BJP नेता आकाश का दावा है कि आजम खान रामपुर के लोगों को झूठी कहानी सुनाते हैं। उन पर आपातकाल के दौरान आंदोलन में भाग लेने की वजह से कार्रवाई नहीं हुई थी। बल्कि उनके अमर्यादित आचरण के कारण उन्हें AMU से निष्कासित कर दिया गया था।
हिन्दू संगठनों ने कहा, "जो परिवार अपनी जन्मभूमि वापस नहीं जाना चाहते, उनकी संपत्ति का सरकार इस्तेमाल करे और ऐसे सभी परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। यह सब सरकार का दायित्व है।"
अनुच्छेद-370 हटाने के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार आज देश को संबोधित कर रहे हैं। PM मोदी इस संबोधन में जम्मू-कश्मीर को लेकर उठाए गए कदमों के बारे में राष्ट्र को संदेश दे रहे हैं।
कमलनाथ ने अम्बानी से आग्रह किया कि वह राज्य में नई-नई तकनीकों में निवेश करें। कमलनाथ ने कृषि क्षेत्र के विकास के लिए भी रिलायंस को भागीदार बनने का आग्रह किया। मुकेश अम्बानी के अलावा कमलनाथ अन्य उद्योगपतियों से भी मुलाक़ात करेंगे।
संसद में उन्होंने कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बताया था, लेकिन अब मीडिया के सामने वह इसे भारत का आंतरिक मुद्दा बता रहे हैं (जो कि सही है और भारत का स्टैंड भी है)। आख़िर अधीर रंजन को ये समझने में इतने दिन क्यों लग गए?
पीएम मोदी ने इससे पहले 27 मार्च को देश को सम्बोधित किया था। तब उन्होंने बताया था कि अंतरिक्ष में सक्रिय सैटेलाइट को मार गिरा कर भारत यह क्षमता हासिल करने वाले देशों में शुमार हो गया है।
"मजहब से बड़े अपने पूर्वज होते हैं इसलिए मुसलमानों को खड़ा होकर समर्थन करना चाहिए। हमारे और मुसलमानों के डीएनए एक हैं, ये मक्का-मदीना से नहीं आए। पूर्वज हमारे एक है, राम हैं, कृष्ण हैं, शिव हैं।"
जम्मू कश्मीर के 100 से अधिक नेता व अलगाववादी पहले से ही नजरबन्द किए जा चुके हैं ताकि जनता को भड़काने की कोई भी कोशिश सफल न हो सके। आशंका जताई गई है कि गुलाम नबी आजाद के पहुँचने के बाद विपक्षी नेता जनता को उकसा सकते हैं।
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री आजाद का यह मानना है कि एनएसए डोभाल से बातचीत करने के लिए कश्मीरियों को रुपए दिए गए। ट्विटर पर लोगों ने आजाद से पूछा की क्या कश्मीरी जनता बिकाऊ है? लोगों ने इसे न सिर्फ़ डोभाल बल्कि कश्मीर के लोगों का भी अपमान बताया।
कर्ण सिंह ने कहा, लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने वाला निर्णय स्वागत योग्य है। अनुच्छेद 370 के कारण महिलाओं से जो भेदभाव किया जा रहा था, उसे ठीक करना ज़रूरी था। डॉक्टर सिंह ने लिखा कि 1965 में जब वे जम्मू कश्मीर के सदर-ए-रियासत थे, उन्होंने तभी राज्य के पुनर्गठन का प्रस्ताव दिया था।