पहले दिन सांसदों ने जम कर 'भारत माता की जय' के नारे लगाए और जब आसनसोल से चुने गए बाबुल सुप्रियों ने शपथ लिया, तब सदन में 'जय श्री राम' के नारे गूँजे। अभी तक विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस ने सदन में अपने नेता के नाम की घोषणा नहीं की है।
शिक्षकों की माँग है कि उनका वेतन बढ़ाया जाए क्योंकि उन्हें काफ़ी कम रूपए मिल रहे हैं। पुलिस ने जब शिक्षकों को मयूख भवन द्वीप पर जाने से रोक दिया, तब शिक्षकों ने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस ने जब उन्हें रोका तो दोनों में भिड़ंत हो गई।
हिमाचल प्रदेश से आने वाले जगत प्रकाश नड्डा को भारतीय जनता पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। पिछली मोदी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे नड्डा को जब हालिया गठित मंत्रिमंडल में कोई जगह नहीं दी गई थी, तभी से यह अंदेशा लगाया जा रहा था कि उन्हें कोई बड़ी ज़िम्मेदारी मिलने वाली है।
ममता बनर्जी ने सरकारी अस्पतालों में शिकायत निवारण सेल का निर्माण करने के डॉक्टरों के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। ममता ने पश्चिम बंगाल के हर अस्पताल में नोडल पुलिस ऑफिसर तैनात करने का निर्देश दिया है।
जब पुलिस अधिकारी ने कॉन्ग्रेसी नेता सनी राजपाल को रोक कर कुछ पूछना चाहा तो उन्होंने भड़कते हुए कहा कि वो पार्टी के स्पोक पर्सन (प्रवक्ता) हैं। इतना कहते-कहते वो पुलिस से हाथापाई करने लगे और ज़बरदस्ती अंदर चले गए।
टीएमसी विधायक सुनील सिंह ने कहा, “पश्चिम बंगाल की जनता सबका साथ सबका विकास चाहती है। दिल्ली में मोदी जी की सरकार है और हम चाहते हैं कि यही सरकार प्रदेश में भी बने। ताकि हम पश्चिम बंगाल का विकास कर सकें।”
नियमों का हवाला देते हुए भाजपा सांसद को भोजपुरी में शपथ लेने की अनुमति नहीं दी गई। पहले बार सांसद बने नकुल नाथ को संसद तक छोड़ने ख़ुद उनके पिता कमलनाथ पहुँचे। संसद सत्र के पहले दिन और क्या-क्या हुआ, जानिए यहाँ।
इससे पहले उन्होंने 14 जून को ज़िला कलेक्टर तरुण कुमार पिथोड़े को पत्र लिखकर रविवार (16 जून) को दोपहर में 2.11 मिनट पर जल समाधि की अनुमति माँगी थी। इसकी अनुमति न देते हुए भोपाल कलेक्टर ने उनकी सुरक्षा करने को कहा, जिससे बाबा की जानमाल को कोई हानि न पहुँच सके।
संजय सिंह ने ट्वीट किया कि एक पत्रकार मित्र ने उन्हें सूचित किया है कि एम्स में डॉक्टर नकली पट्टियों के साथ विरोध कर रहे हैं, और कहा कि यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से दूर रहना चाहिए क्योंकि इस तरह की फ़ोटो से यह भ्रम फैलने का डर है कि पूरे देश में डॉक्टर्स को पीटा जा रहा है।
आज बिहार लाचार है। बिहार के ग़रीब परिवारों के सामने उनके बच्चों की जानें जा रही हैं और सरकारें हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं। आज बिहार के इन ग़रीबों की सुनने वाला कोई नहीं है। अस्पताल के अधिकारी भी इन्हें फटकार रहे हैं। 93 मौतों वाली भयंकर त्रासदी।