विचार

रवीश जी, आपका हर शो चुटकुला ही है, फिर कॉमेडी के लिए इतना परिश्रम काहे भाई!

भारत की पत्रकारिता में यह रवीश का सबसे बड़ा योगदान है। अच्छी योजनाओं और सरकारी कार्यों में भी, खोज-खोज कर कमियाँ बताई जाने लगी हैं। देखा-देखी बाकी वामपंथी एंकरों और पुराने चावल पत्रकारों ने भी, अपनी गिरती लोकप्रियता बनाए रखने के लिए, अपने दैनिक शौच से पहले और फेफड़ों से चढ़ते हर खखार (हिन्दी में बलगम) के बाद, मोदी और सरकार को गरियाना अपना परम कर्तव्य बना लिया है।

एक नारे से क्या होता है? ‘राम लला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे’ भी एक नारा ही था…

कई लोग अगस्त में ही दीपावली मानाने की तैयारी में भी दिखते हैं। वैसे इससे हमें दूसरा वाला नारा - काशी-मथुरा बाकी है, याद आ जाता है, मगर उससे दीयों के बजाए कुछ और ही जलने लगेगा! नहीं?

जब हुआ मंदिरों का ध्वंस, तब किस दोजख में था सौहार्द? – यह ‘हिंदू’ बनने का वक्त, ‘सेकुलर’ नौटंकी से बचो

क्या UP और केंद्र में BJP की सरकार न होती, तब भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह सब इतना ही आसान होता? 'अच्छा हिंदू' कहेगा कि क्यों नहीं?

गहलोत के 15 MLA हमारे साथ, आजाद होते ही आ जाएँगे: पायलट गुट के विधायक ने कॉन्ग्रेस की मुसीबत​ बढ़ाई

राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार से खतरा टलता नहीं दिख रहा। सचिन पायलट गुट के विधायक हेमाराम चौधरी के दावे ने पार्टी की मुसीबत और बढ़ा दी है।

राम मंदिर की नींव में मुस्लिम ईंट क्यों रखेगा: अजीत भारती का सवाल | Ajeet Bharti on Faiz Khan Ram Mandir issue

एक हिन्दू मंदिर की नींव में समुदाय विशेष का व्यक्ति ईंट क्यों रखेगा? इसके पीछे तर्क क्या है? आखिर वो करना क्या चाहते हैं? इसके पीछे एजेंडा क्या है?

सहिष्णुता और अधिकार, वामपंथ के टैक्टिकल हथियार: ऐयारों जैसा है कट्टरपंथी कम्युनिस्टों और इस्लामपंथियों का उदारवाद

ये नव-उदारवादी बहरूपिए ऐयारों की तरह दुनिया भर में इस्लामिस्ट्स और कम्युनिस्ट मानव अधिकारों, महिला अधिकारों, अल्पसंख्यक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सहिष्णुता की वकालत करते नज़र आते हैं।

लव जिहाद और वामपंथी नैरेटिव: हिंदू नारीवादी विमर्शों से ही खतरे का मुकाबला संभव

मेरठ में माँ-बेटी के क़त्ल ने एक बार फिर लव जिहाद के विमर्श को हवा दी है। हिंदूवादी नारीवादी विमर्शों से ही इस खतरे का मुकाबला किया जा सकता है।

मनोरजंन के नाम पर हिंदू पहचान और मान्यताओं पर प्रहार: इस मानसिक युद्ध का प्रतिकार जरूरी

फिल्म हो या सीरियल। विज्ञापन या वेब सीरिज। खलनायक ही क्यों हिंदू प्रतीक चिह्नों के साथ नजर आते हैं? हिंदू नायक क्यों नहीं रुद्राक्ष की माला पहनते हैं?

अजमल कसाब ने आत्महत्या की थी… Google यही दिखा रहा है: भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा के पीछे किन-किन का हाथ

जब आप गूगल पर 'Ajmal Kasab Death' लिख कर सर्च करेंगे तो आप 'मृत्यु का कारण' वाले सेक्शन में पाएँगे कि आत्महत्या लिखा हुआ है।

‘क्या यही है रामराज्य’, ‘संघियों ने मारा’ चिल्लाने वाले, ‘कमालुद्दीन के बेटे’ के हत्यारा होने पर बिलबिलाए

इस बात से तो कोई इनकार नहीं कर रहा कि इस केस में बाकी आरोपित का हाथ नहीं था। लेकिन लोग केवल शाहनूर का नाम उजागर कर रहे हैं क्योंकि...

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