विचार

1994 के प्रण से 2026 की हुंकार तक: अखंड भारत के लिए देश मनाता है ‘POJK संकल्प दिवस’, पढ़ें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सामरिक महत्व

POJK का संकल्प मात्र राजनीतिक दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्रभुसत्ता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा का जीवंत प्रमाण है।

PM मोदी की राह चले CM योगी, भगवा वस्त्र में विदेश दौरा कर लाएँगे UP के लिए निवेश: सांस्कृतिक कूटनीति से साधेंगे दुनिया, समझें-...

CM योगी पारंपरिक भगवा वस्त्रों में सिंगापुर-जापान जाएँगे। ऐसा पहली बार होगा, जब कोई सरकारी प्रतिनिधि के रूप में भगवा वस्त्र में विदेश जाएगा।

जन-जन के मन में बसा मोदी-शाह का UP-YOGI अस्त्र, इसलिए हिंदुओं को बाँटने के लिए गढ़ी जा रही ‘मनोहर कहानियाँ’

PM मोदी, CM योगी और शाह के बीच मतभेद की खबरें उड़ाई जाती हैं। जानिए कैसे राजनीतिक नैरेटिव के जरिए दरार की ये कहानियाँ गढ़ी जाती हैं।

बांग्लादेश चुनाव में ‘सब चंगा’ लेकिन ECI ‘तुगलकी आयोग’: ममता बनर्जी की ‘खास’ वोट बैंक को साधने की रणनीति

एक तरफ ममता बनर्जी बांग्लादेश चुनाव को शांतिपूर्ण बता रहीं, वहीं दूसरी ओर भारत के चुनाव आयोग को तुगलकी बताते हुए BJP की वाशिंग मशीन कह रही।

मुंब्रा को ‘हरे रंग’ में रंगने की चाह रखने वाली सहर शेख को अब चाहिए ’15 मिनट’ वाली शांति: इस्लामी भीड़ को पता है...

AIMIM की बुर्के वाली पार्षद सहर शेख सिर्फ मुंब्रा को हरा नहीं रंगना चाहती हैं, बल्कि वो '15 मिनट' के मायने भी बखूबी जानती हैं। और उनकी बात पर हँसने वाली भीड़ भी इसके मायने जानती है।

सूर्य कुमार यादव ने पाकिस्तानियों से हाथ क्यों नहीं मिलाया? Economic Times पूछ रहा सवाल, कहा- इतिहास जवाब माँगेगा

ICC T20 वर्ल्ड कप में सूर्य कुमार यादव की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। इसी बीच Economic Times ने सवाल पूछा कि सूर्यकुमार यादव ने पाकिस्तानियों से हाथ क्यों नहीं मिलाया?

महाशिवरात्रि विशेष: आधुनिक युग के लिए शिव चेतना का शाश्वत संदेश

इस भागदौड़ में शिव का जीवन हमें संयम और आत्म-नियंत्रण का पाठ सिखाता है। वे हजारों वर्षों तक ध्यान में लीन रहे।

IIT पटना की प्रोफेसर डॉ प्रियंका त्रिपाठी कर रही सनातन को बदनाम, एजेंडा फैलाने में किया ‘शक्ति’ का इस्तेमाल: रिसर्च पेपर में हिंदुओं को...

डॉ. प्रियंका त्रिपाठी के अन्य पेपर्स में शिवलिंग, मनुस्मृति और कोठा संस्कृति की तारीफ कर हिंदू समाज पर सवाल उठाए गए हैं।

1937 के जिन्ना वाले एजेंडे से लेकर आज के अरशद मदनी तक, ‘वंदे मातरम’ पर कट्टरपंथ का प्रहार: भारत में अब भी जीवित है...

जिन्ना ने जो विभाजनकारी बीज बोया था, आज की कट्टरपंथी ताकतें उसे ही सींच रही। इन तत्वों की सोच में न तो पहले कोई परिवर्तन था और न आगे होगा।

पीरागढ़ी कार हत्याकांड में मुस्लिम आलिम करीमुद्दीन को मीडिया बता रहा ‘बाबा-तांत्रिक’, ये हिंदुओं को बदनाम करने की कोशिश: समझिए- कैसे खेला जा रहा...

अपराध से बड़ा खतरा भाषा का गलत उपयोग है। मीडिया की गलत रिपोर्टिंग समाज में भेदभाव और गलत सोच को जन्म दे सकती है।

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