22 फरवरी को POJK संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो 1994 में भारतीय संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित ऐतिहासिक संकल्प की याद दिलाता है। इस संकल्प में संसद ने स्पष्ट घोषणा की कि जम्मू-कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है, रहा है और रहेगा। पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए क्षेत्रों को खाली करने की माँग की गई तथा किसी भी अलगाववादी प्रयास का सभी आवश्यक साधनों से विरोध करने की दृढ़ प्रतिबद्धता जताई गई।
यह संकल्प मात्र राजनीतिक दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्रभुसत्ता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा का जीवंत प्रमाण है। भारत सरकार का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट है- POJK (पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर) और गिलगित-बाल्टिस्तान भारत के अभिन्न अंग हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने 2019 में संसद में कहा था, “जब मैं जम्मू-कश्मीर की बात करता हूँ, तो इसमें POJK और अक्साई चिन शामिल हैं। इस क्षेत्र के लिए हम जीवन देने को तैयार हैं।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कई बार दोहराया कि POJK भारत का था, है और रहेगा, तथा इसके लोग जल्द भारत के साथ जुड़ना चाहेंगे। 2025-2026 में भी ये बयान दोहराए गए, जहाँ राजनाथ सिंह ने कहा कि POJK के लोग पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों से मुक्ति चाहते हैं और भारत उन्हें अपना मानता है।
यह दावा केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, कानूनी और सामरिक रूप से मजबूत है। 1947 के अधिमिलन से POJK भारत का हिस्सा है और पाकिस्तान का कब्जा अवैध है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1947 का आक्रमण और जम्मू-कश्मीर का भारत में मिलन
1947 में जम्मू-कश्मीर रियासत के महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर को भारत के साथ अधिमिलन किया। लेकिन पाकिस्तानी फौज ने अक्टूबर 1947 में बड़े पैमाने पर आक्रमण किया। भारतीय सेना ने श्रीनगर घाटी मुक्त कराई, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के युद्धविराम प्रस्ताव के कारण आगे की कार्रवाई रुक गई। परिणामस्वरूप, मीरपुर, पुंछ, मुजफ्फराबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान के अवैध कब्जे में चले गए।
यह कब्जा आज तक जारी है। यूएन ने पाकिस्तान को आक्रमणकारी माना और क्षेत्र खाली करने का आदेश दिया, लेकिन पाकिस्तान ने अनदेखा किया। भारत का पक्ष स्पष्ट है- POJK अवैध कब्जा है और इसे वापस लेना राष्ट्रीय दायित्व है।
POJK की वर्तमान स्थिति: क्षेत्रीय विभाजन और कब्जे के आँकड़े
POJK को तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है-
- पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (POJK): मीरपुर-मुजफ्फराबाद क्षेत्र (13,297 वर्ग किमी)।
- पाकिस्तान अधिक्रांत लद्दाख (POTL): गिलगित-बाल्टिस्तान (67,791 वर्ग किमी)।
- चीन अधिक्रांत लद्दाख (COTL): अक्साईचिन और शक्सगाम घाटी (42,735 वर्ग किमी, जिसमें 1963 का सिनो-पाक समझौता शामिल)।
जम्मू-कश्मीर रियासत के मूल 2,22,236 वर्ग किमी में से 54.4% (1,21,000 वर्ग किमी) अवैध कब्जे में है। 2019 के नए मानचित्र में इन क्षेत्रों को भारत का हिस्सा दिखाया गया।
1947-48 में हिंदू-सिख समुदाय पर नरसंहार हुए: मुजफ्फराबाद में हजारों मारे गए, मीरपुर में 20,000+ हत्याएँ, महिलाओं का अपहरण। लाखों विस्थापित आज भी पीड़ित हैं। सांस्कृतिक स्थल जैसे शारदापीठ, रघुनाथ मंदिर खंडहर हैं।
सामरिक महत्व: भारत की सुरक्षा और भू-राजनीति
POJK भारत के लिए सामरिक केंद्र है। गिलगित-बाल्टिस्तान मध्य एशिया का प्रवेश द्वार है, जहाँ पाकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान की सीमाएँ मिलती हैं। CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) इसी से गुजरता है, जो काराकोरम राजमार्ग से चीन को पाकिस्तान जोड़ता है।
यह भारत के लिए खतरा है-
दो मोर्चों की चुनौती: चीन (अक्साईचिन) और पाकिस्तान (POJK) का गठजोड़ भारत को घेरता है।
आतंकवाद का केंद्र: POJK में आतंकी शिविर भारत में घुसपैठ के लिए इस्तेमाल होते हैं।
सीमा सुरक्षा: LOC पर तनाव बढ़ता है, और CPEC से सैन्य गतिविधियाँ तेज होती हैं।
POJK वापस लेना भारत की सुरक्षा के लिए जरूरी है क्योंकि यह क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखेगा और चीन-पाक गठजोड़ को कमजोर करेगा।
जल संसाधनों का महत्व: सिंधु नदी तंत्र और पानी की सुरक्षा
POJK सिंधु नदी तंत्र का स्रोत है। इंडस, झेलम और चेनाब नदियाँ यहाँ से निकलती हैं। सिंधु जल समझौता (1960) पाकिस्तान को इन नदियों का बड़ा हिस्सा देता है, लेकिन POJK पर कब्जा पाकिस्तान को भारत पर पानी का दबाव बनाने की क्षमता देता है।
भारत के लिए: POJK वापस लेने से जल सुरक्षा मजबूत होगी, सिंचाई और बिजली उत्पादन बढ़ेगा।
पाकिस्तान के लिए: यह क्षेत्र उसकी 80% पानी आपूर्ति का आधार है।
जलवायु परिवर्तन से पानी की कमी बढ़ रही है, इसलिए POJK नियंत्रण भारत के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है।
आर्थिक महत्व: खनिज संसाधन और व्यापारिक हित
POJK दुनिया के सबसे खनिज-समृद्ध क्षेत्रों में से एक है। गिलगित-बाल्टिस्तान में-
- 1,480+ सोने की खदानें (कई अफ्रीका से बेहतर गुणवत्ता)।
- यूरेनियम, लौह अयस्क, उच्च गुणवत्ता वाला संगमरमर, ग्रेनाइट, रत्न (एमराल्ड, रूबी)।
- मूल्य: अरबों डॉलर का अनुमानित भंडार।
पाकिस्तान और चीन इनका शोषण कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को लाभ नहीं। POJK वापस लेने से भारत को खनिज संपदा मिलेगी, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। व्यापारिक मार्ग (मध्य एशिया तक) खुलेंगे। CPEC जैसी परियोजनाओं पर नियंत्रण से भारत की व्यापारिक स्थिति मजबूत होगी। यह क्षेत्र भारत के ऊर्जा और औद्योगिक हितों से जुड़ा है।
भारत सरकार का स्पष्ट पक्ष और वर्तमान प्रयास
भारत का पक्ष अटल है- POJK भारत का अभिन्न अंग है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद नया मानचित्र और वक्तव्य मजबूत संकेत हैं। राजनाथ सिंह ने 2025 में कहा कि POJK के लोग पाकिस्तान से मुक्ति चाहते हैं और भारत उन्हें अपना मानता है। अमित शाह ने जीवन बलिदान की बात कही।
POJK वापस लेना जरूरी है क्योंकि यह अखंड भारत का हिस्सा पूरा करेगा। लाखों विस्थापितों की न्यायिक पुण्यभूमि लौटेगी। इससे सामरिक संतुलन बनेगा और आर्थिक संसाधन भारत के होंगे।
मुक्ति का संकल्प और जनजागरण
POJK संकल्प दिवस हमें याद दिलाता है कि 1947 का अधूरा एजेंडा पूरा होना बाकी है। संसद का 1994 संकल्प, वर्तमान सरकार के बयान और राष्ट्र की इच्छाशक्ति से मुक्ति संभव है। जनजागरण से वह दिन आएगा जब POJK भारत में शामिल होगा, अखंड भारत साकार होगा और क्षेत्रीय शांति स्थापित होगी।


