इमरान ख़ान सऊदी क्राउन प्रिंस के स्पेशल प्लेन से अमेरिका पहुँचे। फिर भी इमरान ख़ान के लिए रेड कार्पेट नहीं बिछा। वहीं पीएम मोदी के लिए यह तो बिछा ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी उनके सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
बलूच, सिंधी, पश्तो, जो कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समूह हैं, दशकों से पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के हाथों उत्पीड़न का दंश झेल रहे हैं और अब पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मदद माँग रहे हैं। इन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान उनके समुदायों के ख़िलाफ़ मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन कर रहा है।
नमृता के भाई विशाल ने बताया, "यह आत्महत्या नहीं है। आत्महत्या के निशान अलग होते हैं। मुझे उसकी गर्दन के चारों ओर केबल के निशान मिले। उसके हाथ पर भी निशान थे। उसकी दोस्तों ने बताया था कि उसने नमृता के गले पर दुपट्टा बँधा हुआ देखा था।"
कैलिफोर्निया के कमिश्नर अविंदर चावला ने कहा कि मोदी सरकार ने सिखों के कल्याण के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं। खास तौर पर करतापुर कॉरिडोर खोले जाने को लेकर भारत सरकार के प्रयासों के लिए प्रवासी सिखों ने प्रसन्नता व्यक्त की और उनका शुक्रिया अदा किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (सितंबर 21, 2019) को ह्यूस्टन पहुँचे। वे आज यहाँ हाउडी मोदी कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शिरकत करेंगे। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम में 50,000 लोग हिस्सा लेंगे।
इन “Coalition partners” की खोजबीन में सबसे पहला कनेक्शन जो निकल कर सामने आता है, वह है दुनिया के सबसे क्रूर, जिहादी, मानवाधिकार के भक्षक देशों में से एक पाकिस्तान का है। कुछ मामलों में तो यह कनेक्शन भी भी सेना की गोद में बैठे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI से सीधा-सीधा निकलता है।
अमेरिका से शरण मॉंगने वाली इस्माइल फिलहाल अपनी बहन के घर ब्रुकलीन में रह रहीं हैं। उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि पाकिस्तानी अधिकारियों से बचकर वह अमेरिका आने में कैसे सफल हुईं। केवल इतना बताया है कि वो हवाई जहाज से अमेरिका नहीं पहुँचीं।
पाकिस्तान के संसदीय कार्य राज्य मंत्री अली मोहम्मद खान को फैसला वापस लिया जाना नागवार गुजरा है। उन्होंने ट्वीट कर स्कूल की बच्चियों के लिए बुर्का को अनिवार्य करने के फैसले को अच्छा कदम और इस्लाम तथा मदीना के उसूलों के हिसाब से बताया था।
"वे क्या करना चाहते हैं, यह उनकी इच्छा है। हमने उन्हें आतंक को मुख्यधारा बनाते देखा है। अब वे नफ़रत की भाषा को मुख्यधारा में इस्तेमाल करना चाहते हैं। यह उनकी इच्छा है, अगर वे यही करना चाहते हैं। ज़हरीले शब्द अधिक समय तक नहीं चलते।"