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RTI से ऊपर नहीं CJI, पब्लिक अथॉरिटी बनना है तो पारदर्शिता ज़रूरी: रंजन गोगोई की पीठ का फैसला

"पारदर्शिता से न्यायिक स्वतंत्रता कमज़ोर नहीं होती। न्यायिक स्वतंत्रता जवाबदेही के साथ ही चलती है। यह जनहित में है कि बातें बाहर आएँ।"

असम ही नहीं केरल भी पहुँच जाते हैं बांग्लादेशी और करते हैं मर्डर, 2 हत्यारों को खोज रही पुलिस

75 वर्षीय एपी चेरियन को लोहे के रॉड से मार डाला। 68 वर्षीय उनकी पत्नी लिलिकुट्टी चेरियन को हत्यारों ने कुदाल से काट डाला। हत्यारों की तलाश में लुक आउट नोटिस जारी।

अयोध्या पर फैसला सुनाने वाले 5 जज उस समय पैदा भी नहीं हुए थे, जब दायर हुआ था पहली बार मुकदमा

साल 1950 में 16 जनवरी को फैजाबाद जिले के स्थानीय कोर्ट में पहली बार इस संबंध में मुकदमा दर्ज हुआ था। राम मंदिर पर फैसला सुनाने वाले सीजेआई रंजन गोगोई इन पाँचों न्यायधीशों में उम्र के लिहाज से सबसे बड़े हैं, जिनकी जन्मतिथि 18 नवंबर 1954 है।

‘5 एकड़ जमीन मिली तो बनवाएँगे स्कूल या अस्पताल’ – 14 कोस में जगह माँगने वाले इकबाल अंसारी

"अगर सरकार हमें जमीन देती है तो हम वहाँ पर स्कूल या फिर अस्पताल बनवाएँगे। कोर्ट के फैसले के बाद दोनों समुदाय के बीच पैदा हुई नफरत खत्म हो गई हैं। इसलिए अब वे नहीं चाहते कि हिंदुस्तान में माहौल में बिगड़े। मोदी और योगी सरकार में अमन शांति है..."

‘कारसेवकों को मिले शहीद का दर्जा, उनके ख़िलाफ़ दर्ज मामले वापस लिए जाएँ’ – PM मोदी को पत्र

"चूँकि अब यह स्पष्ट हो गया है कि श्री रामलला एक निर्विवाद मंदिर है, इसलिए उसका शिखर भी मंदिर का था, न कि किसी मस्जिद का गुंबद, तो अनजाने में मंदिर के शिखर को तोड़ने वाले कारसेवकों पर चल रहे बाबरी मस्जिद के गुंबद तोड़ने वाले केस को अविलम्ब सरकार द्वारा समाप्त किया जाए।"

माओवादी कैसे मारे गए, इसकी जाँच हो लेकिन रिपोर्ट आने तक हम कोई सवाल नहीं खड़े कर रहे: केरल HC

इस की जाँच हो कि एनकाउंटर में शामिल अफसरों के हाथों इस घटना के दौरान कोई आपराधिक कृत्य तो नहीं घटित हुआ है। लेकिन इसे एनकाउंटर की सत्यता, उसकी परिस्थितियों या माओवाद के आरोपितों की मृत्यु पर सवाल के रूप में न देखा जाए।

राम मंदिर निर्माण की देख-रेख करें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: राम जन्मभूमि न्यास ने उठाई माँग

“राम जन्मभूमि न्यास चाहता है कि योगी आदित्यनाथ ट्रस्ट का नेतृत्व करें। गोरखपुर में प्रतिष्ठित गोरखनाथ मंदिर, जो गोरक्षा पीठ से संबंधित है, ने राम मंदिर आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई है। महंत दिग्विजय नाथ, महंत अवैद्यनाथ और अब योगी आदित्यनाथ मंदिर आंदोलन के अभिन्न अंग रहे हैं।”

सदियों पुरानी मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ पड़ी हुई हैं सरकारी दफ्तर में कूड़े की तरह, म्यूजियम ने रखने से कर दिया मना

इन कलाकृतियों में सदियों पुरानी मूर्तियाँ, पत्थर के खंभे, लकड़ी से बने वाहन, रथ आदि जैसी प्राचीन वस्तुएँ हैं। जिन्हें भवन के परिसर में खुली जगह पर बिन किसी खास देख-रेख के कूड़े की तरह फेंक दिया गया।

नई मस्जिद का नाम डॉ कलाम, परमवीर अब्दुल हमीद या अशफाकउल्ला खान के नाम पर हो: VHP की माँग

“बाबर एक विदेशी एक आक्रांता (हमलावर) था। हम सरकार को इसकी अनुमति नहीं देने के लिए संपर्क करेंगे। भारत में बहुत सारे अच्छे मुस्लिम हैं। देश की शांति और विकास में उनका काफी योगदान रहा है। इनमें वीर अब्दुल हमीद , अशफाकउल्ला खान और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का नाम आता है।। नई मस्जिद का नाम उनमें से किसी के नाम पर रखा जाना चाहिए।”

अयोध्या अधिनियम 1993 की वो धारा, जिसके तहत बनेगा राम मंदिर के लिए ट्रस्ट

इस मामले में अयोध्या अधिनियम की वैधता को डॉक्टर एम इस्माइल फारुकी और अन्य बनाम भारत संघ व अन्य 1994 SCC (6) 360 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखा गया था। अगर उस समय ऐसा नहीं होता तो अधिनियम की धारा 4(3) को रद्द कर दिया जाता और जो सुनवाई अयोध्या पर हुई, वो कभी संभव ही नहीं होती।

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