"भारत और पाकिस्तान के साथ बिगड़ते रिश्तों के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज़िम्मेदार हैं और जब तक भारत में मोदी की सरकार रहेगी, तब तक भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट सिरीज़ होना असंभव सी बात है।"
"आज बम बाँध कर फटने वाले ज्यादातर आतंकी आखिर और किस मजहब को मानने वाले हैं? अगर इन में से ज्यादातर मुस्लिम ही हैं तो क्यों नहीं इनकी प्रोफाइलिंग की जाए?"
"मैं वादा करता हूँ कि लिबर्टी और इंडिगो अब जीवन में कभी क्रूरता का सामना नहीं करेंगे, यहाँ तक कि किसी कसाई का हाथ तक उन्हें नहीं छू पाएगा। दोनों की देखरेख एक फार्म में की जाएगी। वो जैसे-जैसे बड़े होंगे, हमें याद आता रहेगा कि कुछ दोस्तियाँ अचानक से कहीं भी हो जाती हैं।"
झा लियू के ट्वीट पर चीन से ही जुड़े एक ट्विटर यूज़र ने चीन की सरकार पर कटाक्ष करते हुए लिखा- "हाँ हम जानते हैं कि यह बस एक गंभीर सर्दी-जुकाम मात्र है और हम इससे डरे हुए नहीं हैं। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि फिर भी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने लगभग हर इंसान को घर में कैद कर रखा है
जर्मनी में समुदाय विशेष को लेकर विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। फ्रांस ने विदेशी इमामों को देश में नहीं आने देने का फरमान सुनाया है। ऐसा आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए किया गया है।
आरोपित ने पुलिस को बताया कि उसने बीवी के प्राइवेट मैसेज में उसकी न्यूड तस्वीरें देखी थी। यह तस्वीर किसी और शख्स के साथ शेयर की गई थी और उसका रिप्लाई भी आया था। इससे उसका शक और गहरा गया।
इस्लामिक आतंकवाद के कारण बीते साल बुर्किना फासो और उससे सटे नाइजर तथा माली में करीब 4000 लोगों की मौत हुई थी। करीब 600,000 लोग मजबूर होकर अपना ही घर छोड़कर भाग चुके हैं।
इस विश्वविद्यालय का प्रारम्भिक बजट 5 मिलियन डॉलर का है, जो प्राचीन भारतीय पद्धति पर शोधों को भी बढ़ावा देगी। एचआर नरेंद्र को यूनिवर्सिटी का चेयरमैन और श्री श्रीनाथ को प्रेसीडेंट बनाया गया है।
पाकिस्तान में बीते कुछ महीनों में करीब 50 हिंदू और सिख लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। 'पाकिस्तानी हिंदूज यूथ फोरम' और 'सिंधी हिंदू स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान' नामक फेसबुक पेज के जरिए यह जानकारी दी गई है।
“उन सभी पाकिस्तानी आवेदकों के वीजा आवेदनों को स्वीकार किया जाता है, जिनमें हिंदू समुदाय के लोग अपने परिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार करने के लिए हरिद्वार जाना चाहते हैं। मगर इसके लिए आवेदक को उस व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाना होगा, जिसकी अस्थियों को विसर्जित किया जाना है।”