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इस्लामी किताबों में ‘थूक’ भी बड़े काम की: मिलती है बरकत, 3 बार बाईं तरफ थूकने से भागता है शैतान

इधर-उधर थूकना भले स्वास्थ्यकर न हो। अजीब भी लगे। लेकिन इस्लाम में इसके खास मायने हैं। बकायदा कई जगहों पर इसकी व्याख्या की गई है।

‘राम सेतु’ के लिए नुसरत ने खुद को कहा सौभाग्यशाली… सोशल मीडिया पर कहा- Let’s do this!

फिल्म अभिनेत्री नुसरत भरूचा अपनी आने वाली फिल्म 'राम सेतु' की तैयारी में जुट गई हैं। इसकी जानकारी देते हुए अभिनेत्री ने...

बार्बी नहीं डांसिंग डॉल… चाइनिज ड्रैगन को इंडियन टाइगर की पटखनी: भारतीय खिलौनों की दमदार दुनिया

देशवासियों ने जैसे चाइनीज सामानों का बहिष्कार किया, वैसे ही चाइनीज खिलौनों का भी बहिष्कार किया जाना चाहिए। भारत में लघु उद्योग को...

आमिर खान भी थूकते थे… वो भी हिरोइन के हाथों पर: जानिए पकड़े जाने पर क्या दिया था तर्क

"मैंने जिस हीरोइन के हाथ पर थूका है वो नंबर वन बन गई।" इसी बीच पूजा बेदी ने कहा, "मैं अपनी बेटी आलिया से कहूँगी कि आप जाकर आमिर अंकल से मिलो उन्हें आपके हाथों पर थूकने की जरूरत है।"

धोनी और CSK दोनों हुए संघी, टीम जर्सी में भारतीय सेना को दे रहे सम्मान: IPL से पहले आरोप लगा रो रहे वामपंथी

IPL- 2021 के मद्देनजर चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टूर्नामेंट के लिए टीम की नई जर्सी का अनावरण किया लेकिन...

बनारस की अड़भंगी चिता-भस्म होली: 11 तस्वीरों और 5 वीडियो से समझिए काशी की परंपरा, जहाँ मृत्यु भी है उत्सव

बनारस की होली भी बनारस के मिजाज के अनुसार ही अड़भंगी और निराली है। यह दुनिया का इकलौता शहर जहाँ अबीर, गुलाल के अलावा धधकती चिताओं के बीच चिता-भस्म से होली खेली जाती है।

एक पत्रकार जिसे धारदार हथियारों से काट डाला गया… आज अपराधियों की मजहबी पहचान छिपाने पर करते सवाल

दंगाइयों को समझाने की कोशिश कर रहे गणेश शंकर विद्यार्थी को आज ही के दिन, 25 मार्च 1931 को तेज धार वाले हथियारों से काट डाला गया था।

काशी में क्यों खेली जाती है चिता-भस्म की होली, भूतभावन महादेव अब भी आते हैं महाश्मशान मणिकर्णिका?

बनारस की होली भी बनारस के मिजाज के अनुसार ही अड़भंगी है। दुनिया का इकलौता शहर जहाँ अबीर, गुलाल के अलावा धधकती चिताओं के बीच चिता भस्म की होली होती है।

हिन्दू मंदिरों के सरकारी नियंत्रण से मुक्ति की मुहिम में सद्गुरु के साथ आए सहवाग, देश भर में अभियान चलाने की जरुरत

"कभी ये मंदिर था, भक्ति का, समर्पण का! अब ऐसा खंडहर है कि शराबियों और गंदगी फैलाने वालों के लिए भी सुरक्षित नहीं है। समय आ गया है कि तमिलनाडु के मंदिर मुक्त हों।"

उड़त गुलाल लाल भए अम्बर: माँ गौरा का गौना कराने निकले महादेव, काशी में जीवन के उत्सव का आगाज

रंगभरी एकादशी वैसे तो पूरे देश में मनाई जाती है, पर काशी जैसा उत्साह शायद ही कहीं दिखता है। रंग-गुलाल से सराबोर काशी की यह परंपरा 357 साल पुरानी है। आज से बुढ़वा मंगल तक अब हर तरफ बनारस में एक ही रंग दिखेगा और वह रंग है होली का।

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