जम्मू-कश्मीर में कभी पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाते तो कभी सेना पर पत्थरबाजी का सीन आम है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ जब कश्मीरी पंडित ने 'फ्री कश्मीर फ्रॉम इस्लामिक टेररिज़्म' का पोस्टर लहराया हो, विदेशी दल को जमीनी हकीकत से वाकिफ कराया हो।
IIM अहमदाबाद के 90 से अधिक छात्रों ने CAA के समर्थन में एक याचिका दायर की है। इन पूर्व छात्रों का कहना है कि CAA के साथ NRC लागू किए जाने से देश में किसी भी समुदाय को कोई खतरा नहीं है और इसके विरोध में झूठ और अफवाहें सिर्फ हिंसा फैलाने के लिए गढ़े जा रहे हैं।
इंडिया टुडे समूह के पत्रकार राहुल कंवल इस वीडियो में बता रहे हैं कि किस प्रकार उनके 2 खोजी पत्रकारों- जमशेद खान और नितिन जैन की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने कथित ABVP कार्यकर्ता अक्षत अवस्थी का पर्दाफाश किया है।
पुलिस ने बताया कि पीड़िता और इस अपराध के पीछे का मास्टमाइंड महबूर मियाँ खान पिछले एक साल से संबंध में थे। रविवार को लड़की अपने घर से बाजार जाने को कहकर निकली थी। लेकिन महबूर उसे अपने साथ बेलखोर इलाके में सुनसान जगह ले गया और...
JNU में हुई हिंसा में छात्र संघ प्रेसीडेंट आइशी घोष समेत चुनचुन कुमार, पंकज मिश्रा, प्रियरंजन, योगेंद्र भारद्वाज, वास्कर विजय मेक, सुचिता तालुकदार, डोलन सामंता और विकास पटेल का नाम शामिल है। हिंसा के पीछे एक व्हाट्सएप ग्रुप का भी हाथ है, जिसका नाम है- यूनिटी अगेन्स्ट लेफ्ट।
CAA के विरोध की आड़ में इस्लामिक कट्टरपंथियों और वामपंथियों ने हिंदू विरोधी नारे लगाए। 'फक हिंदुत्व' लिखकर 'ऊँ' चिह्न का भरी दुनिया के सामने अपमान किया। अब इसी इस्लामिक भीड़ ने शाहीन बाग के प्रोटेस्ट में जिन्ना वाली आजादी के नारे लगाए और वहाँ किसी ने इस पर आपत्ति नहीं जताई।
AMU में विरोध प्रदर्शन के नाम पर एक बार फिर आपत्तिजनक नारे लगाए जाने का मामला सामने आया है। अलीगढ़ पुलिस ने इस मामले में करीब 60 छात्रों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। भड़काऊ नारेबाज़ी करने वालों से सख़्ती से निपटने की बात कही गई है।
जनगणना पारंपरिक पेन और पेपर के बजाए मोबाइल फोन एप्लीकेशन के जरिए होगी। अधिसूचना में साफ शब्दों में कहा गया है कि मोबाइल नंबर सिर्फ जनगणना के मकसद से ही पूछा जाएगा। इसके अलावा परिवार के मुखिया का नाम, शौचालय का इस्तेमाल करते हैं या नहीं, पीने के पानी के स्नोत जैसे सवाल पूछे जाएँगे।
हालात का जायजा लेने के बाद विदेशी राजनयिकों ने कहा कि स्थानीय लोगों ने रक्तपात के पाकिस्तानी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। हिंसा के लिए पाकिस्तान को ही कसूरवार ठहराते हुए स्थानीय लोगों ने उस पर दबाव बनाने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि वे सुरक्षा के मुद्दे के साथ मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को संतुलित करने की पूरी कोशिश करेंगे। इंटरनेट पर एक समय-सीमा तक ही रोक लगनी चाहिए।