विचार

2024 के लोकसभा चुनाव की बात करना जल्दबाजी है फिर भी हमें बात करनी होगी: जानिए क्यों?

पूरा कॉन्ग्रेस-लेफ्ट इकोसिस्टम 2024 तक इस बदलाव की झूठी उम्मीदों को जिन्दा रखने की पूरी कोशिश करेगा। फासीवाद का रोना रोकर भी जो अवसर न मिल पाया, इस इकोसिस्टम को वह अवसर कोरोना वायरस में दिखाई दिया है।

इजरायल के विपक्ष से कुछ तो सीखें हमारे नेता… हमारी लोकतान्त्रिक शक्तियाँ राष्ट्रहित को कब आगे रखेंगी?

जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राष्ट्रहित की बात आती है तो हमारे कुछ दलों और उनके नेता हर बार गलत जगह खड़े दिखाई देते हैं। इजरायल में ऐसा नहीं।

क्यों ‘प्रतिभाओं की फौज’ खड़ी करने वाले राहुल द्रविड़ का एक सीरीज नहीं टीम इंडिया का फुल टाइम कोच बनना जरूरी?

राहुल द्रविड़ को बनाया गया एक सीरीज का कोच, लेकिन क्यों इस महान खिलाड़ी का टीम इंडिया का फुल टाइम कोच बनना जरूरी है?

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को लज्जित करने के उद्देश्य के पीछे केजरीवाल की मंशा क्या है?

केजरीवाल को यह विचार करने की आवश्यकता है कि उनके ऐसा बार-बार करने से क्या केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार या भारत की छवि...

नेहरू से राहुल तक, अयोध्या से कुंभ तक… इस्लामी कट्टरपंथियों की तरह कॉन्ग्रेस के निशाने पर हिंदू

जब भी बात हिंदुओं, उनके आस्था और परंपराओं की होती है, कॉन्ग्रेस और कट्टरपंथी एक ही नाव के सवार दिखते हैं।

कोरोना से जंग का कर्मयोगी: जमीन पर उतर मोर्चा लेने की CM योगी की ताकत, दूसरी लहर पर UP ने ऐसे पाया काबू

देश देख रहा है कि उपलब्ध सीमित संसाधनों में भी कौन सा मुख्यमंत्री अपने राज्य के लोगों के लिए मेहनत कर रहा और कौन केवल शिकायतें।

प्रोपेगेंडा का यह पाप भारी: टूलकिट से पल्ला झाड़ना कॉन्ग्रेस के लिए मुमकिन नहीं, इकोसिस्टम से बाहर नहीं चलेगा ‘फेक’ वाला जुमला

इस टूलकिट को बनाने वाले और उसके क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी लेने वाले देसी हैं, कॉन्ग्रेस के लिए इससे खुद को अलग कर पाना लगभग असंभव होगा।

यूनिफॉर्म सिविल कोड और जनसंख्या नियंत्रण कानून वक्त की जरूरत, क्योंकि उनका कोई विशेषाधिकार नहीं

भारत बहुत वर्षों से इस नासूर से ग्रस्त है। जहाँ वह कम संख्या में हैं, विक्टिम हैं। बहुसंख्या में आते ही वे शरिया-शरिया चिल्लाते हैं।

बंगाल की उबड़-खाबड़ डगर: नारदा में TMC पर कसा फंदा तो CBI से ममता ने दिखाई पुरानी रार

बंगाल की राजनीति कौन सी करवट लेगी, यह समय तय करेगा। फिलहाल ममता बनर्जी और उनकी सरकार के लिए रास्ते सीधे नहीं दिखते।

केजरीवाल के ‘रोवन’ में राहुल गॉंधी की आहुति: चीनी वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई को चूना लगाती राजनीति

AAP सरकार विज्ञापन के अलावा जिस बात पर सबसे अधिक भरोसा करती है, वह है 'रोवन'। लम्बे समय तक प्रैक्टिस कर इसे अपना दर्शन बना लिया है।

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