सोशल मीडिया में अटकलों का बाजार फिर गरम हो गया है। सूजे गाल के साथ एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में केजरीवाल पहुॅंचे। उन्होंने इसकी वजह इंफेक्शन बताया। लेकिन, यूजर्स इसे अमानतुल्लाह से जोड़ रहे हैं।
"केजरीवाल को अचानक शाहीन बाग में बिरयानी खिलाने के बाद अब उनको याद आ गया कि मैं हिन्दू हूँ। हनुमान जी को अब ये बुड़बक नहीं बना सकते, हनुमान चालीसा पढ़ें या पेड़ पर उल्टा लटक जाएँ ये चुनाव वो हार रहे हैं।"
"केजरीवाल ने कहा था कि वो इनकम टैक्स की नौकरी छोड़ कर आए हैं, ये कर दूँगा, वो कर दूँगा- और मैं उन चक्करों में फँस गया। पहले कहते थे कि उप-राज्यपाल उनकी छाती पर दाल रगड़ रहे थे। अब वो दाल कहाँ चली गई?"
“जब मैं SDPI के नाम का उल्लेख करता हूँ तो विपक्ष क्यों उत्तेजित हो रहा है? क्या वे कह रहे हैं कि मुझे SDPI और उग्रवाद के बारे में बात नहीं करनी चाहिए?” SDPI एक चरमपंथी इस्लामी राजनीतिक संगठन है, जो केरल और देश के अन्य कई हिस्सों में कई सांप्रदायिक हमलों के पीछे है।
सीएए विरोध के दौरान दिल्ली में हिंसा भड़काने के पीछे केजरीवाल की पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान का नाम आया था। जहाँ एक तरह ये ख़बर सुर्खियाँ बन रही हैं, दूसरी तरफ केजरीवाल हनुमान चालीसा का पाठ कर के हिन्दू वोटरों को रिझाने में लगे हैं।
"केजरीवाल मासूम चेहरा बनाकर दिल्ली की जनता से बार-बार पूछ रहे हैं कि क्या मैं आतंकवादी हूँ। हाँ, आप आतंकवादी हो, इसके बहुत सबूत हैं। आपने खुद कहा था कि मैं अराजकतावादी हूँ। अराजकतावादी और आतंकवादी में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता।"
"यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि सोचा-समझा प्रयोग है। ये राष्ट्र की सौहार्दता को खंडित करने का एक कुत्सित प्रयास है। संविधान और तिरंगे को सामने रखते हुए ज्ञान बॉंटा जा रहा है और असली साजिश से ध्यान हटाया जा रहा है।"
उद्धव के अनुसार उन्होंने पिता से किया वादा पूरा करने के लिए कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाई है। इसके लिए उन्होंने किसी भी हद तक जाने का फैसला किया था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे।
"अरविन्द केजरीवाल इस बात से नाराज़ चल रहे थे कि करोड़ों रुपए फूँकने के बाद भी आप को शाहीन बाग़ प्रदर्शन का कोई फायदा नहीं मिल रहा है। आक्रोशित केजरीवाल ने जब नाराजगी जाहिर की तो अमानतुल्लाह मारपीट पर उतर आए।"
"मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मैं इतने बड़े कद के व्यक्ति का चमचा हूँ।' उन्होंने आगे यह भी कहा था कि मैं राजनीति छोड़ दूँगा, मगर ज्योतिरादित्य सिंधिया को नहीं छोड़ूँगा।"- कमलनाथ के मंत्री ने माना कि उनकी सरकार ने पिछले एक साल में उद्योग-धंधे के लिए कुछ नहीं किया है।