असहिष्णुता? ‘हेट क्राइम’ की दर्जन भर घटनाएँ, जो फर्ज़ी साबित हुईं – लक्ष्य था हिंदुओं को बुरा दिखाना

इसमें राजनीतिक मंशा भी शामिल है। लेकिन यह तथ्य है कि फर्ज़ी हेट क्राइम की घटनाएँ हिंदुओं के खिलाफ की गई हेट क्राइम की श्रृंखला से अधिक ध्यान आकर्षित करते हैं, यह पैटर्न वास्तव में गहरी चिंता का विषय है।

हाल-फिलहाल में ऐसी कई फर्ज़ी ‘हेट क्राइम’ की घटनाएँ रिपोर्ट हुईं और उन्हें ठीक-ठाक मीडिया कवरेज भी दिया गया। क्यों? इस पर चर्चा बाद में, फिलहाल, इतनी मीडिया हाइप के बाद भी उसमें से अधिकांश ‘हेट क्राइम’ की घटनाएँ फर्ज़ी साबित हुई। हालाँकि, ऐसे ताबड़तोड़ मीडिया कवरेज ने ‘डरा हुआ मुसलमान’ वाले नैरेटिव को बिल्डअप करने में बड़ी भूमिका निभाई जबकि हिन्दुओं के साथ घटित वास्तविक ‘हेट क्राइम’ की घटनाओं का इस पूरे मीडिया गिरोह द्वारा जमकर अनदेखी की गई।

यहाँ ऐसे ही कुछ ‘हेट क्राइम की लिस्ट’ है जो बाद में पूरी तरह झूठी निकली

1. गुरुग्राम हेट क्राइम (मई 2019)

“मुस्लिम युवक बरक़त अली की गुरुग्राम के सदर बाजार में कुछ हिन्दुओं ने की पिटाई” की खबर सोशल मीडिया के साथ मुख्यधारा की मीडिया में भी तेजी से वायरल हुई। जैसे ही बीजेपी के नवनिर्वाचित सांसद गौतम गंभीर ने इस घटना को ‘हेट क्राइम’ की संज्ञा और ‘सेक्युलरिज़्म’ का पाठ पढ़ाते हुए ट्वीट किया, इस मामले ने और भी जोर पकड़ लिया।

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कई मुख्यधारा के मीडिया चैनलों और पूरे मीडिया गिरोह ने इस घटना को मुस्लिम विरोधी ‘हेट क्राइम’ के रूप में रिपोर्ट किया था। सोशल मीडिया पर, इस घटना को कई प्रभावशाली लोगों द्वारा मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती ‘असहिष्णुता’ और हिंसा के मामले के रूप में परोसा गया था।

इस मामले में, कथित पीड़ित, बरकत अली ने दावा किया कि उसकी पिटाई करने वाले लोगों के एक समूह ने उसकी ‘टोपी’ निकाल दी थी और दावा किया था कि उसे ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए कहा गया था। हालाँकि, पुलिस ने इस मामले के तथ्यों की छानबीन के बाद कहा कि यह ‘हेट क्राइम’ नहीं था। गुरुग्राम पुलिस ने यह भी कहा था कि यह घटना, शराब पीकर एक मामूली विवाद का था।

हालाँकि, पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। पीड़ित द्वारा दिए गए बयान में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने के लिए उसे मजबूर नहीं किया गया था और ना ही उसे सूअर का मांस खिलाने की धमकी दी गई थी। पुलिस ने यह भी कहा था कि सीसीटीवी फुटेज से यह देखा जा सकता है कि पूरी घटना महज एक मिनट के भीतर खत्म हो गई थी। पुलिस ने कहा था कि कुछ ‘असामाजिक तत्व’ घटना को सांप्रदायिक रंग में रंगने की कोशिश कर रहे हैं।

पुलिस ने यह भी कहा कि पूरी घटना को सांप्रदायिक स्पिन देने के लिए बरकत अली को शायद समझाया गया होगा। सीसीटीवी फुटेज से यह भी पता चला कि किसी ने भी जानबूझकर उसकी टोपी नहीं निकाली थी और यह गलती से गिर गया था। एक मिनट के भीतर ही पूरी बात खत्म हो गई थी।

2. गुरुग्राम सड़क पर झड़प की घटना (मई 2019)

रोड रेज की एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना में, गुरुग्राम में एक डॉ. नारुल को भीड़ द्वारा पीटा गया जब वह इफ्तार के लिए दूध खरीदने गए थे। हालाँकि, टाइम्स समूह की वेबसाइट IndiaTimes.com ने अपनी रिपोर्ट में थोड़ा सा ट्विस्ट देकर इसे सांप्रदायिक एंगल देने के लिए रोड रेज को ‘हेट क्राइम’ घोषित करने का फैसला कर लिया।

डॉ. नारुल अपनी बलेनो कार से दूध खरीदने के लिए रात करीब 8 बजे अर्डी सिटी गए थे जहाँ दो लोग अपनी फॉर्च्यूनर कार से उतरकर उनके साथ दुर्व्यवहार करने लगते हैं। डॉ. नारुल का कहना था कि जब उन्होंने उन्हें बताया कि वे सड़क के गलत साइड से आ रहे हैं, तो दोनों ने कुछ अन्य लोगों को फोन किया, जिन्होंने उनके साथ मारपीट की, यह घटना, स्पष्ट रूप से रोड रेज का मामला प्रतीत हो रहा है।

उन्होंने उल्लेख किया कि जब उन्हें पीटा जा रहा था, तो उन्होंने किसी को यह कहते सुना कि वह (डॉ. नारुल) एक मुसलमान हैं और इसलिए उन्हें (कथित तौर पर पिटाई करने वाले पुरुष) को छोड़ देना चाहिए क्योंकि इस घटना से सांप्रदायिक दंगे हो सकते हैं।

टाइम्स की एक अन्य वेबसाइट इंडियाटाइम्स ने इस कहानी को एक सांप्रदायिक एंगल देकर पुन: पेश किया। हेडलाइन में लिखा, “मुसलमानों को छोड़ देना चाहिए” चिल्लाते हुए भीड़ ने डॉ. नारुल की पिटाई की”, जबकि वास्तव में, वे उस समय भाग गए जब उन्हें एहसास हुआ कि वे जिस व्यक्ति की पिटाई कर रहे थे, वह मुस्लिम था। हालाँकि, इस पर ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद, इंडियाटाइम्स ने बाद में अपना शीर्षक बदल दिया।

3. दिल्ली मदरसा टीचर की घटना (जून 2019)

21 जून को एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा दावा किया गया था कि ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने से इनकार करने के बाद उसे एक कार द्वारा कथित रूप से धक्का दे दिया गया था, इसके बाद एक और विवाद छिड़ गया था। मोहम्मद मोमिन नामक एक मदरसा शिक्षक ने आरोप लगाया था कि दिल्ली के रोहिणी सेक्टर में हिंदू धार्मिक नारे लगाने से इनकार करने के कारण उसके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया और फिर वे कार से भाग गए।

हालाँकि, चश्मदीदों ने मोमिन के आरोपों को गलत बताया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “घटना के कुछ चश्मदीदों द्वारा दिए गए बयान पीड़ित द्वारा किए गए दावों की पुष्टि नहीं करते हैं लेकिन जाँच जारी है”। अपराध स्थल के आस-पास के सीसीटीवी फुटेज भी आरोपों को साबित नहीं कर पाए हैं।

इस घटना के बाद भी, ‘लिबरल-सेक्युलर’ मीडिया गिरोह ने मदरसा शिक्षक पर हमला करने के लिए हिंदुओं पर हमला करना शुरू कर दिया था। सेक्युलर मीडिया ने मोमिन में एक नया शिकार ढूँढ लिया था, जिसका इस्तेमाल वे आगे चलकर ‘मुस्लिम पीड़ितों’ के बारे में एक झूठी कहानी गढ़ने के लिए करने वाले थे।

4. आपराधिक घटना को दिया सांप्रदायिक मोड़, (जून 2017)

यह घटना राजस्थान के नागौर जिले की है, जहाँ लोगो के एक समूह ने अपने चेहरे छुपाते हुए कुछ लोगों को कैमरे पर गाली-गलौज करते हुए और एक महिला को प्लास्टिक के पाइप से पीटते हुए, उसे जबरन धार्मिक नारे लगाने के लिए दबाव डालते हुए रिकॉर्ड किया। यह स्पष्ट नहीं था कि इस घटना को किसने रिकॉर्ड किया था, लेकिन वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था कि लोग महिला को ‘अल्लाह’ और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर कर रहे थे।

इस घटना में भी, मीडिया गिरोह के लोगों ने ‘अल्लाह’ वाले हिस्से को आसानी से अनदेखा कर दिया और पूरी घटना को सांप्रदायिक स्पिन देने के लिए केवल ‘जय श्री राम’ भाग पर ध्यान केंद्रित किया। जबकि, यह घटना पूरी तरह से आपराधिक थी और सांप्रदायिक स्पिन के बिना भी अपने आप में काफी भयावह थी।

5. जुनैद की घटना (जून 2017)

22 जून को 17 वर्षीय जुनैद दिल्ली में ईद की खरीदारी के बाद अपने भाइयों के साथ घर लौट रहा था। कथित रूप से उसे बल्लभगढ़ और मथुरा स्टेशनों के बीच दिल्ली-मथुरा पैसेंजर ट्रेन में आपसी झड़प में चाकू मार दिया गया था।

यह लड़ाई सीट पर बैठने को लेकर शुरू हुई थी और बाद में इस घटना में धार्मिक एंगल को भी इस लड़ाई का हिस्सा बना दिया गया था, लेकिन अधिकांश मीडिया रिपोर्टों ने इस मामले को ‘बीफ’ से संबंधित लिंचिंग के रूप में उजागर किया। इस मामले में पुलिस जाँच में पता चला था कि न तो शिकायतकर्ता और न ही आरोपित ने गोमांस के बारे में बात की थी।

जबकि, कई मीडिया हाउस ने दावा किया था कि जुनैद को इस संदेह के कारण मारा गया था कि वह ‘गोमांस’ ले जा रहा था। फिर क्या था देश का तथाकथित लिबरल और अभिजात्य वर्ग ने सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक बवाल काट दिया था।

उच्च न्यायालय ने 28 मार्च 2018 को अपने आदेश में पुष्टि की कि लड़ाई सीट विवाद को लेकर शुरू हुई थी और अपराध का कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं था। फैसले से यह स्पष्ट हो गया कि लड़ाई सीटों और “जाति” के झगड़े पर शुरू हुई थी। उच्च न्यायालय के अनुसार, हिंसा के कारण के रूप में गोमांस या मजहबी दृष्टिकोण का कोई उल्लेख नहीं है।

6. तिहाड़ जेल की झूठी हेट क्राइम (अप्रैल 2019)

अप्रैल में तिहाड़ जेल में एक मुस्लिम कैदी, नब्बीर ने दावा किया था कि जेल अधीक्षक द्वारा उसकी पीठ पर ’ओम’ चिन्ह लगा दिया गया था। उसने यह भी दावा किया था कि अधिकारियों ने उसे नवरात्रि के दौरान उपवास करने के लिए मजबूर किया था और इसके लिए उसे पीटा गया था। उसने ये आरोप मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ऋचा परिहार के सामने लगाए थे जिन्होंने पूरे मामले की जाँच के आदेश दिए थे।

जबकि, जाँच में यह बात स्पष्ट हो गई कि वास्तव में, नब्बीर अपने किसी सहयोगी द्वारा सिखाया-पढ़ाया गया था। नब्बीर ने जेल अधीक्षक को फँसाने और जेल अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए ये झूठे दावे किए थे।

07. मेरठ लॉ कॉलेज की छात्रा का झूठा दावा, मुस्लिम होने के कारण किया गया परेशान (अप्रैल 2019)

ट्विटर पर एक लॉ स्टूडेंट, उमाम खानम ने अपने साथी छात्रों और अपने फैकल्टी के सदस्यों के ख़िलाफ़ परेशान किए जाने संबंधी गंभीर आरोप लगाए थे। अपने ट्वीट्स में खानम ने दावा किया था कि परेशान करने वाले छात्र शराब के नशे में थे और छात्रों ने उसे बीजेपी की टोपी पहनने के लिए मजबूर किया। खानम ने कहा कि उसे इसलिए परेशान किया गया क्योंकि उसने वो टोपी पहनने से इनकार कर दिया था। साथ ही, खानम ने वहाँ मौजूद पुरुष अध्यापकों पर भी इस तथ्य को नज़रअंदाज़ करने के झूठे आरोप लगाए थे।

इस मामले की जाँच करने पर चिंतित नेटिजन्स ने पाया कि उनके ट्वीट थ्रेड में जिन पुरुष अध्यापकों का उल्लेख किया गया है, वह मेरठ के दीवान लॉ कॉलेज के विभागाध्यक्ष थे। इसके बाद जब H.O.D अम्बुज शर्मा से संपर्क किया तो पता चला कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था। H.O.D शर्मा ने पुष्टि की कि खानम वास्तव में कॉलेज की छात्रा हैं और वह ख़ुद इस ट्रिप पर जाने वाले शिक्षकों में से एक था। उन्होंने यह भी दावा किया कि खानम के आरोप बेबुनियाद हैं। उसका सच से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था।

08. दिल्ली मालवीय नगर की घटना (अक्टूबर 2018)

मीडिया ने बताया कि मोहम्मद अजीम नाम के 8 साल के मदरसा छात्र को कथित तौर पर कुछ युवाओं ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। यह मामला दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के बेगमपुर का था। JNU छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष शेहला रशीद ने नदीम खान के फेसबुक विडियो का लिंक ट्वीट करते हुए लिखा, ‘भारत में मुस्लिमों के साथ हेट क्राइम बढ़ रहे हैं। एक हैरान कर देने वाली घटना के तहत साढ़े सात साल के बच्चे अजीम को दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर में लिंच किया गया।’ शेहला ने अपने ट्वीट में पीएम नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा।

लेकिन खुद अजीम के पिता ने बताया था कि यह मामला दो गुटों के बच्चों के बीच झगड़े का है, जिसमें उनके बेटे को मैदान में खड़ी बाइक पर फेंका गया और अंदरूनी चोट से उसकी जान चली गई। उन्होंने कहा- “यह सांप्रदायिक झड़प नहीं थी। मेरे बेटे की मौत दुर्घटनावश हुई। कृपया इस मामले का राजनीतिकरण न करें।” देश भर में ‘डरा हुआ मुसलमान’ नाम का प्रपंच रचने वाले स्वघोषित एक्टिविस्ट्स ने जब इसे ‘लिंचिंग’ और ‘हेट क्राइम’ साबित करने का प्रयास किया तो ऑपइंडिया ने मालवीय नगर पुलिस स्टेशन से जानकारी में पाया कि यह हेट क्राइम का मामला था ही नहीं।

09. मणिपुर में गाय चोरी के आरोप में मदरसा के हेडमास्टर की हत्या (नवंबर 2015)

मणिपुर के पूर्वी इंफाल जिले के केइराओ गांव में 55 साल के मोहम्मद हसमद अली का शव उनके घर से 5 किलोमीटर की दूरी पर बरामद किया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, गाय का बछड़ा चुराने के आरोप में स्कूल के हेडमास्टर हसमद अली की हत्या की गई। जबकि हसमद अली के बड़े बेटे का कहना था कि यह जमीन विवाद के कारण की गई हत्या थी और यह आरोप दूसरे धर्म पर थोप दिया ताकि वो खुद बच सके।

हेडमास्टर के बेटे ने आरोप लगाते हुए यह भी स्पष्ट बताया था कि उसके पड़ोसी मुहम्मद अमु और उसके भाई के साथ जमीन विवाद के चलते यह हत्या की गई थी। इसके बाद गाँव वालों ने मुहम्मद अमु के घर को भी आग के हवाले कर दिया था।

10: जय श्री राम: फर्जी हेट क्राइम, तेलंगाना (जून 2019)

भूतपूर्व AIMIM के नेता, जो कि अब मजलिस बचाव तहरीक के नेता हैं, ने ट्विटर पर एक ट्वीट शेयर करते हुए कहा था कि तेलंगाना के करीमनगर में एक मुस्लिम युवक ‘जय श्री राम’ ना बोलने के कारण पीटा गया। यह ट्वीट अन्य सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी शेयर किया था।

हालाँकि, करीमनगर पुलिस कमिश्नर ने एक वीडियो शेयर करते हुए स्पष्ट किया था कि यह मुस्लिम युवक आपसी विवाद के कारण पीटा गया था ना कि ‘जय श्री राम’ ना बोलने की वजह से। उन्होंने यह भी बताया कि एक टीनएजर युवती से छेड़खानी करने के कारण उस पर पहले से ही FIR भी दर्ज है। इस मुस्लिम युवक के पिता ने भी स्वयं बाद में मीडिया को बताया कि उनके बेटे को उसकी गलती की वजह से पीटा गया, ना कि किसी साम्प्रदायिक वजह से।

11. रानाघाट, कोलकाता नन बलात्कार (मार्च 2015)

मार्च 14, 2015 को बांग्लादेशी अपराधियों के एक गिरोह ने कोलकाता के नदिया जिले में रानाघाट स्थित जीसस एंड मेरी कॉन्वेंट पर हमला कर वहाँ लूटपाट की थी और इसका विरोध करने पर 71 साल की एक नन के साथ सामूहिक बलात्कार किया था। इस घटना में बांग्लादेश के एक गिरोह का हाथ था जो अवैध तरीके से भारत में रह रहा था। इस केस में मोहम्मद सलीम शेख़ को उसके अन्य 5 साथियों समेत गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन इस पूरे प्रकरण में मेनस्ट्रीम मीडिया ने बलात्कार को किनारे रखकर इसके लिए आरएसएस और हिंदुत्व के विचारकों को जिम्मदार बताया था।

12. बरुन कश्यप काण्ड (2016)

मुंबई के रहने वाले फिल्म एग्जीक्यूटिव बरूण कश्यप के साथ अगस्त 2016 के दौरान मुंबई में गोरक्षकों द्वारा दुर्व्यवहार का बेहद हास्यास्पद मामला सामने आया था। बरुन एक प्रोडक्शन हाउस में क्रिएटिव डायरेक्टर हैं। बरूण ने आरोप लगाया था कि एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर ने उसके चमड़े के बैग को देखकर यह कहते हुए उसके साथ अभद्रता की थी कि उसका बैग गाय के चमड़े से बना है।

बरूण ने इस ‘चमड़ा बैग प्रकरण’ की जानकारी तब फेसबुक के जरिए दी थी। वरूण ने मुंबई के डीएन नगर में इस मामले में 19 अगस्त को एक एफआईआर भी दर्ज कराई थी। लेकिन तुरंत इस प्रकरण की सच्चाई सामने निकलकर आई। दरअसल, वरूण कश्यप ने पुलिस के सामने कबूल किया कि वह हिंदुओं से नफरत करता है, इसीलिए उसने सांप्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश की थी। पुलिस ने बताया कि बरुन जानबूझकर पीड़ित बना था और गौरक्षकों की हिंसा का शिकार होने का नाटक कर वह न सिर्फ मुंबई में बल्कि पूरे देश में सांप्रदायिक सदभाव बिगाड़ने की कोशिश कर रहा था।

इस बीच सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स ने बरुन की इस झूठी स्टोरी से जमकर उपद्रव मचाया। बरुन कश्यप को 4 अक्टूबर 2016 को गिरफ्तार कर लिया गया था, जिस पर IPC की धारा 153A (समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) और 182B ( झूठी एफआईआर दर्ज कराने) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

पहली बार मौका है, दूसरा संयोग है, तीसरा एक पैटर्न है और जब एक दर्जन बार हो तो क्या मतलब है?

जैसा कि स्पष्ट है, यहाँ एक निश्चित पैटर्न उभर रहा है। ये उनमें से केवल दर्जन भर घटनाएँ हैं। ‘हेट-ट्रैकर’ के माध्यम से नकली ‘हेट क्राइम’ के निर्माण के लिए ये फेक घटानएँ पूरी तरह समर्पित हैं, जो डाटा और फैक्ट को तोड़ मरोड़कर, ट्वीस्ट देकर लोगों को ठगती है और मुसलमानों को बारहमासी पीड़ित और हिंदुओं को निर्दयी हमलावरों के रूप में चित्रित करने के लिए ऐसी घटनाओं में तमाम तरह की हेरफेर की जाती है।

वास्तविकता, हालाँकि, काफी अलग है। हमने 2016 से मुस्लिमों द्वारा किए गए हिंदुओं के खिलाफ 50 हेट क्राइम की एक सूची प्रकाशित की, जिसमें से एक या दो को छोड़कर, ऊपर वर्णित फर्ज़ी ‘हेट क्राइम’ का बहुत थोड़ा हिस्सा भी पत्रकारिता के इस गिरोह ने रिपोर्ट नहीं किया, क्योंकि यह इनके नैरेटिव को शूट नहीं करता।

इसलिए, किसी को आश्चर्य होता है कि यहाँ एंडगेम क्या है? पहला, निश्चित रूप से, सांप्रदायिक हिंसा विधेयक के कार्यान्वयन को देखने की इच्छा हो सकती है, जो स्वाभाविक रूप से हिंदुओं को अपराधी और मुसलमानों को हर बार पीड़ित ही मानता है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में ‘हेट क्राइम’ के लिए एक नया कानून बनाने का भी वादा किया था।

दूसरी संभावना कहीं अधिक भयावह है। मुख्यधारा के मीडिया का उद्देश्य वस्तुनिष्ठ सत्य को रिपोर्ट करना नहीं है, इसका प्राथमिक उद्देश्य उन घटनाओं से ध्यान हटाना है, जो यह फर्ज़ी नैरेटिव सेट करने वाली शक्तियाँ नहीं चाहतीं कि जनता इन पर ध्यान केंद्रित करे। इसलिए, ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यधारा का मीडिया इन फर्ज़ी हेट क्राइम की कहानियों को हिंदुओं के खिलाफ होने वाले वास्तविक घृणित अपराधों से ध्यान हटाने के स्पष्ट उद्देश्य के साथ और किसी भी आलोचना से अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ वर्गों की विषाक्त मान्यताओं को ढालने के उद्देश्य से कर रहा है।

इन संभावनाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। नकली ‘हेट क्राइम’ की कहानियों में हालिया स्पाइक यौन अपराधों और मुस्लिम पुरुषों द्वारा हिंदुओं के खिलाफ किए गए हेट क्राइम के साथ मेल खाता है। इस प्रकार, यह प्रतीत होता है कि इन वास्तविक घटनाओं की खबरों को दबाने के लिए नकली हेट क्राइम की फर्ज़ी कहानियों का आविष्कार किया जाता है।

इसमें राजनीतिक मंशा भी शामिल है। लेकिन यह तथ्य है कि फर्ज़ी हेट क्राइम की घटनाएँ हिंदुओं के खिलाफ की गई हेट क्राइम की श्रृंखला से अधिक ध्यान आकर्षित करते हैं, यह पैटर्न वास्तव में गहरी चिंता का विषय है।

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