BHU के कुलपति राकेश भटनागर JNU के पूर्व प्रोफ़ेसर हैं। छात्रों ने आरोप लगाया है कि वीसी हिन्दी भाषी छात्रों के साथ भेदभाव कर रहे हैं। यहाँ तक कि भर्ती प्रक्रिया में वह अपने JNU के छात्रों को वरीयता दे रहे हैं। उन पर BHU का कुलपति रहते हुए अधिकांश नियुक्तियों में JNU, वामपंथ और अँग्रेजी को वरीयता देने जैसे कई गंभीर आरोप छात्रों ने पहले भी लगाए हैं।
दिल्ली की पटियालाा हाउस कोर्ट ने मुकेश समेत चार दोषियों को फाँसी देने के लिए 22 जनवरी का डेथ वॉरंट जारी किया था। हालाँकि, मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास लंबित होने के कारण बृहस्पतिवार को कोर्ट ने कहा कि 22 जनवरी को फाँसी नहीं दी जा सकती है।
मुजफ्फरनगर में सीएए विरोध के नाम पर हुई हिंसा के दौरान कई बच्चे पुलिस पर पत्थर फेंकते और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाते देखे गए थे। इस संबंध में अब तक 47 मामले दर्ज किए गए हैं। 250 से अधिक आरोपितों में से करीब 80 गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
"कैंपस के हॉस्टल में रहने वाले 65% से अधिक छात्रों ने अपने बकाया शुल्क का भुगतान कर दिया है। कुछ छात्र जो इस बीच अपने घर चले गए थे वे भी वापस कैंपस में लौट रहे हैं।”
डॉ. विजयाहरि ने कट्टरपंथियों के कुछ संदेशों का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इसमें उन्हें बदनाम करने की धमकी दी गई है। साथ ही उन्हें सांप्रदायिक करार देते हुए कहा गया है कि वे सहानुभूति की उम्मीद न रखें।
22 दिसंबर को रैली के दौरान बीजेपी और आरएसएस समर्थकों को निशाना बनाया गया। केरल में एसडीपीआई भाजपा नेता एके नजीर पर भी हमला कर चुका है। इस चरमपंथी संगठन ने नागरिकता कानून का समर्थन करने वालों को जिंदा नहीं बख्शने की धमकी दे रखी है।
उम्र कैद की सजा काट रहा जलीस बम बनाने में माहिर है। वह सिमी और इंडियन मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी संगठनों से जुड़ा था और उन्हें बम बनाना सिखाता था। वह देश भर के कई बम धमाकों में आरोपित है।
धनबाद के झरिया में महिलाओं से बदसलूकी। शवयात्रा में शामिल लोगों को भी पीटा। बीते दिनों धनबाद में सीएए विरोध के नाम पर भी पैदी की गई थी अराजकता। दबाव में 3000 दंगाइयों के साथ प्रशासन ने दिखाई थी नरमी।
रवीश कुमार ने कहा कि चीन को वैश्विक आम सहमति के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और भविष्य में इस तरह की कार्रवाई से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक आम सहमति है कि कश्मीर द्विपक्षीय मुद्दा है।
एएमयू इंतजामियाँ ने आंदोलनकारी छात्रों के दवाब में आकर सभी कॉलेजों में होने वाली परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है, जिससे उन छात्रों को ज़ोरदार धक्का लगा है, जो विश्वविद्यालय में कक्षाएँ संचालित होते और अपनी परीक्षाएँ समय पर देना चाहते थे।