सामाजिक मुद्दे

राम मंदिर भूमिपूजन के बाद पहली स्वतंत्रता दिवस के मायने, क्योंकि अयोध्या से आगे मथुरा-काशी भी है…

एक तरफ है करीब 1000 साल से चल रहा छल, प्रपंच और जोर। दूसरी तरफ है हिंदुओं का वह नैतिक बल, जिसका पहला पड़ाव सोमनाथ का पुनरुद्धार था। वह भारतीय चेतना, जिसकी अप्रतिम ऊर्जा अयोध्या है। वह सनातनी संस्कृति, जिसका प्रकाश पुंज मथुरा-काशी है।

आत्मनिर्भरता की रीति में बनी नई शिक्षा नीति

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में कहीं भी इस बात का बिल्कुल ही जिक्र नहीं है कि अंग्रेजी को एकदम हटाया जाए। इस नीति में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जो भी विदेशी भाषा है, उसको विदेशी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा।

राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले बाबर की मानस संतान

5 अगस्त की घटना को सीमित, संकुचित राजनीतिक और धार्मिक नजरिए से देखने वाले फिर एक मूलभूत गलती कर रहे हैं। वे इस समाज और उसमें व्याप्त चेतना को समझ ही नहीं पा रहे।

उनके प्रपंच का गुंबद था अयोध्या, ढह गया, पर राम मंदिर के उत्साह में मथुरा-काशी का दर्द न दबे

आज भले अयोध्या पर उनके प्रपंच का गुम्बद ढह गया है। लेकिन बाबरी मस्जिद बनाने के बाद से करीब 500 साल का इतिहास जोर, छल और प्रपंच का ही गवाह रहा।

सदियों से ईद की मुबारकबाद लेने वाले क्या श्रीराम मंदिर के जश्न में आपके साथ हैं?

आज खुद को श्रीराम से अलग बताने का समय नहीं। आत्मविश्लेषण करते हुए पूछने का समय है कि आज आपकी ख़ुशी में आपके कितने मुस्लिम और सेक्युलर मित्र आपके साथ खुश हैं?

काबुल की अँधेरी कब्र में बाबर और उजाले में आज की अयोध्या: राम हमारे DNA में और हमारी गर्भनाल अयोध्या में

1528 का साल हजारों वर्ष पुरानी अयोध्या पर भीषण वज्रपात का साल है। मंदिर मटियामेट कर दिए गए और आश्रम उजाड़ दिए गए। बारूद की गंध...

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: अजीत भारती का विश्लेषण | Ajeet Bharti on NEP 2020

IIT से लेकर डीयू तक में अलग-अलग समस्याएँ हैं। बच्चे स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर शिक्षा ग्रहण करते हुए भी केवल रट्टा मारकर उत्तीर्ण होना चाहते हैं।

एक नारे से क्या होता है? ‘राम लला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे’ भी एक नारा ही था…

कई लोग अगस्त में ही दीपावली मानाने की तैयारी में भी दिखते हैं। वैसे इससे हमें दूसरा वाला नारा - काशी-मथुरा बाकी है, याद आ जाता है, मगर उससे दीयों के बजाए कुछ और ही जलने लगेगा! नहीं?

जब हुआ मंदिरों का ध्वंस, तब किस दोजख में था सौहार्द? – यह ‘हिंदू’ बनने का वक्त, ‘सेकुलर’ नौटंकी से बचो

क्या UP और केंद्र में BJP की सरकार न होती, तब भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह सब इतना ही आसान होता? 'अच्छा हिंदू' कहेगा कि क्यों नहीं?

राम मंदिर की नींव में मुस्लिम ईंट क्यों रखेगा: अजीत भारती का सवाल | Ajeet Bharti on Faiz Khan Ram Mandir issue

एक हिन्दू मंदिर की नींव में समुदाय विशेष का व्यक्ति ईंट क्यों रखेगा? इसके पीछे तर्क क्या है? आखिर वो करना क्या चाहते हैं? इसके पीछे एजेंडा क्या है?

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