कमलनाथ सरकार पर मौजूदा संकट की बड़ी वजह माने जा रहे दिग्विजय सिंह ने बागी विधायकों से मुलाकात को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश जारी करने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।
आपने विधायकों के इस्तीफे पर अभी तक फैसला क्यों नहीं लिया? आप संतुष्ट नहीं हैं, तो विधायकों के इस्तीफे को अस्वीकार कर सकते हैं? बजट सत्र टाल दिया, बजट पास नहीं करेंगे, तो राज्य सरकार का कामकाज कैसे चलेगा? ये कुछ सवाल हैं जो शीर्ष अदालत ने मप्र विधानसभा के स्पीकर से पूछे हैं।
उद्धव ठाकरे ने बीते दिनों एल्गार परिषद की जाँच NIA को सौंपने को मँजूरी दी थी। पवार ने उद्धव के फैसले की कड़ी आलोचना की थी। अब उनको समन जारी होने के बाद महाराष्ट्र सरकार के मतभेद और गहराने के कयास लगाए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश को पुराना गौरव वापस दिलाने के लिए हमारी सरकार कृति संकल्पित है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से शेष दो वर्ष में उत्तर प्रदेश प्रगति के नए आयाम लिखेगा।
"कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव के चलते दिहाड़ी मजदूर भाई-बहनों को परिवार के भरण-पोषण में समस्या न हो, इस हेतु एक तय धनराशि मजदूर भाई-बहनों के बैंक खाते में प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में वित्तमंत्री की अध्यक्षता में गठित समिति 3 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी।"
राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात बंगाल की सरकार विकास परियोजनाओं को लेकर भी उदासीन है। राज्य में 1974 में 110 किमी लंबी एक रेल परियोजना शुरू हुई। आप जानकर हैरत में रह जाएँगे कि 46 साल में यह परियोजना महज 42 किमी ही पूरी हो पाई है।
बेंगलुरु में विधायकों ने दावा किया कि 20 और MLA उनके साथ हैं, लेकिन उन्हें कैद में रखा गया है। यदि वे भी बागी विधायकों के साथ होते, तो कॉन्ग्रेस स्पष्ट रूप से टूट जाती और इस पर कोई भी कानून लागू नहीं हो सकता था।
बंगाल से छपने वाला अखबार होने के बावजूद ममता के शासन में यह पेपर भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या, हर जिले में हो रहे मजहबी दंगों और तमाम अपराधों से जलते बंगाल पर चुप्पी साध लेता है। ऐसे तमाम मौकों पर इनकी बुद्धि घास चरने चली जाती है और बेहूदे हेडलाइन सुझाने वाले एडिटरों की रीढ़ की हड्डी गायब हो जाती है। इनका सारा ज्ञान हेडलाइन में अपनी जातिवादी घृणा, हिन्दुओं से धार्मिक घृणा आदि में ही बहता रहता है।
काफ़ी विचार विमर्श किया गया। संविधान विशेषज्ञों की राय ली गई। संविधान का विशेष सत्र बुलाया गया। फिर संविधान के अधिनियम 16 में प्रावधान बनाया गया। इतना सब कुछ क्यों? क्योंकि इंदिरा के चहेते हिदायतुल्लाह (तब के CJI) को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया जाए।
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से रिटायर होने के बाद बहरुल इस्लाम फिर से सक्रिय राजनीति में चले आए। लेकिन इंदिरा गाँधी की सोच कुछ और थी। 9 महीने के रिटायरमेंट के बाद वह सुप्रीम कोर्ट के जज बनाए गए। एक रिटायर जज का इस तरह फिर से जज बनाने का फैसला काफी अजीब और अद्वितीय था लेकिन...