हिन्दू धर्म को गाली देना भारतीय राजनीति का 'न्यू नॉर्मल' है, इसकी आदत डाल लीजिए। इनका कद ऐसा है कि इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जो करना है, हिन्दू एकता से ही होगा। उदयनिधि स्टालिन, मल्लिकार्जुन खड़गे, स्वामी प्रसाद मौर्य या चंद्रशेखर यादव - सब विपक्ष के नए प्रयोग का हिस्सा हैं।
केरल-बंगाल उपचुनावों में विपक्षी गठबंधन आपस में लड़ रहा। MP-छत्तीसगढ़ में केजरीवाल ने दौरा किया। ममता बनर्जी सुर्ख़ियों में बने रहने की कोशिश में। नीतीश के मन का मलाल बार-बार बाहर आ रहा।
सत्ता में रहते हुए गुलाम नबी आजाद ने भी तुष्टिकरण के उस एजेंडे को पूरी तरह लागू किया जिसकी कॉन्ग्रेस जनक रही है। उनकी 'उपलब्धियाँ' भी मुस्लिमों के राजनीतिक ठेकेदार जैसी ही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 1947 से पहले की पीढ़ी को राष्ट्र के लिए बलिदान देने का मौका मिला था, हमारी पीढ़ी को राष्ट्र के निर्माण में लगने और जीने का मौका मिला है।