अगर बिहार में सच में गुंडे बचे होते, और उनमें थोड़ा भी ज़मीर होता तो तुम्हें सड़क पर पटक कर, तुम्हारी बाँह पर वही गोद देते, जो अमिताभ के हाथ पर किसी ने गोदा था, "मेरा बाप चोर है।"
ऑपइंडिया लेकर आया है विवेक अग्निहोत्री को भेजी गई लीगल नोटिस की एक्सक्लूसिव कॉपी। साथ ही पढ़ें 'द ताशकंद फाइल्स' के निर्देशक का एक्सक्लूसिव स्टेटमेंट। कॉन्ग्रेस क्यों रोकना चाहती है फ़िल्म की रिलीज? किसने 7 अप्रैल को फ़िल्म को सराहा और उसके बाद नोटिस भेज दिया?
लंबे समय से कॉन्ग्रेस से जुड़े रहने के बावजूद जयसूर्या खुद स्वीकारते हैं कि ग्रामीण इलाकों में लोग अब खुलेआम 'नो कॉन्ग्रेस' कहते हैं। कॉन्ग्रेस को लगता है कि उन्हें काम करने की क्या जरूरत है। लोग इंतजार करेंगे और 10 साल बाद खुद उनके पास वापस लौट आएँगे।
देश में गरीब हैं, गरीबी है। कैसे निपटा जाए इनसे… नेहरू ने कहा, लोड मत लो - 'गरीबी हटाओ' का नारा लगाओ और मस्त रहो। और आज जबकि 1969 में शुरू की गई इस योजना के 50 साल पूरे हो रहे हैं तब आपको मानना ही पड़ेगा कि नेहरू; राजकपूर से भी बड़े शो मैन और छलिया थे।
जब महबूबा ने हिन्दुस्तान के मिट जाने की धमकी दी तो गौतम गंभीर से रहा नहीं गया और उन्होंने किया कुछ ऐसा कि तिलमिलाई महबूबा मुफ़्ती ने उन्हें ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया। जानिए दोनों में कैसे हुई ज़ोरदार बहस और गंभीर ने कैसे महबूबा के छुड़ाए छक्के।
इस तरह के विवादित चित्र देखकर पता चलता है कि भीमराव अम्बेदकर को हम सबने कितने गलत तरीके से पढ़ा है। हमने उनके नाम पर समाज को सवर्ण और दलित के टकराव में झोंका है। हमने अम्बेदकर की गलत व्याख्या कर के पवित्र मानकों को अपमानित कर एक बड़े हिस्से को ठेस लगाकर हम बाबा साहब अम्बेदकर के दोषी बन चुके हैं।
"मैं अल्लाह से दुआ करती हूँ कि लक्ष्मी को भीख न माँगना पड़े, कोई दुर्गा गर्भ में न मरे, न पार्वती को दहेज देना पड़े, न सरस्वती को शिक्षा से वंचित किया जाए और न ही किसी काली को 'फेयर एंड लवली' की ज़रूरत पड़े। इंशाल्लाह!"
इनकम टैक्स के छापे में अब तक कहाँ से क्या मिला, देखिए पूरी सूची क्योंकि आपको ये कहीं और नहीं मिलेगा। इस पर कोई चर्चा नहीं कर रहा, कोई सवाल नहीं पूछ रहा, कोई प्राइम टाइम नहीं कर रहा। ये नेताओं, व्यापारियों, अधिकारियों, पत्रकारों का एक बहुत बड़ा नेक्सस है।
"रोहिंग्या को लावारिस मत समझना कि उन्हें बंगाल से निकाल दोगे। सुनो... ये असम नहीं, ये गुजरात नहीं, ये यूपी नहीं, ये मुजफ्फरनगर नहीं... ये बंगाल है, बंगाल। और बंगाल में अभी तक किसी माँ ने वो औलाद नहीं जना है जो मुसलमानों को निकाल कर दिखा दे।"
बिहार की राजनीति को समझने वाले लोग जानते हैं कि यहाँ लालू यादव जैसा वरिष्ठ और अनुभवी नेता भी संसदीय चुनाव हार सकता है, तो इन हवा-हवाई सेलेब्स की बात पर यहाँ की जनता शायद ही ध्यान दे। शबाना आज़मी और जावेद अख़्तर का न तो यहाँ जनाधार है और न ही उनका ऐसा कोई प्रभाव है कि उन्हें सुनने के लिए भीड़ जुटे।