जिस साध्वी को ‘हिन्दू आतंकी’ कह कर टॉर्चर किया, वही बनीं कॉन्ग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती

असल में चिदंबरम के अलावा हिन्दू आतंकवाद वाले पाप में दिग्विजय सिंह भी बराबर के भागीदार हैं। दिग्विजय सिंह न तो उस समय केंद्रीय मंत्री थे और न ही सरकार में थे, तब भी उनके द्वारा समय-समय पर जाँच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की बातें सामने आती रही हैं।

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर आज बुधवार (अप्रैल 17, 2019) को भाजपा के भोपाल दफ़्तर में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हो गईं। उनका भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। भोपाल में उनका मुक़ाबला दिग्विजय सिंह से होगा। मध्य प्रदेश की राजधानी इसके साथ ही भारत का एक ऐसा क्षेत्र बन जाएगा, जिसके चुनावी समीकरण पर पूरे देश की नज़र रहेगी। मध्य प्रदेश के राजघराने से आने वाले दिग्विजय 10 वर्षों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर भी कॉन्ग्रेस के लिए सक्रिय रह चुके हैं। पार्टी का पहले से ही मानना था कि उन्हें मध्य प्रदेश की सबसे कठिन सीट से चुनाव लड़ना चाहिए और अंत में भगवा गढ़ भोपाल पर सहमति बनी। भोपाल इसीलिए क्योंकि यहाँ 1989 से अब तक भाजपा का ही कब्ज़ा रहा है।

साध्वी प्रज्ञा का नाम सामने आते ही, कॉन्ग्रेस द्वारा जबरदस्ती इस्तेमाल किया गया टर्म ‘भगवा आतंकवाद’ याद आता है। ये एक ऐसा शब्द था, जिसे सिर्फ़ और सिर्फ़ कश्मीर में चल रहे इस्लामिक आतंकवाद और देश के कई हिस्सों में फ़ैल रहे माओवादी आतंकवाद को न्यूट्रलाइज करने के लिए गढ़ा गया था। भगवा आतंकवाद का बहाना बनाकर उन लोगों को फँसाने की कोशिश की गई, जो राष्ट्रवाद की बात करते थे। कुछ ऐसे चेहरे चुने गए, जो हिन्दू संगठनों का प्रतिनिधित्व करते थे या हिंदूवादी रुख के लिए जाने जाते थे। इसमें स्वामी असीमानंद, कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा जैसे नाम शामिल थे। इन पर आतंकवाद का चार्ज लगाया गया।

साध्वी प्रज्ञा को दी गई प्रताड़ना की दास्तान

महाराष्ट्र के मालेगाँव ब्लास्ट केस में साध्वी प्रज्ञा को अदालत से क्लीनचिट भी मिल चुका है। 9 वर्षों तक जेल के सलाखों के पीछे रह चुकीं साध्वी प्रज्ञा सिंह ने जब अपनी आपबीती सुनाई तो अच्छे-अच्छों के रोंगटे खड़े हो गए। जब उन्होंने मीडिया के सामने आकर बताया कि उन्हें अपना ‘अपराध’ मानने के लिए किस तरह से टॉर्चर किया गया, तो सुननेवाले भी काँप उठे। तत्कालीन गृहमंत्री के कुटिल प्रयासों का शिकार बनी प्रज्ञा ने बताया कि महाराष्ट्र एटीएस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उनके साथ हुई क्रूरता की एक बानगी देखिए:

  • उन्हें चमड़े के बेल्ट से पीटा गया।
  • उन्हें 24 दिनों तक भूखा रखा गया, कुछ भी खाने को नहीं दिया गया।
  • उन्हें इलेक्ट्रिक शॉक्स दिए गए।
  • उनके साथ रोज़ गाली-गलौज किया गया।
  • उन्हें पुरुष क़ैदियों के साथ रखकर आपत्तिजनक पॉर्न वीडियो देखने को मज़बूर किया गया।
  • काला चौकी पुलिस थाने में जब एक क़ैदी ने इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई तो उसे क्रूरतापूर्वक मारा-पीटा गया।
  • उन्हें पीटने के लिए 5-6 पुलिसकर्मी लगातार लगाए गए थे जो उन्हें सोने नहीं देते थे। जब वो थक जाते थे तो उनके बदले नए पुलिसकर्मी आ जाते।
  • उनका उनके गुरु के साथ संबंधों को अश्लील नज़र से देखते हुए ‘Prostitute’ कहा गया।
  • जब उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जाता, तब डॉक्टरों को जबरदस्ती अच्छी रिपोर्ट देने को मज़बूर किया जाता।
- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

और आपको बता दें कि ये सबकुछ 6 वर्षों तक लगातार चलता रहा। क्या साध्वी प्रज्ञा पर कोई आरोप साबित हुआ है? क्या वो कोई अपराध करते हुए रंगे हाथों पकड़ी गई थी? क्या उनके ख़िलाफ़ किसी गवाह के बयान की अदालत में पुष्टि हुई है? क्या उनके घर से बम बरामद हुआ? नहीं। असल में चिदंबरम के अलावा हिन्दू आतंकवाद वाले पाप में दिग्विजय सिंह भी बराबर के भागीदार हैं। दिग्विजय सिंह न तो उस समय केंद्रीय मंत्री थे और न ही सरकार में थे, तब भी उनके द्वारा समय-समय पर जाँच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की बातें सामने आती रही हैं।

इससे पहले हमने एक संपादकीय लेख में बताया था कि कैसे कर्नल पुरोहित और असीमानंद जैसों को फँसाना, उसे चर्चा का विषय बनाकर, भगवा आतंक, हिन्दू टेरर जैसे शब्दों को बोलचाल में लाना, सिर्फ एकेडमिक एक्सरसाइज़ नहीं था। इस पूरे प्रक्रिया में सेना की छवि ख़राब हुई कि एक अफ़सर ही देश में आतंकवादी गतिविधि कर रहा है। इस पूरे प्रक्रिया में पूरे धर्म को, जिसका इतिहास और वर्तमान सहिष्णुता का पैमाना रहा है, आतंकवादी बताने की कोशिश की। जबकि सबको पता है कि आतंक का ठप्पा कहाँ लगा है, और क्यों।

जिस साध्वी प्रज्ञा को प्रताड़ित करने के लिए क्रूरता की हदें पार की गई, आज वही कॉन्ग्रेस की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर खड़ी है। दिग्विजय सिंह से जब इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने मौन धारण कर लिया। दिग्विजय की बोलती बंद होने का कारण सीधा और सपाट है, उन्हें डर है कि जिस सत्ता का दुरूपयोग कर उनके साथियों ने पाप का ये घृणित खेल खेला है, अब उसकी सज़ा तय होने का समय आ गया है। उन्हें पता है कि कथित हिन्दू आतंकवाद वाला जुमला फेल हो चुका है और अब वो अपने बनाए चक्रव्यूह में ख़ुद ही फँस गए हैं। साध्वी प्रज्ञा आज दुनिया की सबसे बड़ी लोकतान्त्रिक पार्टी की उम्मीदवार हैं।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

370 खत्म करने को पाकिस्तानी जिहादी 'हिन्दू आक्रमण' के रूप में देखते हैं, इसलिए हिंदुस्तान के हिन्दुओं को नीचा दिखाने के लिए पाकिस्तानी हैदराबाद शहर की सुन्नी तहरीक के कठमुल्लों ने इंसानियत की हद ही पार कर दी। यह गाय से अधिक पाकिस्तान इंसानियत की हत्या है।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

अमानुल्लाह जेहरी

PAk से आज़ादी माँग रहे बलूचिस्तान में बीएनपी नेता और उनके 14 साल के पोते को गोलियों से छलनी किया

पाकिस्तान को अपने स्वतन्त्रता दिवस (14 अगस्त) के दिन तब शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब ट्विटर पर बलूचिस्तान के समर्थन में BalochistanSolidarityDay और 14thAugustBlackDay हैशटैग ट्रेंड करने लगा था। इन ट्रेंडों पर तकरीबन क्रमशः 100,000 और 54,000 ट्वीट्स हुए।

राजस्थान: मुसलमानों के हाथों मारे गए हरीश जाटव के नेत्रहीन पिता के शव के साथ सड़क पर उतरे लोग, पुलिस से झड़प

हरीश जाटव की बाइक से एक मुस्लिम महिला को टक्कर लग गई थी। इसके बाद मुस्लिम महिला के परिजनों ने उसकी जमकर पिटाई की। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस मॉब लिंचिंग के मामले को एक्सीडेंट साबित करने पर तुली हुई है।
चापेकर बंधु

जिसके पिता ने लिखी सत्यनारायण कथा, उसके 3 बेटों ने ‘इज्जत लूटने वाले’ अंग्रेज को मारा और चढ़ गए फाँसी पर

अंग्रेज सिपाही प्लेग नियंत्रण के नाम पर औरतों-मर्दों को नंगा करके जाँचते थे। चापेकर बंधुओं ने इसका आदेश देने वाले अफसर वॉल्टर चार्ल्स रैंड का वध करने की ठानी। प्लान के मुताबिक जैसे ही वो आया, दामोदर ने चिल्लाकर अपने भाइयों से कहा "गुंडया आला रे" और...
गुटखा

सिपाही ने गुटखा खाया लेकिन पैसे नहीं दिए, दुकानदार ने जब 5 रुपए माँगे… तो इतना मारा कि मर गया

उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही ने राहुल की चाय की दुकान से गुटखा लिया। लेकिन उसके पैसे दुकानदार को नहीं दिए। जब राहुल ने गुटखे के पैसे माँगे तो इस पर सिपाही को काफ़ी गुस्सा आ गया। उसने उसे वहीं बड़ी बेरहमी से पीटा और फिर अधमरी हालत में थाने ले जाकर...
कश्मीर

कश्मीरी औरतें (हिंदू-मुसलमान दोनों) जो हवस और जहन्नुम झेलने को मजबूर हैं

दहशतगर्दी के शुरुआती दिनों में आतंकियों को हीरो समझा जाता था। उन्हें मुजाहिद कहकर सम्मान भी दिया जाता था। लोग अपनी बेटियों की शादी इनसे करवाते थे लेकिन जल्दी ही कश्मीरियों को यह एहसास हुआ कि आज़ादी की बंदूक थामे ये लड़ाके असल में जिस्म को नोचने वाले भेड़िये हैं।
कविता कृष्णन

कविता कृष्णन का ईमेल लीक: देश विरोधी एजेंडे के लिए न्यायपालिका, सेना, कला..के लोगों को Recruit करने की योजना

वामपंथियों की जड़ें कितनी गहरी हैं, स्क्रीनशॉट्स में इसकी भी नज़ीर है। कविता कृष्णन पूर्व-सैन्यकर्मी कपिल काक के बारे में बात करतीं नज़र आतीं हैं। वायुसेना के पूर्व उप-प्रमुख यह वामपंथी प्रोपेगंडा फैलाते नज़र आते हैं कि कैसे भारत ने कश्मीर की आशाओं पर खरा उतरने में असफलता पाई है, न कि कश्मीर ने भारत की
शाजिया इल्मी

भारत विरोधी नारे लगा रहे लोगों से सियोल में अकेले भिड़ गईं BJP नेता शाजिया इल्मी

शाजिया इल्मी को भारत विरोधी नारों से आपत्ति हुई तो वह प्रदर्शनकारियों के बीच पहुँच गईं और उन्हें समझाने की कोशिश की। जब प्रदर्शनकारी नहीं माने, तो वे भी इंडिया जिंदाबाद के नारे लगाने लगीं।
अब्दुल सईद गिरफ़्तार

DCP विक्रम कपूर आत्महत्या: ब्लैकमेल करने वाला इंस्पेक्टर अब्दुल सईद गिरफ़्तार, महिला मित्र के लिए…

इंस्पेक्टर अब्दुल सईद का भांजा मुजेसर थाने में एक मामले में नामजद था, उसे वो बाहर निकलवाना चाहता था। उसकी महिला मित्र का उसके ससुर के साथ प्रॉपर्टी को लेकर एक विवाद था, इस मामले में भी इंस्पेक्टर अब्दुल ने डीसीपी विक्रम कपूर पर...
कपिल काक

370 पर सरकार के फैसले के खिलाफ SC पहुॅंचे पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक, कविता कृष्णन के लीक ईमेल में था नाम

वामपंथी एक्टिविस्ट कविता कृष्णन ने सोशल मीडिया में वायरल हुए अपने लीक ईमेल में भी कपिल काक, जस्टिस शाह के बारे में बात की है। लीक मेल में जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मिला विशेष दर्जा हटने के विरोध की रणनीति का ब्यौरा मौजूद है।
'द वायर', बेगूसराय महादलित

‘मुस्लिम गुंडे नहाते समय मेरी माँ को घूरते’ – पीड़ित से The Wire के पत्रकार ने पूछा – तुम्हें बजरंग दल ने सिखाया?

द वायर' का पत्रकार यह जानना चाहता था कि क्या पीड़ित ने बजरंग दल के कहने पर पुलिस में मामला दर्ज कराया है? हालाँकि, पीड़ित ने पत्रकार द्वारा बार-बार बात घुमाने के बाद भी अपने बयान पर कायम रहते हुए बताया कि पुलिस को उसने जो बयान दिया है, वह उसका ख़ुद का है।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

82,168फैंसलाइक करें
11,554फॉलोवर्सफॉलो करें
89,344सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: