श्रीनगर के एक पूर्व आतंकी का कहना है कि अगर यह 1947 में हो गया होता तो आज शायद वो संसद या एसेंबली में होते। उन्होंने कहा कि ब्लैकमेल और मजहब की सियासत के कारण ही उनके जैसे कई युवाओं ने राह भटक कर बंदूक उठा ली और कुछ अब भी उठा रहे हैं।
"मेरी हत्या हो सकती है। मरना तो वैसे भी है। शायद हत्या ही मेरी नियति में है। इसके लिए एफसीसी और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होगा। मैं यहाँ कॉन्वेंट में रहूँगी। मैंने पुलिस से सुरक्षा भी माँगी है। लेकिन उन्होंने अब तक कुछ नहीं किया है।”
कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की याचिका में हस्तक्षेप की मॉंग। 16 अगस्त को CJI की अगुवाई वाली पीठ ने भसीन की याचिका पर सुनवाई को दो हफ्ते के लिए टाल दिया था और कहा था कि सरकार को सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए और समय दिया जाना चाहिए।
तीनों बैंक कर्मचारियों के ख़िलाफ़ PNB की एक शाखा के उप सर्कल प्रमुख ने पांच अप्रैल 2017 को शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि आरोपियों ने दो बार ग़लत रिकॉर्ड बनाया है, जो डिपॉजिटर द्वारा भरे गए असली वाउचर से मेल नहीं खा रहे थे।
कृष्ण जन्माष्टमी पर परंपरा स्वरूप कृष्ण की झाँकी निकाले जाने की तैयारी थी, लेकिन जुमे की नमाज़ के चलते झाँकी का समय दोपहर 3 बजे रखा गया। इसके बावजूद 3 बजे जैसे ही झाँकी गाँव के चौराहै पर पहुँची, तो दूसरे समुदाय ने...
दुष्कर्म में आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ पिछले साल सितंबर में हुए विरोध-प्रदर्शन में शामिल 5 ननों में से एक लूसी कलपूरा हैं। इसके कारण FCC ने उन्हें बर्खास्त कर 17 अगस्त तक कॉन्वेंट छोड़ने को कहा था। इसके खिलाफ उन्होंने वेटिकन में अपील कर रखी है।
लोगों को लाल चौक और सोनावर जाने से रोकने के लिए शहर में कई जगह अवरोधक और कंटीले तार लगाए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र का कार्यालय इसी इलाके में है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जगह-जगह सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
आंध्र प्रदेश के राजस्व मंत्री वेल्लमपल्ली श्रीनिवास ने स्पष्ट किया है कि ये टिकट बंडल चुनाव से पहले तेलुगु देशम शासन के दौरान छापे गए थे और टिकट के बंडल नेल्लोर और कडप्पा के लिए थे। वे तिरुमाला-तिरुपति कैसे आए, इसकी अब जाँच की जाएगी।
उत्तरकाशी में शनिवार की रात को अराकोट, माकुड़ी और टिकोची में बादल फटा था। इसके चलते आसपास के गाँवों में भारी बारिश से तबाही मच गई थी। तभी से NDRF की टीमों के अलावा सेना के हेलीकॉप्टर उत्तरकाशी में राहत और बचाव अभियान में मुस्तैदी के साथ जुटे हुए हैं।
हिन्दुओं को इससे फर्क नहीं पड़ता कि वो कौन-सा मांस खा रहे हैं। जिन्हें फर्क पड़ा, तो उन्हें 'बिगट', 'कम्यूनल', 'असहिष्णु' और पता नहीं क्या-क्या कह दिया गया। क्योंकि बहुसंख्यकों का न तो कोई धर्म है, न उनकी भावना आहत होती है।