विचार

लिबरपंथियो, आँकड़े चाहिए हिन्दुओं पर हुए अत्याचार के? ये लो – रेप, हत्या, मंदिर सब का डेटा है यहाँ

पाकिस्तान से हर साल 5000 हिन्दू अपना घर-बार छोड़ कर भारत भाग आते हैं। वहाँ के 95% मंदिरों पर कब्ज़ा कर उनमें दुकानें चलाई जा रहीं। बांग्लादेश में 3000 से ज़्यादा हिन्दुओं का घर जला दिया गया। 1 करोड़ 40 लाख हिन्दू वहाँ हमेशा कट्टरपंथियों के निशाने पर। अफगानिस्तान में...

‘Pak में मेरे परिवार को मुस्लिम बना दिया’ – CAB पर बोलना था विरोध में, डेरेक ओ’ब्रायन ने सच उगल दिया

एक चतुर लेकिन बौखल वकील बुढ़ापे में यह भूल गया कि किस तरफ़ से बहस करने की फीस मिली है, और जाकर अपने ही मुवक्किल को कातिल साबित करने वाली दलीलें दे आया। तृणमूल के सांसद और हम सबके बचपन के 'बॉर्नवीटा क्विज़ मास्टर' डेरेक ओ'ब्रायन यही मूर्खता आज राज्य सभा में कर आए हैं।

क्या नागरिकता बिल मुसलमानों को भगाने के लिए लाया गया है?

मुसलमानों के साथ कौन सा अन्याय हुआ है? कहाँ के मुसलमान को वो नहीं मिल रहा जो हिन्दुओं को मिल रहा है? क्या कोई ऐसी योजना है, छात्रवृत्ति है, कोई कार्ड है, सिलिंडर है, बिजली है, बैंक अकाउंट है, बल्ब है, बीमा है, हॉस्पिटल है, स्कूल है, कॉलेज है, यूनिवर्सिटी है, जहाँ सरकार ने कहा हो कि इसमें भारतीय मुसलमानों को नहीं रखा गया है?

तू चल मैं आता हूँ: बरखा दत्त माँगे आज का ‘गाँधी’, याद आई लोमड़ी-कौव्वे की कहानी

मीडिया गिरोह ऐसे आंदोलनों की तलाश में रहता है, जहाँ अपना कुछ दाँव पर न लगे और मलाई काटने को खूब मिले। बरखा दत्त का ट्वीट इसकी प्रतिध्वनि है। यूॅं ही नहीं कहते- तू चल मैं आता हूँ, चुपड़ी रोटी खाता हूँ, ठण्डा पानी पीता हूँ, हरी डाल पर बैठा हूँ।

भारत ने किसी ‘समुदाय विशेष’ का ठेका नहीं ले रखा NDTV के सम्पादक महोदय! अल्पसंख्यक का रोना बंद करें

NDTV के सम्पादक श्रीनिवासन जैन नागरिकता विधेयक को लेकर अपने ट्वीट के चंद शब्दों 'excludes a specific minority community' में हिन्दुओं के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने, उन्हें नाहक ग्लानि का अनुभव कराने और कथित अल्पसंख्यकों को बिना किसी ठोस आधार के बेचारा दिखाने का जो प्रपंच रचा है, उसे...

महाभारत में ‘बलात्कार’ की क्या सजा थी? इसे स्त्री की ‘इज्जत लुटने’ जैसी बेहूदी बात से किसने जोड़ा?

महाभारत की द्रौपदी वैसी नहीं थी जैसा उसे पूर्वग्रहों से ग्रस्त कुछ लोग दर्शाना चाहते हैं। क्या वो फैसले लेती नजर आती हैं? जवाब है- हाँ। जैसे आज के भारत में राष्ट्रपति के पास मृत्युदंड को क्षमा करने के अधिकार होते हैं, लगभग वैसे ही द्रौपदी भी मृत्युदंड माफ़ करती नजर आती है।

समाज एनकाउंटर पर जश्न मनाता है, तो उसका कारण है: उन्नाव की बेटी भी कल मर गई

जब नागरिक ऐसे मामलों से उब जाते हैं तो फिर ऐसी मौतों का जश्न मनाते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में जब किसी की हत्या ही न्यायोचित थी, भले ही उस पर केस न चला हो, आम नागरिक के लिए यह एक छोटी-सी जीत है, जिस पर खुश होने का उन्हें हक है।

राहुल गाँधी के ‘तमगे’: सुप्रीम कोर्ट की फटकार, नेशनल हेराल्ड घोटाला और झूठा प्रलाप

चाहे झूठ बोलना हो या फिर गबन का मामला। ये न केवल कानूनी रूप से गलत हैं, बल्कि नैतिक और सामाजिक तौर पर भी ये गुनाह ही माने जाते हैं। इन तमगों के लिए राहुल गॉंधी को सार्वजनिक तौर पर वैसे ही माफी मॉंगना चाहिए जैसे सुप्रीम कोर्ट से मॉंगी थी।

नागरिकता विधेयक: मुस्लिमों को भगाने वाला कानून? नहीं ब्रो, वामपंथी प्रपंच फैला रहे हैं!

हिन्दू कहीं भी हो, कट्टर नहीं है। वो सामाजिक अपराध कर सकता है, धार्मिक आतंकवादी नहीं बनता। लेकिन, बांग्लादेशी यहाँ दीमक की तरह फैल रहे हैं, और समाज को खोखला कर रहे हैं। इन्हें बाहर फेंकना समय की माँग है, इसलिए इन्हें नागरिकता देने का तो सवाल ही नहीं उठता।

नागरिकता विधेयक से मुस्लिम बाहर: वामपंथियो! हम ‘sick a**hole’ भले हों, लेकिन चलेगी हमारी ही

हिन्दुओं की जैसे दुर्दशा सेक्युलर सरकार ने कर रखी है, उसमें हिन्दुओं को 'सेक्युलरिज़्म' की दुहाई वैसे ही है, जैसे नाज़ी यातना शिविर में पड़े यहूदी से प्रार्थना कि वह अपने शोषकों को जिलाए रखने के लिए कुछ कर दे।

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