निर्भया मामले में फाँसी की सजा पाए चारों दोषियों में से एक मुकेश सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद बुधवार शाम को पटियाला हाउस कोर्ट में डेथ-वारंट पर रोक लगाने की माँग करते हुए याचिका दायर की थी। जिसके बाद कोर्ट ने आज इसपर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया।
"यह विरोध जोखिम भरा हो सकता है और बच्चों को खतरों का भी सामना करना पड़ सकता है। निश्चित रूप से यह गंभीर रूप से चिंता का विषय है कि जो अपराध बच्चों ने किया ही नहीं उसके लिए उन्हें दंडित भी किया जा सकता है।"
बीते दिनों हुए इन प्रदर्शनों में करीब 30 पोस्टर ऐसे दिखाई दिए, जो हिंदूघृणा की खुली किताब थे। जिन्हें देखते ही अंदाजा लग जाएगा कि सेकुलरिज्म बचाने के नाम पर ये हिंदुत्व पर हमला है।
हिन्दू घृणा से सने शाहीन बाग़ इलाक़े में CAA और NRC के ख़िलाफ़ ‘जिन्ना वाली आज़ादी’ जैसे नारे लगाए गए थे। इस दौरान ऐसे पोस्टर भी देखे गए जिनमें हिन्दू धर्म की तुलना नाज़ीवाद से और स्वास्तिक का दुरुपयोग करते हुए विखंडित दिखाया गया।
हमने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है, जिससे कि आतंक प्रयोजित और उनके लिए फंडिंग करने वाले देशों को कूटनीतिक तरीके से विश्व स्तर पर अलग-थलग किया जा सके। हम आतंक को खत्म करना चाहते हैं तो हमें अमेरिका द्वारा 9/11 के बाद आंतकियों के ख़िलाफ अपनाई गई नीति को अपनाना होगा
पाँच लाख की डिमांड पूरी न होने पर महिला को तीन तलाक दे दिया। महिला ने एक महीने पहले ही बाबूपुरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद नूरजादे सउदी अरब भाग गया। जिसके बाद देवर फैसल ने मायके में आकर धमकी देना शुरू कर दिया।
अचानक कुछ मुस्लिम युवक बिना साइलेंसर वाली मोटरसाइकल चलाकर हल्ला करने लगे। रात का समय होने के कारण इलाके में रह रहे हिंदुओं को इससे परेशानी होने लगी। उन्होंने आपत्ति जताई तो विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते मुस्लिम समुदाय के लोगों ने...
तारिक इक़बाल नाम का शख़्स चलते-चलते बर्फ़ के नीचे दब गया था। कई फीट बर्फ उसके ऊपर, शरीर का कोई भी अंग दिख नहीं रहा था। फिर भी सेना के जवानों ने हिम्मत नहीं हारी। बड़ी मेहनत के बाद उसे बर्फ़ से बाहर निकाला जा सका। घटना का वीडियो वायरल हो चुका है।
इस मामले में कुछ लोगों ने यह दावा किया कि मंदिर में होने वाले अनुष्ठान में बाधा उत्पन्न करने या उन्हें नष्ट करने के लिए ख़ून का उपयोग किया गया। वहीं, पुलिस को जाँच में पता चला कि ख़ून से लिखा गया नाम इलाक़े के एक किशोर लड़के और लड़की का था।
हाल ही में मुंबई में हुए एक विरोध प्रदर्शन में एक लड़की द्वारा "फ्री कश्मीर" का पोस्टर लहराने पर उसके ख़िलाफ में केस दर्ज किया गया था। हालाँकि, बाद में जेएनयू छात्रों ने सफाई देते हुए कहा कि वो कश्मीर में फ्री इंटरनेट को लेकर लिखा गया था, लेकिन अब आइशी घोष खुद इसे लेकर खुलकर सामने आ गई हैं।