विचार

डरने का नहीं, हिंदुओं को सुरक्षित बसाने का समय है: कश्मीर में आतंकियों की कमर तोड़ने के लिए उठाने होंगे और कड़े कदम, अब्दुल्ला-मुफ्ती...

कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए की समाप्ति हुए 3 वर्ष से अधिक समय बीत गया है। केंद्र सरकार ने इस दौरान वहाँ जमीनी बदलाव लाने के लिए अनेक काम किए हैं।

अब यूट्यूब पर देखने की भी आदत बदलिए, क्योंकि वैचारिक स्खलन की नई मीनार गढ़ते कहीं भी दिख सकते हैं रवीश कुमार

रवीश कुमार विलायती वेब सीरिज के उस सुरक्षाकर्मी की हालत में जा चुके हैं, जिसे इंतजार है कि वो आए और वे निस्तेज गति को प्राप्त हो जाएँ।

दिल्ली में आए 50 हजार किसान, अपनी बात कह लौट गए खेत-खलिहान: न कोई टेंट गड़ा-न किसी पर ट्रैक्टर चढ़ा, फिर ‘बक्कल उतार दूँगा’...

'किसान आंदोलन' से रेप-हत्या की खबरें आती थीं, 'किसान गर्जना रैली' में अलग-अलग संस्कृतियों का प्रदर्शन दिखा। आक्रोश तो था, लेकिन दुर्भावना नहीं। टिकैत जैसों को ये फर्क देखना चाहिए। यहाँ टुकड़े-टुकड़े की बातें करने वाले खालिस्तान नहीं थे, 'भारत माता' थीं।

न मकसद, न प्रभाव: ‘लाल सिंह चड्ढा’ जैसी ही लुटी पिटी है ‘भारत जोड़ो यात्रा’… हम निठल्ले होकर अंताक्षरी खेलते हैं, राहुल गाँधी चल...

राहुल गाँधी इतने खाली हैं कि वो इस यात्रा के नाम पर बस चले जा रहे हैं। उनकी दाढ़ी लाल सिंह चड्ढा के आमिर खान की तरह बढ़ती जा रही है।

सुशासन बाबू! हम बिहारियों को मार डालिए, अपने बड़े भाई की तरह रौंद डालिए; पर हमारे बिहार को माफ कर दीजिए

सिद्धांत, शुचिता, मर्यादा, आत्म नियंत्रण... से चले नीतीश कुमार ने पहले अंतरात्मा, लोकलाज, आदर्श को मारा। अब बिहार को क्यों मारने पर तुले हैं?

काफिरों पर कहर: मोरक्को की हार या जीत से नहीं, कट्टरपंथी इस्लामी मानसिकता और 72 हूरों के लिए दंगे-आतंक

हार में हिंसा, जीत में आतंक... कट्टरपंथी भीड़ बिल्कुल तटस्थ - हूरों की याद में! फुटबॉल वर्ल्ड कप में मोरक्को की जीत/हार इसका ताजा उदाहरण।

माहवारी होते निकाह, बेटियों को संपत्ति में अधिकार, कट्टरपंथी मानसिकता, न्याय में देरी… जानिए क्यों जरूरी है पूरे भारत में समान नागरिक संहिता

देश में विभिन्न कारणों से समान नागरिक संहिता की विशेष जरूरत है। सरकार को इसे तुरंत लागू करना चाहिए ताकि न्याय में विलंब को रोका जा सके।

AAP को जीत, दिल्ली को दुविधा मुबारक

AAP की केजरीवाल सरकार से भंग होता मोह। BJP शासित निगम के रहते घर के बाहर लगा कूड़े का ढेर। दुविधा में दिल्ली ने खुद का कूड़ा-कूड़ा कर लिया।

NDTV और रवीश कुमारः अब वो फिरते हैं तन्हा लिए दिल को, एक जमाने में मिजाज उनका सर-ए-अर्श-ए-बरीं था

एनडीटीवी मीडिया की अन्य दुकानों की तरह ही है। न पवित्र गाय, न सूअर। वे बस हुनरमंद रहे हैं विष्ठा को भस्म बता बेचने और खुद को बुद्धिजीवी बताने के।

62 साल पहले 3 बहनों ने तानाशाह के नाक में कर दिया दम, निर्ममता से हुई हत्या: 25 नवंबर की वो कहानी, जिससे उठी...

पूरे विश्व में हर तीन में से एक महिला किसी न किसी तरह के उत्पीड़न/ हिंसा का शिकार होती हैं। समय की माँग है कि हम एक जागरूक नागरिक की भांति आत्ममंथन करें।

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