"संविधान भी धर्म विशेष संस्थानों के लिए विशेष अधिकार प्रदान करता है और वह अधिकार सभी को मिलना चाहिए। संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय को भी विशेष अधिकार प्राप्त हैं किन्तु जानकारी के अभाव में प्रशासन द्वारा भूल हुई है इसलिए अपनी गलती स्वीकार करते हुए उसे सुधार करने का प्रयास करना चाहिए।"
मनचला मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। जॉंच के दौरान उसके व्हाट्सएप चैट में कुछ अश्लील मैसेज भी दिखे जो उसने महिलाओं को परेशान करने करने के लिए उन्हें भेजे थे।
भरोसा जीतने के लिए आरिफ ने डॉ. रेड्डी को अपना नंबर दिया था। जब स्कूटी ठीक कराने गया युवक काफी देर तक नहीं लौटा तो इस नंबर पर उन्होंने कॉल किया। इसी नंबर को ट्रेस कर पुलिस लॉरी तक पहुॅंची और मामले की गुत्थी सुलझी।
प्रोफेसर पाठक ने कहा कि जाँच रिपोर्ट कुलपति को सौंपी जाएगी। इंटरनल कंप्लेंट कमिटी की जाँच में क्या निकला, इस सम्बन्ध में अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुछ भी जानकारी नहीं दी है।
संघ प्रमुख ने कहा कि महिला के प्रति पुरुषों को शुद्ध दृष्टि रखनी होगी, जो अपराध करने वाले हैं इनकी भी तो माताएँ-बहने होंगी, तभी तो इनका भी अस्तित्व है।
उन 3 बूचड़खानों की पहचान की गई, वहाँ से 200 किलोग्राम मिलावटी मांस (मटन+बीफ) जब्त किया गया। इससे पहले लगभग 10 टन संदिग्ध गोमांस जब्त किया गया था। वेटरिनरी विंग के प्रमुख ने मीट खरीदते समय लोगोंं को सतर्क रहने की सलाह दी और साथ ही कहा कि...
"हमारे समुदाय में अगर कोई अविवाहित लड़की की मृत्यु होती है तो एक पेड़ से उसकी शादी की रस्म निभाई जाती है। अफसोस कि मेरी भतीजी डॉक्टर रेड्डी के मामले में ये भी नहीं हो सका।"
6 साल की एक बच्ची से बलात्कार की दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। रेप के बाद हत्यारे ने मासूम बच्ची को इस कदर तड़पा-तड़पा कर मारा कि उसकी आँख तक बाहर आ गई। उसे मारने के लिए हत्यारे ने बच्ची के स्कूल बेल्ट से ही उसका गला घोंट दिया।
जब शिवा स्कूटी लेकर लौटा, तब मोहम्मद आरिफ ने 'प्रीति रेड्डी' का हाथ पकड़ा और केशवुलु ने उनके पाँवों को जकड़ लिया। नवीन ने पीड़िता का कमर पकड़ा और तीनों उन्हें उठा कर झाड़ियों में ले गए। पुलिस की रिपोर्ट में चारों आरोपितों के कुकर्मों का है पूरा विवरण।
2011 से 2016 के बीच 107 लोगों ने इस कुप्रथा के चलते अपनी जान गँवाई थी। जबकि इसके बाद भाजपा के शासनकाल में इससे संबंधी आँकड़ों में अच्छी-खासी गिरावट। जून 2016 से लेकर अक्टूबर 2019 तक अंधविश्वास के चलते होने वाली हत्या का आँकड़ा गिरकर 23 पर आ गया।