मीडिया हलचल

रवीश कुमार की दिक्कत बोर्ड पर ‘जय श्रीराम’ लिखना नहीं, लिखने वाले का हिंदू होना है: ‘भौं-भौं कुमार’ के लिए मुजफ्फरनगर में शिक्षिका तो...

रवीश कुमार बेचैन हैं कि मुज़फ्फरनगर के वीडियो को लेकर दंगे क्यों नहीं हुए, इतनी शांति क्यों है। वहीं उन्हें इससे भी दिक्क्त है कि एक हिन्दू बच्चा 'जय श्री राम' क्यों लिखता है।

‘ब्राह्मण संपादक’ रूपा झा ने तो माफ कर दिया, पर क्या बिहार के ‘एक्टिविस्ट पत्रकार’ वेद प्रकाश के दिमाग से ‘जाति’ जा पाएगी

ऐसे वक्त में जब बिहार के ही एक यूट्यूबर पत्रकार मनीष कश्यप पर NSA लगाया गया है, उसी राज्य में पत्रकारिता के नाम पर अगड़ा-पिछड़ा एजेंडा चलाने वाले यूट्यूबर पत्रकार वेद प्रकाश को माफ कर देना रूपा झा की सहृदयता है।

BBC के लिए रॉबिनहुड, CNN को दिखा राजनेता, NYT को योगी के कपड़ों से दिक्कत: माफिया अतीक अहमद के महिमामंडन में विदेशी मीडिया दिखा...

44 वर्षों से प्रयागराज में कहर बरपा रहे अतीक अहमद को लेकर BBC, CNN और NYT ने कितनी खबरें लिखीं? कितने ओपिनियन लिखे? अब क्यों बिलबिला रहे?

जिन ‘बेधड़क आवाजों’ ने बिहार की ढुलमुल व्यवस्था को कर रखा था नंगा, बिहारशरीफ-सासाराम की जमीन से वे गायब क्यों

जो लोग ग्राउंड जीरो पर जाकर सब कुछ सामने ला देते थे, वे बिहारशरीफ और सासाराम की जमीन पर रिपोर्टिंग करते क्यों नहीं दिख रहे?

मेनस्ट्रीम मीडिया की ‘मूत्रकारिता’ के बाद The Wire की ‘खच्चरकारिता’: आरफा ने माफिया की महिमा गाते हुए खेला OBC कार्ड

'The Wire' की 'खच्चरकारिता' का आलम ये है कि उसे अतीक अहमद की चिंता उसके परिजनों से ज्यादा है। वो अतीक अहमद की पैरवी उसके वकीलों से भी ज्यादा मजबूती से कर रहा है। आरफा खानुम शेरवानी पत्रकारिता के इस नए रूप की झंडाबरदार बन कर उभरी हैं।

माना कि तू खुद से खुदा हुए जा रहा है, पर इश्क में शहर होना नहीं है लोकसभा में उनके सामने खड़े होना

मैं लोकसभा में हूँ उनके सामने...... रवीश कुमार की उन आकांक्षाओं का प्रस्फुटन हुआ है, जो ब्रजेश पांडेय में पूरा नहीं हो पाया।

अब यूट्यूब पर देखने की भी आदत बदलिए, क्योंकि वैचारिक स्खलन की नई मीनार गढ़ते कहीं भी दिख सकते हैं रवीश कुमार

रवीश कुमार विलायती वेब सीरिज के उस सुरक्षाकर्मी की हालत में जा चुके हैं, जिसे इंतजार है कि वो आए और वे निस्तेज गति को प्राप्त हो जाएँ।

NDTV और रवीश कुमारः अब वो फिरते हैं तन्हा लिए दिल को, एक जमाने में मिजाज उनका सर-ए-अर्श-ए-बरीं था

एनडीटीवी मीडिया की अन्य दुकानों की तरह ही है। न पवित्र गाय, न सूअर। वे बस हुनरमंद रहे हैं विष्ठा को भस्म बता बेचने और खुद को बुद्धिजीवी बताने के।

NBT की प्रेम वाली पत्रकारिता: बेटी प्रतिभा को बचाने वाली माँ हुई ‘नफरती’, भगोड़े शादीशुदा नदीम सैफी पर पूरा प्यार लुटाया

NBT का आर्टिकल को पढ़ने से प्रतीत होता है कि यह नदीम के दृष्टिकोण से लिखा गया है। एक विशेष एजेंडे के साथ परोसा गया है। यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मजहब विशेष के लोग प्रेम के मसीहा हैं, पर ये हिंदू हैं कि वे प्यार के दुश्मन बने बैठे हैं।

रवीश कुमार पर बन गई डॉक्यूमेंट्री, बज रहीं तालियाँ… लेकिन इसमें पैसा लगा है भारत विरोधी जॉर्ज सोरोस और फोर्ड फाउंडेशन का

फोर्ड फाउंडेशन और जॉर्ज सोरोस ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के साथ संबंधों को लेकर रवीश कुमार की डॉक्यूमेंट्री While We Watched सवालों के घेरे में।

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