नोएडा की सोसाइटी में मंदिर निर्माण की माँग पर प्रोपेगेंडा पत्रकार आरफा खानम ने 'मस्जिद कार्ड' और 'RSS-BJP' एंगल घुसाकर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की।
Gen Z का अनुभव अलग है। इस पीढ़ी में जो भी हमदर्दी पैदा हो सकती थी, उसे नए-अंबेडकरवादियों ने उनकी जाति को टारगेट करके घटिया और भद्दी रील बनाकर खत्म कर दिया है।
AIMIM की बुर्के वाली पार्षद सहर शेख सिर्फ मुंब्रा को हरा नहीं रंगना चाहती हैं, बल्कि वो '15 मिनट' के मायने भी बखूबी जानती हैं। और उनकी बात पर हँसने वाली भीड़ भी इसके मायने जानती है।