"होली-दिवाली पर अगर लोगों का घर तोड़ दिया जाता है तो वो कहाँ जाएँगे? नेताओं के पास। अगर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की इज़्ज़त नगर निगम के अधिकारियों के सामने धूल बराबर है तो जनप्रतिनिधि फ़्रस्ट्रेशन में क्या करेगा? इसीलिए, आकाश विजयवर्गीय की कार्रवाई से मेरे जैसा आम आदमी ख़ुश है।"
यहाँ एक निश्चित पैटर्न उभर रहा है। ये उनमें से केवल दर्जन भर घटनाएँ हैं। 'हेट-ट्रैकर’ के माध्यम से नकली 'हेट क्राइम' के निर्माण के लिए मीडिया गिरोह और लिबरल पूरी तरह समर्पित हैं। ये डेटा और फैक्ट को तोड़-मरोड़कर, मुसलमानों को बारहमासी पीड़ित और हिंदुओं को निर्दयी हमलावर बताने की फिराक में रहते हैं।
"मेरी माँ की मृत्यु इस साल फ़रवरी में हो गई थी। उसके तुरंत बाद मेरे अब्बा मोहम्मद शकील अंसारी ने 16 साल की शहनाज़ के साथ शादी कर ली। इसके बाद पिछले हफ्ते उन्होंने एक और लड़की से शादी कर ली। अपनी दोनों बीवियों के साथ रहने के लिए वो मुझे और मेरे पति को घर से बाहर निकालना चाहते हैं।"
जैसे ही वे सूचना भवन के आगे बढ़े, मोटरसाइकिल पर सवार दो व्यक्तियों ने उनपर गोली दागनी शुरू कर दी। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से आगे जाते ही मोटरसाइकिल सवार ने कार का पीछा करना बंद दिया।
ओवैसी की पार्टी के नेता कुल 30 गाड़ियों से आए थे, ताकि गाँव में दहशत फैलाई जा सके। वे लोग जिस वाहन से गाँव में पहुँचे थे, उस पर भी ओवैसी की पार्टी का बोर्ड लगा हुआ था। हमले के दौरान उन्होंने मंदिर के ध्वज को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।
"इस मामले में युवक की कोई ग़लती नहीं थी लेकिन फिर भी युवती उसकी सरेराह पिटाई करती रही। कई लोग मौक़े पर तमाशबीन बने रहे। युवक सही साइड पर गाड़ी चला रहा युवती ग़लत साइड से उसके सामने आ गई और दोनों ही गाड़ियों में भिड़ंत हो गई।"
ऐसी घटनाएँ, जिनमें कट्टरपंथियों के अपराधी होने की ख़बर आई और पीड़ित दलित या हिन्दू थे। लेकिन, किसी ने आवाज़ नहीं उठाई। कोई नया नैरेटिव नहीं गढ़ा गया। पढ़िए ऐसी 50 घटनाओं का विवरण, जिसे मेनस्ट्रीम मीडिया द्वारा प्रमुखता से नहीं उठाया गया।
पाँच साल पहले दोनों का निकाह हुआ था। दोनों के बीच पढ़ाई के दौरान ही प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो गए थे। शादी के 1 साल बाद से ही इमरान ने दहेज़ को लेकर नेहा को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। वह उसे मायके से 5 लाख रुपए माँगने को कहता था