Friday, December 4, 2020
Home विचार मीडिया हलचल टेलीग्राफ है? बकवास ही करेगा: हिन्दू-घृणा से बजबजाते अखबार ने दलितों को वायरस कहा

टेलीग्राफ है? बकवास ही करेगा: हिन्दू-घृणा से बजबजाते अखबार ने दलितों को वायरस कहा

द टेलीग्राफ के घटिया हेडलाइन ट्विटर पर शेयर होने के साथ ही लोगों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। लोगों ने लिखा कि लिबरलों को दलित से इतनी घृणा है कि राष्ट्रपति की तुलना वायरस से कर सकते हैं तो फिर दलितों के लिए इनकी सोच क्या होगी। एक ने लिखा कि सिर्फ लिबरल ही राष्ट्रपति की तुलना घातक वायरस से कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामित किया गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामित किया है। चीफ जस्टिस के रूप में अपने करीब साढ़े 13 महीने के कार्यकाल में रंजन गोगोई ने कई एतिहासिक फैसले सुनाए। इसमें अयोध्या राम जन्मभूमि का भी फैसला भी शामिल था। उन्होंने असम एनआरसी, राफेल, सीजेआई ऑफिस को आरटीआई के दायरे में शामिल करने जैसे ऐतिहासिक फैसले भी सुनाए। गोगोई पिछले साल 17 नवंबर 2019 को सीजेआई के पद से रिटायर हुए थे। 

उनके राज्यसभा के लिए नामित होने पर लिबरल गैंग और कॉन्ग्रेस द्वारा विवादों में घसीटना तो तय ही था, क्योंकि अयोध्या पर उनके फैसलों ने लिबरल गैंग के कलेजे में आग लगाने का काम किया था। हिंदू विरोधी मानसिकता वाले लिबरल इनके खिलाफ मुँह फाड़ने का मौका ढूँढ रहे थे और अब उन्हें यह मौका मिल गया है। अब जब हिंदू विरोधी मानसिकता का प्रदर्शन करना है तो भला टेलीग्राफ कैसे पीछे रहता, जो हमेशा ही अपनी हिन्दुओं से धार्मिक घृणा वाली छवि को प्रदर्शित करता रहता है। ये चर्चा में ही तभी आते हैं, जब इनकी कोई घटिया हेडलाइन ट्विटर पर शेयर करता है। अब तो ऐसा है कि यही इनका यूएसपी बन चुका है कि टेलीग्राफ है, बकवास ही करेगा।

द टेलीग्राफ की हेडलाइन

रंजन गोगोई मामले में भी द टेलीग्राफ ने एक बार फिर से ऐसा ही बकवास करने का काम किया है। हालाँकि, इस बार तो इस अखबार ने सारी मर्यादा और गरिमा को ताक पर रख दिया है। इनकी दलितों के प्रति नफरत की पराकाष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने देश के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ही वायरस कह दिया। अब आप समझ सकते हैं जो तथाकथित मीडिया संस्थान राष्ट्रपति की तुलना वायरस से कर सकता है, उनके मन में दलितों के लिए कितनी नफरत भरी होगी। राष्ट्रपति जैसी कुर्सी, जो राजनीति से हमेशा दूर रखी जाती है, उस पर इस तरह की घृणित और जातिवादी टिप्पणी बहुत ही निचले दर्जे की सोच और पत्रकारिता का परिचायक है।

वैसे ये इनका एक दिन का काम नहीं है। ये वर्षों से हिंदू-घृणा से बजबजाते रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि यह अखबार बंगाल से छपता है, मगर बंगाल से छपने वाला अखबार होने के बावजूद ममता के शासन में यह पेपर भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या, हर जिले में हो रहे मजहबी दंगों और तमाम अपराधों से जलते बंगाल पर चुप्पी साध लेता है। ऐसे तमाम मौकों पर इनकी बुद्धि घास चरने चली जाती है और बेहूदे हेडलाइन सुझाने वाले एडिटरों की रीढ़ की हड्डी गायब हो जाती है। पश्चिम बंगाल सरकार के तलवे चाटने वाले इस अखबार की विशेषता ही ‘शब्दों से खेलने’ भर की रही है। इनका सारा ज्ञान हेडलाइन में अपनी जातिवादी घृणा, हिन्दुओं से धार्मिक घृणा आदि में ही बहता रहता है। 

मुँह फाड़ने वाले इन लिबरलों और तथाकथित मीडिया संस्थानों को यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि रंजन गोगोई को भाजपा या फिर किसी अन्य पार्टी ने राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया बल्कि राष्ट्रपति की तरफ से नामित किया गया है। राज्यसभा में 12 सदस्य राष्ट्रपति की ओर से मनोनीत किए जाते हैं। ये सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों की जानी मानी हस्तियाँ होती हैं और कई अभूतपूर्व फैसला देने वाले रंजन गोगोई पूर्वोत्तर से सर्वोच्च न्यायिक पद पर पहुँचने वाले इकलौते शख्स हैं।

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट में लिखा गया

वैसे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस रंजन गोगोई को राज्य सभा के लिए चुने जाने से जिन-जिन तथाकथित निष्पक्ष कॉन्ग्रेसी लोगों की जली है, वो अगर एक बार इतिहास में दर्ज कॉन्ग्रेस के अजीब और अद्वितीय कारनामों को देख लें तो शायद उन्हें भी पता चल जाएगा कि रंजन गोगोई से पहले भी भारत के एक और मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य न्यायाधीश राज्य सभा की शोभा बढा चुके हैं। अंतर सिर्फ इतना है कि गोगोई जहाँ नामित सदस्य के तौर पर राज्यसभा के सदस्य बने हैं, वहीं पहले वाले दोनों जज कॉन्ग्रेस पार्टी के टिकट पर राज्यसभा पहुँचे थे।

हम यहाँ बात कर रहे हैं हाई कोर्ट के पूर्व मुख्‍य जज और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बहरुल इस्लाम एवं पूर्व सीजेआई रंगनाथ मिश्रा की। रंजन गोगोई को मनोनीत किए जाने पर विपक्ष ने हाय-तौबा मचाया और हिंदू विरोधी द टेलीग्राफ ने भी अपनी रिपोर्ट में लिखा कि भारतीय इतिहास में इससे पहले कभी भी रिटायर होने के कुछ महीने बाद पूर्व CJI को उच्च सदन में नामांकित नहीं किया गया था। अगर इन्होंने इतिहास को पलटने की जहमत उठाई होती तो इन्हें पाता होता कि ये पहली बार नहीं है। साल 1988 में कॉन्ग्रेस शासनकाल में एक अन्य पूर्व सीजेआई रंगनाथ मिश्रा को राज्यसभा सांसद बनाया जा चुका है।

मगर द टेलीग्राफ इसके बारे में नहीं बताएगा, क्योंकि ये कॉन्ग्रेस के शासनकाल में हुआ था न और अभी बीजेपी शासनकाल में हो रहा है और वो भी अयोध्या मामले पर फैसला सुनाने वाले पूर्व सीजेआई के साथ, तो मुँह तो फाड़ेंगे ही न। इंदिरा गाँधी ने बहरुल इस्लाम को हाई कोर्ट के मुख्य जज के रूप में रिटायर होने के 9 महीने बाद फिर से उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया। बहरुल इस्लाम को कॉन्ग्रेस ने तीन बार राज्यसभा भेजा। उन्हें कॉन्ग्रेसियों के खिलाफ मुकदमों में कानून और न्याय की ऐसी की तैसी करके बचाने में महारत हासिल थी। सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उन्होंने बिहार के उस समय के कॉन्ग्रेस सीएम जगन्नाथ मिश्रा के खि‍लाफ जालसाजी और आपराधिक कदाचार के मामले में क्लीन चिट देते हुए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने से मना कर दिया था।

वैसे देखा जाए तो कॉन्ग्रेस की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को उनके हितों की रक्षा करने पर पुरष्कृत करने की परंपरा रही है और इसका अनुपालन राजीव गाँधी ने भी किया। पूर्व चीफ जस्टिस रंगनाथ मिश्रा को 1984 में हुए सिखों के नरसंहार की जाँच का काम सौंपा गया था, जिसमें उन्होंने दंगों के लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया था। उन्हें अपनी जाँच में सिवाय पुलिस की लापरवाही के किसी भी कॉन्ग्रेसी का हाथ नहीं दिखा था। इसका परिणाम यह हुआ कि उन्हें बाद में पुरस्कृत कर 1988 में राज्यसभा का सदस्य बनाया। आज जो कॉन्ग्रेस आक्रोशित और हताश होकर हाय-तौबा मचा रही है, वो इसलिए कि आज के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कॉन्ग्रेस के 10 जनपथ से सोनिया गाँधी के इशारों को समझना बंद कर दिया है। साथ ही इनके अंदर यह डर भी बैठ गया है कि उनके पुराने पापों पर सुप्रीम कोर्ट के आगामी निर्णय कहीं उनको भारत की राजनीति से विलुप्त न कर दें।  

द टेलीग्राफ के घटिया हेडलाइन ट्विटर पर शेयर होने के साथ ही लोगों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। लोगों ने लिखा कि लिबरलों को दलित से इतनी घृणा है कि राष्ट्रपति की तुलना वायरस से कर सकते हैं तो फिर दलितों के लिए इनकी सोच क्या होगी। एक ने लिखा कि सिर्फ लिबरल ही राष्ट्रपति की तुलना घातक वायरस से कर सकते हैं। प्रभात यादव नाम के एक अन्य यूजर ने लिखा, “वैसे नाम की मारने में हमलोग भी सिद्धहस्त हैं, लेकिन वामी छुछुन्दरों को छुछुन्दर ही रहने देना प्रकृति के साथ न्याय होगा।”

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हैदराबाद में ओवैसी पस्त, TRS को तगड़ा नुकसान: 4 साल में 12 गुना बढ़ी बीजेपी की सीटें, ट्रेंड में ‘भाग्यनगर’; कॉन्ग्रेस 2 पर सिमटी

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन चौंकाने वाला रहा है। AIMIM को बीजेपी ने तीसरे नंबर पर धकेल दिया है।

‘हर शुक्रवार पोर्क खाने को करते हैं मजबूर’: उइगरों के इलाकों को ‘सूअर का हब’ बना रहा है चीन

प्रताड़ना शिविर में रह चुकी उइगर महिलाओं ने दावा किया है कि चीन पोर्क खाने को मजबूर करता है। इनकार करने पर प्रताड़ित करता है।

‘इंदिरा सरकार के कारण देश छोड़ना पड़ा, पति ने दम तोड़ दिया’: आपातकाल के जख्म लेकर 94 साल की विधवा पहुँचीं सुप्रीम कोर्ट

आजाद भारत के इतिहास में आपातकाल का काला दौर आज भी लोगों की स्मृतियों से धुँधला नहीं हुआ है। यही वजह है कि 94 साल की विधवा वीरा सरीन 45 साल बाद इंसाफ माँगने सुप्रीम कोर्ट पहुँची हैं।

टेरर फंडिंग वाले विदेशी संगठनों से AIUDF के अजमल फाउंडेशन को मिले करोड़ों, असम में कॉन्ग्रेस की है साथी

LRO ने तुर्की, फिलिस्तीन और ब्रिटेन के उन इस्लामी आतंकी समूहों के नाम का खुलासा किया है, जिनसे अजमल फाउंडेशन को फंड मिला है।

हिजाब वाली पहली मॉडल का इस्लाम पर करियर कुर्बान, कहा- डेनिम पहनने के बाद खूब रोई; नमाज भी कई बार छोड़ी

23 वर्ष की हिजाब वाली मॉडल हलीमा अदन ने इस्लाम के लिए फैशन इंडस्ट्री को अलविदा कहने का फैसला किया है।

राहुल गाँधी की क्षमता पर शरद पवार ने फिर उठाए सवाल, कहा- उनमें निरंतरता की कमी, पर ओबामा को नहीं कहना चाहिए था

शरद पवार ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनमें 'निरंतरता' की कमी लगती है।

प्रचलित ख़बरें

‘ओ चमचे चल, तू जिनकी चाट के काम लेता है, मैं उनकी रोज बजाती हूँ’: कंगना और दिलजीत दोसांझ में ट्विटर पर छिड़ी जंग

कंगना ने दिलजीत को पालतू कहा, जिस पर दिलजीत ने कंगना से पूछा कि अगर काम करने से पालतू बनते हैं तो मालिकों की लिस्ट बहुत लंबी हो जाएगी।

जब नक्सलियों की ‘क्रांति के मार्ग’ में डिल्डो अपनी जगह बनाने लगता है तब हथियारों के साथ वाइब्रेटर भी पकड़ा जाता है

एक संघी ने कहा, "डिल्डो मिलने का मतलब वामपंथी न तो क्रांति कर पा रहे न वामपंथनों को संतुष्ट। कामपंथियों के बजाय रबर-यंत्र चुनने पर वामपंथनों को सलाम!"

एक ही परिवार के 3 भाइयों का शव बरामद, आँखें निकली हुईं: हत्या का आरोप लगा परिजनों ने मिर्जापुर में किया चक्का जाम

पुलिस अधीक्षक का कहना है कि लेहड़िया बंधी के पानी में तीन लड़कों का शव बरामद हुआ है। हत्या की आशंका जताई गई है, पोस्टमॉर्टम के लिए...

‘गुजराती कसम खा कर पलट जाते हैं, औरंगजेब की तरह BJP नेताओं की कब्रों पर थूकेंगे लोग’: क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता की धमकी

जब उनसे पूछा गया कि इस 'किसान आंदोलन' में इंदिरा गाँधी की हत्या को याद कराते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी गई है, तो उन्होंने कहा कि जिसने जो बोया है, वो वही काटेगा।

‘स्टैचू ऑफ यूनिटी या ताजमहल?’ – स्टैचू ऑफ लिबर्टी से भी ज्यादा पर्यटकों के आँकड़े चिढ़ा रहे ध्रुव राठी को

यूट्यूब की जनता को एंगेज रखना है, खुद को वामपंथी ब्रिगेड की यूथ विंग का मुखिया साबित करना है तो यह सब करना ही पड़ेगा। सरकार को गाली...

15274 मौतें, एंडरसन, शहरयार… सुषमा स्वराज ने जब राहुल गाँधी से कहा- अपनी ममा से पूछें डैडी ने…

सन् 1984। ऑपरेशन ब्लू स्टार का साल। इंदिरा गॉंधी की हत्या का साल। सिखों के नरसंहार का साल। सबसे प्रचंड बहुमत से...

किसान संगठनों का 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान, दिल्ली के सड़कों को ब्लॉक करने की धमकी भी दी

प्रदर्शन कर रहे किसान समूह ने ऐलान किया है कि वे 5 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी का पुतला फूँकेंगे, 7 दिसंबर को अवॉर्ड वापसी और 8 दिसंबर को भारत बंद करेंगे।

हैदराबाद में ओवैसी पस्त, TRS को तगड़ा नुकसान: 4 साल में 12 गुना बढ़ी बीजेपी की सीटें, ट्रेंड में ‘भाग्यनगर’; कॉन्ग्रेस 2 पर सिमटी

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन चौंकाने वाला रहा है। AIMIM को बीजेपी ने तीसरे नंबर पर धकेल दिया है।

TV पर कंडोम और ‘लव ड्रग्स’ के विज्ञापन पॉर्न फिल्मों जैसे: मद्रास HC ने अश्लील एड को प्रसारित करने से किया मना

टीवी चैनलों पर अश्लील और आपत्तिजनक विज्ञापन दिखाने के मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश पास किया है।

‘हर शुक्रवार पोर्क खाने को करते हैं मजबूर’: उइगरों के इलाकों को ‘सूअर का हब’ बना रहा है चीन

प्रताड़ना शिविर में रह चुकी उइगर महिलाओं ने दावा किया है कि चीन पोर्क खाने को मजबूर करता है। इनकार करने पर प्रताड़ित करता है।

फ्रांस में ED ने विजय माल्या की 1.6 मिलियन यूरो की संपत्ति जब्त की, किंगफिशर के अकाउंट से भेजा था पैसा

ED ने भगोड़े विजय माल्या के ख़िलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए फ्रांस में उसकी 1.6 मिलियन यूरो की प्रॉपर्टी जब्त की है।

‘तारक मेहता…’ के राइटर ने की आत्‍महत्‍या: परिवार ने कहा- उन्हें ब्लैकमेल कर रहे थे, हमें दे रहे हैं धमकी

'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के लेखक अभिषेक मकवाना ने आत्महत्या कर ली है। शव कांदि‍वली स्‍थ‍ित उनके फ्लैट से 27 नवंबर को मिला।

‘हमने MP और शाजापुर को शाहीन बाग बना दिया’: जमानत देते हुए अनवर से हाईकोर्ट ने कहा- जाकर काउंसलिंग करवाओ

सीएए-एनआरसी को लेकर भड़काऊ मैसेज भेजने वाले अनवर को बेल देते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने काउंसलिंग का आदेश दिया है।

भारत ने कनाडा के उच्चायुक्त को किया तलब, ‘किसानों के प्रदर्शन’ पर जस्टिन ट्रूडो ने की थी बयानबाजी

कनाडा के उच्चायुक्त को तलब कर भारत ने जस्टिन ट्रूडो और वहाँ के अन्य नेताओं की टिप्पणी को देश के आंतरिक मामलों में "अस्वीकार्य हस्तक्षेप" के समान बताया है।

‘इंदिरा सरकार के कारण देश छोड़ना पड़ा, पति ने दम तोड़ दिया’: आपातकाल के जख्म लेकर 94 साल की विधवा पहुँचीं सुप्रीम कोर्ट

आजाद भारत के इतिहास में आपातकाल का काला दौर आज भी लोगों की स्मृतियों से धुँधला नहीं हुआ है। यही वजह है कि 94 साल की विधवा वीरा सरीन 45 साल बाद इंसाफ माँगने सुप्रीम कोर्ट पहुँची हैं।

‘विरोध-प्रदर्शन से कोरोना भयावह होने का खतरा’: दिल्ली बॉर्डर से प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

कोविड 19 महामारी के ख़तरे का हवाला देते हुए दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की सीमा के नज़दीक से किसानों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,535FollowersFollow
359,000SubscribersSubscribe