विचार

…जब 58 लोग कोयंबटूर ब्लास्ट में मरे थे, तब कॉन्ग्रेस व सहयोगी दलों ने आतंकियों को जेल में करवाई थी मालिश

"कोयंबटूर आतंकी घटनाओं के आरोपी के लिए जेल को स्पा में बदला। अब्दुल नासिर की मालिश का खर्च वहन सरकार कर रही थी, उसकी पत्नी के खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट होने के बावजूद वह नासिर से बेरोकटोक मिल सकती थी। यह तब हो रहा था जब कॉन्ग्रेस के 33 विधायक और DMK के 97 MLA थे।"

विभाजन और पाकिस्तान में अल्पसंख्यक: कॉन्ग्रेस के लिए नेहरू और इतिहास से सीखने का वक्त

आज कॉन्ग्रेस CAA का विरोध कर रही है। इसका कोई आधार नहीं है। जरूरत है उसके नेता इतिहास को समझें। नेहरू मंत्रिमंडल में राहत और पुनर्वास के लिए अलग से मंत्रालय था। मोदी सरकार ने उसी प्रक्रिया का सरलीकरण किया है।

देशी कट्टे से पुलिस पर गोली चला कर होती है UPSC की तैयारी! अपने ‘शहीद दंगाई हीरो’ के बचाव में मीडिया

मोहित की जान की क़ीमत नहीं है क्योंकि वो 'योगी की पुलिस' का हिस्सा हैं। वहीं सुलेमान UPSC की तैयारी करने वाला एक 'आदर्श' छात्र है, जो किसी क़ानून के पारित होने के बाद उसे पढ़ कर नोट्स नहीं बनाता बल्कि देशी कट्टा लहराते हुए आगजनी करने निकल पड़ता है। मीडिया का हीरो कौन?

पेट्रोल बम फेंको, नौकरी पाओ योजना: ‘ये लोग’ दंगाइयों को पालते रहेंगे, हिंदू सोता रहेगा

आपके पास विकल्प दो ही हैं: डर कर रहिए या सवाल पूछना शुरू कीजिए। सवाल नहीं पूछेंगे कि तुम्हें 'हिन्दुत्व' को फक करने का विचार क्यों आता है, तो ये कल आपकी बहू-बेटियों को छेड़ने से भी नहीं हिचकिचाएँगे। अगर कोई ‘हिन्दुओं से आजादी', ‘हिन्दुत्व की कब्र खुदेगी', 'फक हिन्दुत्व' बोल कर और लिख कर खुले आम टहल रहा है, तो...

नागरिकता (संशोधन) कानून की आवश्यकता क्यों?

अमेरिका के एक अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान पीआरसी ने 39 इस्लामिक देशों में एक सर्वेक्षण किया था। उन्होंने मुस्लिमों से पूछा कि क्या वे अपने देश को शरियत कानून के अनुसार चलाना चाहते है? जवाब में अफगानिस्तान के सभी लोगों (99 प्रतिशत), पाकिस्तान के 84 प्रतिशत और बांग्लादेश में 82 प्रतिशत लोगों ने माना कि उनके यहाँ आधिकारिक कानून शरियत ही होना चाहिए।

2019 की इस मजहबी उन्मादी आग से 2024 में कितनी रोशन होगी भाजपा?

2024 बहुत दूर है। उस समय क्या होगा, यकीनी तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन, जितने जोर-शोर से CAA+NRC को मुस्लिम विरोधी बताया जाएगा, इस्लाम विरोधी भावनाएँ गहराती जाएँगी। वैसे भी इस उन्माद के सारे सूत्र भीड़ अपने हाथ ले ही चुका है।

यूनिवर्सिटी दंगों के 6000 लोगों को रोकने के लिए जब कैनेडी ने 30,000 जवान उतार दिए थे

हम ये मान लें कि 'अल्लाहु अकबर' का मतलब 'गॉड इज ग्रेट' होता है? इतने मासूम तो मत ही बनो। दंगा करते वक्त ये नारा उतना ही साम्प्रदायिक है जितना 'हिन्दुओं से आजादी' और ‘हिन्दुत्व की कब्र खुदेगी' है। राजनैतिक विरोध में 'नारा-ए-तकबीर' और 'ला इलाहा इल्लल्लाह' की जगह कैसे बन जाती है?

‘वसुधैव कुटुम्बकम’ अच्छी चीज… लेकिन स्थानीय पहचान को समाप्त करके नहीं: NRC है देश व समय की माँग

NRC का जो विरोध है, वो दरअसल प्रदर्शन है संख्या बल का। वो दिखा रहे हैं कि “देखो, जहाँ-जहाँ हमारी संख्या थोड़ी भी अधिक है, वहाँ-वहाँ हम तोड़-फोड़ कर सकते हैं, आग लगा सकते हैं, पुलिसकर्मी को मार सकते हैं।” उनका संदेश स्पष्ट है कि वो अगर संख्या बल में अधिक हैं तो...

खिसियाया रवीश ऑपइंडिया नोचे: न्यूज़लॉन्ड्री का लेख रवीश ने ही लिखवाया, एडिट किया, नहीं चला तो खुद शेयर किया

हर उस आदमी को गोदी मीडिया, आईटी सेल, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी बोल देते हैं, जो उनके पाखंड की पोल खोलने की जुर्रत करता है। मुझे भरोसा है कि रवीश जी सबका नाम किसी कॉपी में लिखकर रख रहे होंगे कि जब राहुल गाँधी प्रधानमंत्री बनेंगे तो उनसे बोलकर सबको जेल भिजवाएँगे।

रवीश कुमार और न्यूजलॉन्ड्री का ऑपइंडिया पर हमला: अजीत भारती का जवाब | Ajeet Bharti on Ravish Kumar and Newslaundry Propaganda

रवीश कुमार ने न्यूज लॉन्ड्री के साथ मिलकर ऑपइंडिया पर हमला करते हुए कहा कि आईटी सेल वालों की दुकान ही चलती है रवीश कुमार के नाम से।

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