श्री लंका के इस पहले उपग्रह (कक्षा में स्थापित) का वजन 1.5 किलोग्राम है। यह श्री लंका और उसके आसपास के क्षेत्रों के चित्र लेकर उस इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों को समझने में और बेहतरी प्रदान करेगा।
"पश्चिमी दिल्ली के संसदीय क्षेत्र में सरकारी जमीन, सड़कों, पार्कों और दूसरे अनुचित स्थानों पर मस्जिदों का निर्माण किया जा रहा है। सार्वजनिक जमीनों पर बनी मस्जिदों के कारण न सिर्फ ट्रैफिक की समस्या होती है, बल्कि आस-पास रहने वाले लोगों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।"
वो पीढ़ी जिसने जब से होश संभाला है, या राजनैतिक रूप से जागरुक हुए हैं, उन्होंने भारत का इतिहास भी ढंग से नहीं पढ़ा, उनके लिए ऐसे सीरिज़ ही अंतिम सत्य हो जाते हैं। उनके लिए यह विश्वास करना आसान हो जाता है कि अगर इस्लामी आतंक है तो हिन्दू टेरर क्यों नहीं हो सकता।
हिन्दू मंदिरों की ज़मीनों पर काफ़ी समय से यह फर्जीवाड़ा जारी है। 20124.08 एकड़ की मंदिरों की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा हुआ है। यह कब्ज़ा ऐसे होता है कि मंदिर की ज़मीन जिसे रियायती दरों पर किराए पर दी जाती है, वह उसका प्रयोग खुद न कर आगे दूसरों को ज़्यादा महंगे दामों पर किराए पर दे देते हैं।
12 ‘दागदार’ व ‘सुस्त’ वरिष्ठ अधिकारियों को समय-पूर्व रिटायरमेंट देने के बाद एक और बार अकुशलता पर चाबुक चलाते हुए मोदी सरकार ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व कस्टम बोर्ड के 15 बड़े अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया है। इन सभी अधिकारियों पर पद की नियमावली के खिलाफ काम करने...
"भारत में हुए सारे आतंकी हमलों के लिए मोहन भागवत ही ज़िम्मेदार हैं, चाहे वो 26/11 का मुंबई हमला हो या फिर पुलवामा हमला। इतिहास में महात्मा बुद्ध और महावीर ने ब्राह्मणवादी जातिवाद के ख़िलाफ़ लड़ाइयाँ लड़ी थीं। तुम एक राष्ट्रवादी नहीं हो, एक रेसिस्ट और हत्यारे हो।"
इनके हर झूठ को बेनकाब कीजिए, इन्हें पढ़िए, तर्कों से घेरिए, इनसे सवाल पर सवाल कीजिए, इनके हर नैरेटिव की लंका लगा दीजिए। इनसे पूछिए कि क्यों ऐसे स्टोरी-टेलर और पूँजीपति हलाला, तलाक या आतंकवाद या समुदाय विशेष पर खुलकर कुछ नहीं कह पा रहे, कुछ बना नहीं पा रहे?
"अमरनाथ यात्रियों को रेलवे का तोहफ़ा: विश्व प्रसिद्ध तीर्थ बाबा अमरनाथ के दर्शन हेतु जाने वाले श्रद्धालुओं के लिये रेलवे विशेष ट्रेन चलाने जा रहा है। यह ट्रेन 1 जुलाई से शुरु होगी तथा सप्ताह में दो बार आनंद विहार, दिल्ली से उधमपुर तक चलेगी।"
जापानी इंसेफेलाइटिस के कारण हुई मौतों में एक वर्ष के भीतर दो तिहाई की कमी आई। जहाँ 2017 में इस बीमारी से 557 जानें गई थीं, 2018 में यह आँकड़ा 187 रहा। इस वर्ष फ़रवरी में जापानी इंसेफेलाइटिस की वजह से 1 भी बच्चे की जान जाने की बात सामने नहीं आई है।
मानवाधिकार के मामले में चीन के रवैये को देखते हुए हॉन्ग कॉन्ग के लोगों का डर जायज है। हॉन्ग कॉन्ग पहले ब्रिटिश शासन के आधीन था। हॉन्ग कॉन्ग को विशेष दर्जे के तहत कई अधिकार 50 वर्षों के लिए दिए गए थे, जो 2047 में ख़त्म होने वाला है।