"मेरी खुद की भी एक बेटी है, मैं 'प्रीति रेड्डी' के परिवार का दर्द समझ सकती हूँ। हैवानियत भरे कृत्य के लिए मेरे बेटे को फाँसी दे दी जानी चाहिए या फिर जिंदा जला दिया जाना चाहिए। अगर अपने बेटे का बचाव करती हूँ तो लोग पूरी जिंदगी मुझसे नफरत करेंगे।"
लिंगाराम ने बताया कि दोनों पहली नज़र में ही संदिग्ध प्रतीत हो रहे थे। उनकी गतिविधियाँ संदेहास्पद होने के कारण लिंगाराम ने उन्हें पेट्रोल बेचने से इनकार कर दिया। गवाह लिंगाराम ने पुलिस को यह भी बताया कि वो आरोपितों को सामने देखते ही पहचान सकते हैं। इसके बाद ही...
"कॉन्वेंट्स में जवान ननों को पादरियों के पास उनके 'यौन सुख' के लिए भेजा जाता है। वहाँ उन्हें घंटों नंगे खड़ा रखा जाता है। वो लगातार गिड़गिड़ाती रहती हैं लेकिन उन्हें जाने नहीं दिया जाता है। 'सेफ सेक्स' के लिए आयोजित 'प्रैक्टिकल क्लास' में पादरी और भी कई कुकर्म करते हैं।"
अरशद का मामा हारुन एक आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या की सुपारी देने के मामले में जेल में बंद है। उसकी मदद से अरशद राजनीति में जगह बनाने की कोशिश कर रहा था। अपने मंसूबों में वह कामयाब होता इससे पहले ही उसकी साजिश सामने आ गई।
शनिवार को चॉंद पीड़िता से मिलने उसके घर पहुॅंचा। उस वक्त घर में पीड़िता अकेली थी। उसने पीड़िता के साथ जबर्दस्ती करने की कोशिश की। इसी दौरान वह अचेत हो गई और चॉंद उसके घर से भाग खड़ा हुआ।
आरोपित पीड़िता को घसीटकर खेत में ले गए। सॉफ्ट ड्रिंक में व्हिस्की मिलाकर उसे पीने को मजबूर किया। सिर पर वार किया। बारी-बारी से रेप करने के बाद उसकी हत्या कर दी। फिर लाश को लॉरी में डाल लिया, लेकिन दरिंदगी जारी रही...
हाजी सईद ने बताया कि राम मंदिर निर्माण के लिए हुए एक यज्ञ में शामिल हुए थे। कार्यक्रम की फोटो सार्वजनिक होने के बाद उन्हें उनके धर्म से खारिज कर दिया गया। माफी मॉंगने के बाद भी उन्हें अंजाम भुगतने की धमकी मिल रही है।
रात के सवा नौ बजे जब डॉ. प्रीति ने अपनी बहन को फ़ोन किया था, उसी समय आरिफ़ ने उनके पास आकर मदद की पेशकश की थी। टोल प्लाजा पर स्कूटी खड़ी करते देख ही वह अपने साथियों के साथ रेप और मर्डर का प्लान बना चुका था।
लगभग 35-वर्षीया महिला की लाश की प्रारम्भिक जाँच में पुलिस को संदेह है कि उसने खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसकी लाश सिद्दुलागट्टा रोड पर एक सुनसान जगह पर पड़ी मिली थी। पुलिस ने बताया कि महिला की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी।
13 दिसंबर 2018 को इन मछुआरों ने तिरुवनंतपुरम का तट छोड़ा था। यमन के एक एंप्लॉयर ने नौकरी का झाँसा देकर उन्हें क़ैद कर लिया। उन्हें नाव में कैद कर रखा गया था।