राज्य में भाजपा की सरकार। केंद्र में भाजपा की सरकार। लेकिन मार दिए गए एक भाजपा विधायक को न्याय नहीं मिल पाया। 2005 में हुई हत्या के मामले में आज तक कोई अपराधी नहीं! किस पर दोष लगाया जाए? क्या सरकारें अपना काम करने में विफल रहीं? क्या न्यायपालिका को सच नहीं दिख पाया? या फिर मुख़्तार अंसारी और उसके परिवार का रसूख सब पर भारी पर गया?
डॉक्टर की पिटाई का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस पूरी घटना में आप देख सकते हैं कि मरीज़ के साथ आए परिजनों ने किस तरह से डॉक्टर रुम में ही डॉक्टर की सरेआम पिटाई कर दी।
मौला बाबा मज़ार पर दुआ माँगने के बाद दोनों लड़कियाँ अचानक लापता हो गईं। मज़ार क्षेत्र में और उसके आसपास बड़े पैमाने पर उनकी तलाश के बावजूद माँ गुड्डी देवी उनका पता नहीं लगा सकीं। लापता होने के बाद इन लड़कियों के मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ़ हो गए।
2016 में जान-पहचान। जल्द ही प्रपोज़ भी। 2017 में धर्मांतरण के लिए बाध्य कर किया निकाह। शादी के कुछ दिन बाद से ही मार-पीट और अप्राकृतिक सेक्स के लिए प्रताड़ना। इसके बाद जल्दी पैसे कमाने की चाहत में बलात्कार के झूठे मामले दर्ज कराने का बनाने लगा दबाव।
गर्मी के चलते मुदस्सिर की दो बेटियाँ बाहर सो रही थीं। लड़कियों को सोता देख महताब और आफ़ताब ने उन पर फब्तियाँ कसनी शुरू कर दीं। विरोध करने पर मारपीट शुरू कर दी। चीख-पुकार सुनकर लड़कियों की माँ बिलिकिस बेगम बीच-बचाव करने आईं लेकिन उन्हें लाठियों से मार-ंमार कर...
"जब मैंने मॉडलिंग शुरू की, तो मैंने देखा लोग कैसे मुझे ट्रीट कर रहे हैं, मुझे अच्छा लग रहा है, जबकि दूसरी ओर मदरसे में मुझे मारा जाता था, मुझे गाली दी जाती थी, मेरे साथ गलत बर्ताव होता था, और मुझे बंधक बनाकर रखा जाता था, सिर्फ़ इसलिए ताकि मैं अल्लाह के बारे में पढ़-सीख सकूँ।"
बच्चों की लड़ाई का मामला शांत होने के बाद किस्मत अली दर्जन भर 'अपने लोगों' के साथ गाँव में पहुँचा। उन्होंने लाठी-डंडे से लैस होकर तिलकराम के घर धावा बोल दिया। जब तिलकराम के परिजनों ने इसका विरोध किया, तब किस्मत अली व उसके लोगों ने सब की पिटाई की।
कंगना ने बताया है कि 2008-09 में वह बांद्रा के एक घर में शिफ्ट हो गई और अपनी बहन के साथ रहने लगी। यहाँ भी पंचोली आने लगा और उनकी बहन को भी प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पंचोली ने उनकी बहन को परेशान नहीं करने के एवज में एक करोड़ रुपए की माँग की थी।
यह मामला पहला नहीं है और न ही आखिरी, जिस तरह से मुस्लिम महिलाओं को लगातार तीन तलाक़ और हलाला के नाम पर शोषण और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। वह बहुत ज़्यादा भयावह है। तीन तलाक़ बिल प्रक्रिया में है। जल्द ही ऐसे शख्त कानून को अमल में लाने की ज़रूरत है ताकि तमाम पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिल सके।
हाल में तीन तलाक का एक मामला यूपी के सीतापुर से सामने आया था। इस मामले में शराब पीने से मना करने पर नाराज होकर पति ने पत्नी को तीन तलाक दे दिया। इसके बाद पत्नी की बेरहमी से पिटाई की और उसे घर से निकाल दिया।