दिल्ली दंगों पर आपने कई रिपोर्ट पढ़ी होगी। अब पढ़िए उमर खालिद और ताहिर हुसैन का कबूलनामा, जो बताता है कि हिंदुओं के खिलाफ कितने बड़े स्तर पर प्लानिंग की गई थी।
अपराधी कथित रूप से फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनाते थे और लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते थे। ये लोग ज्यादातर 50 वर्ष से ज्यादा की उम्र वालों को अपना शिकार बनाते थे, जो आमतौर पर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं।
इस पर 'निजी संपत्ति' का बोर्ड लगाने वाले एक काजी ने दावा किया कि यह एक हजार साल पुराना ना होकर चार सौ साल पुराना है, जिसे उनके पूर्वजों द्वारा पूरा कराया गया था।
ऋषिकेश पवार की तलाश जारी है। वो सुशांत सिंह राजपूत के ड्रीम प्रोजेक्ट में असिस्टेंट डायरेक्टर थे। कई सबूत सामने आए हैं, जिसमें ये साफ हुआ है कि ऋषिकेश पवार ही सुशांत को ड्रग्स सप्लाई करते थे।