विचार

लेफ्ट मीडिया नैरेटिव के आधार पर लैंसेट ने PM मोदी को बदनाम करने के लिए प्रकाशित किया ‘प्रोपेगेंडा’ लेख, खुली पोल

मेडिकल क्षेत्र के जर्नल लैंसेट ने शनिवार को एक लेख प्रकाशित किया जहाँ भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते संक्रमण का पूरा ठीकरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फोड़ दिया गया।

हिंसा वही जो पिया मन भाए?

"जो है उसमें से अपने मतलब का सीन ही देखना है" से चलकर "कुछ नहीं दिख रहा है" - यही है वाम-तंत्री रिपोर्टिंग का क्रमिक विकास।

यूपी पर स्विच ऑन, बंगाल हिंसा पर स्विच ऑफ: मेनस्ट्रीम मीडिया का ये संतुलन क्या कहलाता है

मीडिया भय, लालच, स्वार्थ या मोह के कारण सच न दिखाए तो लोकतंत्र कैसे ज़िंदा रहेगा? क्या बंगाल को लेकर ऐसा ही नहीं हो रहा?

‘द वायर’ हो या ‘स्क्रॉल’, बंगाल में TMC की हिंसा पर ममता की निंदा की जगह इसे जायज ठहराने में व्यस्त है लिबरल मीडिया

'द वायर' ने बंगाल में हो रही हिंसा की न तो निंदा की है और न ही उसे गलत बताया है। इसका सारा जोर भाजपा द्वारा इसे सांप्रदायिक बताए जाने के आरोपों पर है।

‘लोगों की मदद के लिए मठ की ज़मीन भी बेच देंगे’: महामारी का वो दौर जब स्वामी विवेकानंद ने की थी लोगों की मदद

इस दौर में हमें मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक रूप से मजबूत करने के लिए कुछ ऐसा चाहिए जिसे हम इन परिस्थितयों से जोड़ कर भी देख सके और वह हमें हर रूप से मजबूत भी करे।

बांग्ला-बंगाली देश से ऊपर, बाकी सब बेकार: ममता की लगाई ‘उप-राष्ट्रवादी खेला’ से जलेंगे और राज्य भी

सफलता के इस शोर में एक महत्वपूर्ण कारण पर चर्चा शायद न हो और वह कारण है बांग्ला उप राष्ट्रवाद। अब इसे प्रशांत किशोर द्वारा बनाई गई रणनीति का हिस्सा माने या फिर पहले से चली आ रही एक सोच!

इन नतीजों के आगे जहाँ और भी हैं… आखिर भाजपा के पास बंगाल में खोने को था ही क्या?

यह टीवी मीडिया और छद्म बुद्धिजीवियों की बनाई दुनिया थी, जिसने भाजपा का सब कुछ बंगाल में दाँव पर बता दिया। भाजपा के पास खोने को था ही क्या?

जिस EVM को जी भर कोसा, आज उससे निकली जीत का जश्न मना रही TMC: बंगाल का वो चुनाव जिसमें CRPF को भी नहीं...

ममता बनर्जी ने कोरोना को बहाना बताया था। बार-बार EVM पर सवाल उठाए थे। आज TMC जीत का जश्न मना रही।

‘बैलेंस’ वाली पॉलिटिक्स से बंगाल में पिछड़ी बीजेपी? असम से सीख सकती है- क्या करें, क्या न करें

असम में अल्पसंख्यक वोट पश्चिम बंगाल से ज्यादा है। फिर भी भाजपा विजय की ओर अग्रसर है, लेकिन बंगाल में वह संघर्ष कर रही है। क्यों?

5 राज्यों के नतीजे अलग-अलग, पर एक सवाल वही- कॉन्ग्रेस का क्या होगा, राहुल गाँधी देंगे और कितने घाव

राज्य बदले। नतीजे बदले। एक चीज जो नहीं बदली, वह है राहुल गाँधी का 'प्रदर्शन'। इसने कॉन्ग्रेस का संकट और गहरा कर दिया है।

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