सागरिका को मंदिर और सार्वजनिक फुटपाथ में अंतर नहीं पता, इसलिए उन्हें तो मूर्ख माना जा सकता है। लेकिन बरखा दत्त मंदिर का नाम स्पष्ट तौर पर लेतीं हैं और इसके बाद भी कहती हैं कि उन्हें सबरीमाला में जबरन प्रवेश चाहिए। यह मूर्खता नहीं, दुर्भावना वाली आसुरिक वृत्ति है।
"भगवान राम में मेरी असीम आस्था के कारण, सड़कों पर पड़े काँच के एक भी टुकड़े या कंकड़ पत्थर ने मुझे कभी चोट नहीं पहुँचाई। मेरा संकल्प तब पूरा होगा जब अयोध्या में राम मंदिर की स्थापना होगी। मैं ऐसा करने के बाद ही चप्पल पहनूँगा।"
बाबर के आक्रमण से वर्षों पहले भी अयोध्या एक तीर्थस्थल था और वहाँ पूजा-पाठ होते थे। यह कैसे साबित हुआ? यह साबित हुआ सिखों के पवित्र साहित्य 'जन्म साखी' से। मतलब जन्मभूमि से भारत के लोगों की भावनाएँ जुड़ी थीं, सिर्फ़ हिन्दुओं की नहीं।
श्रीराम के जन्म को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दुओं की आस्था पर मुहर लगा दी। इसके पीछे कई कारण रहे, जिनमें से एक कारण भगवान विष्णु भी हैं। वही विष्णु, जिन्होंने श्रीराम के रूप में अवतार लेकर सरयू तट को पवित्र किया। जब वो ख़ुद बोलें तो भला कौन न माने?
पर्सिया के बादशाह ने पैगम्बर मुहम्मद की चिट्ठी को फाड़ डाला। पैगम्बर ने तब कई राजाओं को लिखा था कि अगर तुम इस्लाम नहीं अपनाओगे तो तुम्हारा साम्राज्य तहस-नहस हो जाएगा। पैगम्बर ने इस्लामी सैनिकों को 'जिहादी' की संज्ञा दी थी। 1400 वर्ष पूर्व शुरू हुई इस कहानी को जानने के लिए...
कम्बोडिया के गणेश की प्रतिमा को लेकर हिन्दू धर्म को गाली देने पर हो सकता है कि शबाना आज़मी 'कूल' कही जाएँ लेकिन यह सवाल तो बनता है कि क्या उन्होंने बकरीद पर ख़ुद के मजहब को कोई सीख दी है? अन्य मजहबों को बधाई और हिन्दू धर्म को सीख- वाह बॉलीवुड वाह।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सीता ने पहली बार छठ पूजा बिहार के मुंगेर में गंगा तट पर की थी। इसके प्रमाण स्वरूप आज भी यहॉं अर्घ्य देते उनके चरण चिह्न मौजूद हैं।
सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।
सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक देव की 550वीं जयंती के अवसर पर एयर इंडिया मुंबई-अमृतसर-स्टैंस्टेड रुट पर सप्ताह में 3 बार उड़ान भरेगा। ये उड़ान सेवा सोमवार, गुरुवार और शनिवार को उपलब्ध होगी।
उत्तराखंड में दीपावली के 11 दिन या एक माह बाद माने जाने के पीछे एक और मान्यता बताई जाती है। कहा जाता है कि गढ़वाल क्षेत्र में भगवान राम के अयोध्या पहुँचने की खबर दीपावली के ग्यारह और कुछ स्थानों में एक माह बाद मिली और इसीलिए ग्रामीणों ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बाद दीपावली का त्योहार मनाया था और इसी परंपरा को निभाते गए।