यासीन मलिक के ख़िलाफ़ इस समय जिन दो मामलों में केस चल रहा है, वह काफ़ी पुराने हैं। रुबिया सईद के अपहरण के दौरान सीबीआई द्वारा दाखिल चालान के मुताबिक श्रीनगर के सदर पुलिस स्टेशन में आठ दिसंबर 1989 को रिपोर्ट दर्ज हुई थी। जबकि सैनिको की हत्या वाला मामला 25 जनवरी 1990 का है।
बंगाल सीएम ममता बनर्जी ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख देने की घोषणा की। उन्होंने गंभीर रूप से घायलों को 1-1 लाख और अन्य घायल लोगों को 50-50 हजार रुपए देने की बात कही।
भारत में हलाल के दिशानिर्देश उपलब्ध हैं जिनमें यह स्पष्ट है कि पशु वध प्रक्रिया (हलाल) के किसी भी हिस्से में गैर-मुस्लिम को रोज़गार नहीं दिया जा सकता है।
"अस्पताल प्रभारी मोहम्मद जावेद आलम बिल पास करवाने के बदले में एक रात साथ में सोने के लिए कहता है। गाली-गलौच के साथ बात करता है। वो बोलता है कि तुम बहुत बोलती हो, मारेंगे लात तो बाहर छिटका देंगे, निकाल देंगे।"
MCI ने मेडिकल कॉलेज से साफ़ कह दिया है कि अगर उन्हें 24 घंटे के अंदर जवाब नहीं मिला तो वह प्रति छात्र एक लाख रुपए का जुर्माना संस्थान पर लगाएँगे। यानी 150 छात्रों के साथ हुए रैगिंग के लिए 1.5 करोड़ रुपए का जुर्माना संस्थान को भरना होगा।
श्रीलंका से इन आतंकियों ने समुद्र के रास्ते से भारत में प्रवेश किया है। ये सभी आतंकवादी मुस्लिम हैं लेकिन हिंदुओं की वेशभूषा में ये भारत में घुसे हैं। इन्होंने लोगों को बेवकूफ़ बनाने के लिए तिलक और भभूत भी लगाया हुआ है।
पुलिस द्वारा FIR में कसाइयों का ज़िक्र न किए जाने से लोगों में आक्रोश पनप गया। हिन्दू युवा वाहिनी समेत कई संगठनों ने इस घटना के ख़ुलासे के लिए पुलिस प्रशासन को 48 घंटे की मोहलत दी है। साथ ही मृतक के परिजनों के लिए मुआवज़े के तौर पर 25 लाख रुपए की माँग भी की।
मेरठ में शांति मार्च की आड़ में जो बवाल हुआ था, हाजी सईद उसका भी सह-अभियुक्त है। हाजी सईद और बदर अली ने मिलकर शांति मार्च के बहाने बवाल कराया था। कुल मिलाकर हाजी सईद पर सदर बाजार थाने में 5, कोतवाली में 1, रेलवे रोड में 2 और देहली गेट थाने में 1 मुकदमा दर्ज।
"ये लोग रोजाना एक ऐप के जरिए रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक युवतियों से न्यूड विडियो कॉल करवाते थे। 15-20 लड़कियों से न्यूड वीडियो कॉल करवाई जाती है। मैं खुद वहाँ 15-20 दिन थी।"
नेता जी की बेटी अनिता बोस ने पीएम मोदी से हस्तक्षेप करने की माँग करते हुए दावा किया कि पिछली सरकारों में कुछ 'खास लोग' नहीं चाहते थे कि इस रहस्य से कभी पर्दा उठे। माना जाता है कि जापान के रेनकोजी मंदिर में रखी अस्थियाँ नेताजी सुभाष चंद्र बोस की हैं।