मोहित की जान की क़ीमत नहीं है क्योंकि वो 'योगी की पुलिस' का हिस्सा हैं। वहीं सुलेमान UPSC की तैयारी करने वाला एक 'आदर्श' छात्र है, जो किसी क़ानून के पारित होने के बाद उसे पढ़ कर नोट्स नहीं बनाता बल्कि देशी कट्टा लहराते हुए आगजनी करने निकल पड़ता है। मीडिया का हीरो कौन?
आपके पास विकल्प दो ही हैं: डर कर रहिए या सवाल पूछना शुरू कीजिए। सवाल नहीं पूछेंगे कि तुम्हें 'हिन्दुत्व' को फक करने का विचार क्यों आता है, तो ये कल आपकी बहू-बेटियों को छेड़ने से भी नहीं हिचकिचाएँगे। अगर कोई ‘हिन्दुओं से आजादी', ‘हिन्दुत्व की कब्र खुदेगी', 'फक हिन्दुत्व' बोल कर और लिख कर खुले आम टहल रहा है, तो...
अमेरिका के एक अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान पीआरसी ने 39 इस्लामिक देशों में एक सर्वेक्षण किया था। उन्होंने मुस्लिमों से पूछा कि क्या वे अपने देश को शरियत कानून के अनुसार चलाना चाहते है? जवाब में अफगानिस्तान के सभी लोगों (99 प्रतिशत), पाकिस्तान के 84 प्रतिशत और बांग्लादेश में 82 प्रतिशत लोगों ने माना कि उनके यहाँ आधिकारिक कानून शरियत ही होना चाहिए।
2024 बहुत दूर है। उस समय क्या होगा, यकीनी तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन, जितने जोर-शोर से CAA+NRC को मुस्लिम विरोधी बताया जाएगा, इस्लाम विरोधी भावनाएँ गहराती जाएँगी। वैसे भी इस उन्माद के सारे सूत्र भीड़ अपने हाथ ले ही चुका है।
हम ये मान लें कि 'अल्लाहु अकबर' का मतलब 'गॉड इज ग्रेट' होता है? इतने मासूम तो मत ही बनो। दंगा करते वक्त ये नारा उतना ही साम्प्रदायिक है जितना 'हिन्दुओं से आजादी' और ‘हिन्दुत्व की कब्र खुदेगी' है। राजनैतिक विरोध में 'नारा-ए-तकबीर' और 'ला इलाहा इल्लल्लाह' की जगह कैसे बन जाती है?
NRC का जो विरोध है, वो दरअसल प्रदर्शन है संख्या बल का। वो दिखा रहे हैं कि “देखो, जहाँ-जहाँ हमारी संख्या थोड़ी भी अधिक है, वहाँ-वहाँ हम तोड़-फोड़ कर सकते हैं, आग लगा सकते हैं, पुलिसकर्मी को मार सकते हैं।” उनका संदेश स्पष्ट है कि वो अगर संख्या बल में अधिक हैं तो...
हर उस आदमी को गोदी मीडिया, आईटी सेल, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी बोल देते हैं, जो उनके पाखंड की पोल खोलने की जुर्रत करता है। मुझे भरोसा है कि रवीश जी सबका नाम किसी कॉपी में लिखकर रख रहे होंगे कि जब राहुल गाँधी प्रधानमंत्री बनेंगे तो उनसे बोलकर सबको जेल भिजवाएँगे।
सीएए और एनआरसी को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है। फरहान अख्तर ने अंग्रेजी में वही चीजें शेयर की है, जिसमें वही बातें हैं जिन्हे व्हाट्सप्प फॉरवर्ड के माध्यम से फैलाया जा रहा है। आपके सामने जब भी ऐसी बातें आएँ, आप तभी जवाब देने की स्थिति में होंगे जब आपको सच्चाई पता होगी।
अब्दुल गिर जाता है, उसकी आँखों के सामने स्कूल जाती रजिया का चेहरा घूमता है, उसके माता-पिता की तस्वीर नाचती है, उसकी आँख बंद होने लगती है, लोग उसके ऊपर लात रख कर भाग रहे होते हैं। भीड़ छँटने के बाद अब्दुल मरा हुआ पाया जाता है।