स्थानीय लोगों का कहना है कि अब्बास और उसके साथी सड़क पर कुर्सी लगाकर बैठे हुए थे, जिसे हटाने की बात को लेकर व्यापारियों ने पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता और मारपीट की।
जब उनसे पूछा गया कि इस 'किसान आंदोलन' में इंदिरा गाँधी की हत्या को याद कराते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी गई है, तो उन्होंने कहा कि जिसने जो बोया है, वो वही काटेगा।
3 नवंबर को दायर की गई अपनी याचिका में शौविक ने कहा था कि उन्हें इस केस में फँसाया जा रहा है, क्योंकि उनके मुताबिक उनके कब्जे से कोई भी ड्रग या साइकोट्रॉपिक पदार्थ जब्त नहीं हुए थे।
हैरान होने वाली बात तो है कि आखिर एक साल में बीकेयू इतना बड़ा यूटर्न कैसे ले सकती है। वह लगातार कृषि क्षेत्र में किसानों के हित के लिए बिचौलियों को हटाना चाहते थे।