विचार

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लुटियंस (बाएँ) और खान मार्केट (दाएँ)

हाशिए पर खड़े लुटियंस-खान मार्केट गिरोह बने ‘प्राउड’ हिंदुस्तानी, इन्हें सत्ता की मलाई चाहिए

यह गैंग न होने का कैसा सबूत है कि पिता खान मार्केट बँगले में रहे, पति भी उसी सर्विस, उसी सर्किल में, और उसके बाद आपके दामाद की तैनाती बैंक की खान मार्केट शाखा में ?
गौतम गंभीर

‘अपने लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिमों की गुंडागर्दी वाली घटना पर गंभीर चुप क्यों?’ Twitter पर लोग नाराज़

"गुरुग्राम के मुस्लिम युवक द्वारा झूठे दावे करने के बाद गौतम गंभीर ने त्वरित टिप्पणी करते हुए टॉलरेंस और सेकुलरिज्म की बात की थी जबकि अपने लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिमों द्वारा पत्थरबाज़ी कर बसों को क्षतिग्रस्त करने और खुलेआम गुंडागर्दी करने की घटना पर वह चुप क्यों हैं?"
डीटीसी बस रोकते हुए नमाजी

कार के टक्कर से 17 नमाजी घायल: मीडिया ने फैलाई झूठी ख़बर, दिल्ली पुलिस ने दी असली जानकारी

"जो मीडिया समूह या मीडिया पोर्टल मेरे नाम से यह स्टेटमेंट जारी कर रहे हैं कि 17 लोग घायल हुए हैं, वह गलत है। वहाँ कोई भी घायल नहीं है। उन्होंने आगे जोड़ा कि तीन लोग बाद में पुलिस स्टेशन आए थे कि वह घायल हैं लेकिन उन्हें देखकर यह साफ था कि कोई भी घायल नहीं था।"
प्रिय असुरों, जब श्री कृष्ण सारथी थे तब तुम्हारी खटिया खड़ी कर दी थी- इस रथ में वह योद्धा हैं। रास्ते से हट जाओ...

‘द हिन्दू’ वालो, पुरी में रथ बनेगा भी, चलेगा भी, और तुम्हारी एंटी हिन्दू छाती पर मूंग भी दलेगा

काले दिल वाले इन असुरों की दृष्टि श्री कृष्ण के रथ पर है। यह हिन्दुओं पर है कि वह असुरों को रथ का पहिया तोड़ देने देते हैं, या आसुरिक इरादों को ही रथयात्रा के नीचे कुचल देते हैं...
दक्षिण भारत, उत्तर भारत

हिंदीभाषियों के विशाल हृदय का सबूत है दक्षिण की फिल्मों का व्यापक बाज़ार

हिंदीभाषियों ने दक्षिण भारतीय भाषाओं की फ़िल्मों को एक ऐसा मार्केट दिया है, जिसकी व्यापकता देख कर हिंदी का विरोध करने वाले बेहोश हो जाएँ। बंधन प्यार से बनता है। जब वो टूटता है, तो विदेशी चीजें हमें अपना गुलाम बनाती हैं। इसे तोड़ने वालों, सावधान!
सेना

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 7 प्राथमिकताएँ, जिन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को खरे उतरना है

सेना के साथ-साथ सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण का कार्य रक्षा मंत्री की प्राथमिकता होनी चाहिए। क्योंकि भाजपा को जो स्पष्ट जनादेश मिला है, वो राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे पर मिला है।
हिन्दुओं ने ठेका नहीं ले रखा है सेक्युलरिज्म का- खासकर कि 70 साल झूठ और प्रपंच के आधार पर अपमानित होने, झुठलाए जाने के बाद

हिन्दुओं पर Scroll एक कदम आगे, 3 कदम पीछे: आक्रांताओं को इस्लामी माना, लेकिन हिन्दुओं का दानवीकरण जारी

"हिन्दुओं पर इस्लामी आक्रांताओं के क्रूर अत्याचारों को रोमिला थापर जैसे इतिहासकारों ने निष्ठुरता से झुठला दिया, ताकि आधुनिक हिन्दुओं को अपने पूर्वजों के साथ हुए अत्याचारों की याद से दूर रख उन्हें हिन्दू राष्ट्र की (न्यायोचित, प्राकृतिक) माँग करने से रोका जा सके।" - लेखक ने यह माना लेकिन हिंदुओं के प्रति जहर...
अजित डोभाल

2 दिन में धराशाई हुआ NDTV का प्रोपेगेंडा, PM मोदी और डोवाल को लेकर बेच रहा था झूठ

स्वनामधन्य न्यूज़ चैनल एनडीटीवी की वेबसाइट पर नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के एक दिन बाद ही बिजली की तेज़ी से यह विश्लेषण प्रकाशित किया गया कि मोदी ने अजित डोभाल के 'पर क़तर दिए।'
आतंकी का जनाजा

प्रिय होम मिनिस्टर, आतंकियों की लाशें परिवार को सौंप कर उन्हें हीरो बनाना कब बंद होगा?

इस दूसरे कार्यकाल में इन आतंकियों को हीरो बनाने से रोकना एक प्राथमिकता होनी चाहिए। जिसने निर्दोषों को क़त्ल के लिए बंदूक उठा ली, वो मानव नहीं है। जो मानव नहीं है, उसके न तो अधिकार हैं, न परिवार।
इमरान खान (बाएँ वाले)

इमरान खान, हिन्दुओं के धर्म-ग्रंथ लिट्टे बनाने का हुक्म नहीं देते, जबरदस्ती हमें अपने स्तर पर मत घसीटो

जापान के सैनिकों ने एक अंतरराष्ट्रीय युद्ध में अपने देश के लिए प्राणोत्सर्ग किया, और जिहादी जो करते हैं वह है लोगों की आँखों में धूल झोंक कर, उनके बीच पैठ बनाकर, घुल-मिलकर मज़हब के नाम पर, आस्था के नाम पर, जन्नत की उम्मीद में बेगुनाहों की जान ले लेना।
'द हिन्दू' प्रोपगंडा, अक्षय पात्र फाउंडेशन

रोज़ 17 लाख बच्चों का पेट भरने वाली संस्था को बदनाम करने के लिए ‘The Hindu’ का ज़हरीला प्रोपेगेंडा

रोजाना 17 लाख बच्चों का पेट भरने वाली एक संस्था को सिर्फ़ इसीलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि बच्चों को लहसुन-प्याज नहीं दिया जाता। सरकार द्वारा निर्धारित सभी मानकों पर खड़ा उतरने के बावजूद 'मिड डे मील' में जाति घुसेड़ कर इसे बदनाम किया जा रहा है।
मृणाल पांडे

हिन्दी भाषा का बवाल और पत्रकारिता का वह दौर जब कुछ भी छप रहा है, कोई भी लिख रहा है

तर्क हों तो आप लेख की शुरुआत विदेशी लेखक का नाम लेकर करें या फिर 'लगा दिही न चोलिया के हूक राजा जी' से, मुद्दे पर फ़र्क़ नहीं पड़ता। कुतर्क हों तो आप अपने पोजिशन का इस्तेमाल दंगे करवाने के लिए भी कर सकते हैं, कुछ लोग वही चाह रहे हैं।

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