हैं जो वे पुस्तक में नहीं लिख पाते।
9 वर्षों तक जेल के सलाखों के पीछे रह चुकीं साध्वी प्रज्ञा सिंह ने जब अपनी आपबीती सुनाई तो अच्छे-अच्छों के रोंगटे खड़े हो गए। जब उन्होंने मीडिया के सामने आकर बताया कि उन्हें अपना 'अपराध' मानने के लिए किस तरह से टॉर्चर किया गया, तो सुननेवाले भी काँप उठे।
इस गहमा-गहमी के बाद स्थानीय लोगों ने, "देशद्रोही मुर्दाबाद" के नारे लगाए। चुनाव नज़दीक है और माहौल गरम अब देखना यह है कि कन्हैया की दाल बेगूसराय में गलती कि नहीं या उन्हें आए-दिन अपने पिछले कर्मों के वजह से यूँ ही ज़लील होना पड़ेगा।
आफताब का कहना था कि किसी को भी शिवाजी की पूजा नहीं करनी चाहिए। उसने समीर पर एहसान जताते हुआ कहा कि इतने ट्रैफिक के बावजूद वो उन्हें लेने आ गया, यही बहुत है।
रवीश कुमार ने आँकड़ों को समझने की कोशिश किए बिना, अनुवाद कर दिया। वहाँ उनको 'जॉब' और 'स्लोडाउन' दिखा, बस अनुवाद कर के मोदी को लपेट लिए। जबकि इस लेख में एक ज़रूरी बात छुपा ली गई ताकि मोदी बुरा दिखे।
श्रीवास्तव ने कार्ति चिदंबरम पर चुनावी धोखाधड़ी का भी आरोप लगाया और कहा कि उनका शपथपत्र झूठा है। उन्होंने वह संपत्ति तो घोषित ही नहीं की है जो आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय ने छापा मारकर सामने लाई थी।