1981 का एक ऐसा समय था, जब जेएनयू को 46 दिनों के लिए बंद किया गया था। आज फ़र्ज़ी 'स्टिंग ऑपरेशन' कर के वामपंथियों को बचाने वाले 'इंडिया टुडे' ने तब JNU को वामपंथी अराजकता का गढ़ बताया था, जहाँ छात्र फालतू वाद-विवाद में लगे रहते हैं। पत्रिका ने कहा था कि जेएनयू केवल रुपए डकारता है।
मामला शोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर से जुड़ा है। राजदीप ने एक IPS पर सनसनीखेज आरोप लगाए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई। प्रेस की स्वतंत्रता की दुहाई दी। राहत नहीं मिली तो माफी माँग जान बचाई।
"#JNU कवरेज से जुड़ी एक क्लिप में दिख रही पुरानी तारीख के संबंध में स्पष्ट करना चाहते हैं कि कैमरे की सेटिंग्स अपडेटेड नहीं थीं। इससे जो ग़लतफहमी पैदा हुई है, उसके लिए हमें खेद है।"
'दी लल्लनटॉप' के संपादक हैं सौरभ द्विवेदी। कंडोम से बहुत प्यार करते हैं। खुद के बजाय दूसरों को भी इसका महत्व बताते चलते हैं लेकिन अपमानित करने लिए... उन्होंने कहा कि भाजपा वालों को बच्चा पैदा नहीं करना चाहिए। अगर इनके भाजपाई पिताजी ने स्वयं इनकी सलाह मान ली होती तो... पढ़िए, मम्मी कसम मारक मजा मिलेगा।
अभिनव प्रकाश नाम के यूजर के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने व्यंगात्मक लहजे में कहा कि ऐसा लगता है न्यूयॉर्क टाइम्स में ही सबसे ज्यादा भक्त हैं। जो हर जगह राम को ढूँढ लेते हैं।
बीबीसी की रिपोर्ट्स में हिंदू बनाम मुस्लिम ध्यान रखते हुए एकतरफा पत्रकारिता का फर्क़ पहली बार नहीं झलक रहा। बल्कि यदि बीबीसी की वेबसाइट पर जाकर सर्च बॉक्स में इन दोनों (घूँघट और बुर्का ) शब्दों को टाइप किया जाए तो इनके इस पूरे अजेंडे का खुलासा होता है।
मीना ने 7 जुलाई, 2018 को गुरुग्राम पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज करवाया था। इसमें कहा गया था कि पीटर ने अपनी शादी के बारे में उससे झूठ बोला था और फिर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। मीना ने आरोप लगाया कि पीटर ने शादी का वादा करके उसके साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाए थे।
कन्हैया को 22% वोट मिले, इसीलिए वो सूची में हैं। वो 34% वोट से हारे, ये क्यों छिपाया गया? फोर्ब्स की सूची में 8 भारतीयों में से 5 ऐसे हैं, जो पीएम मोदी के आलोचक हैं। इस सूची को किस आधार पर तैयार किया गया है, फोर्ब्स ने नहीं बताया। जो भी मोदी के ख़िलाफ़ बोले, ब्रांडिंग कर दो।
न्यूज़लांड्री ने जिस डॉक्टर के बयान के आधार पर दावा किया कि एबीवीपी वालों के चोट फ़र्ज़ी हैं, वो 'रावण' का डॉक्टर निकला। वो कॉन्ग्रेस का पदाधिकारी भी है। मोदी-शाह के ख़िलाफ़ ज़हर उगलता रहता है। उसके बयान को 'मेडिकल एक्सपर्ट' का बयान बना कर पेश किया गया।
NDTV अब भले ही वामपंथियों को ख़ुश करने के लिए भाजपा व एबीवीपी को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए 1000 लेख लिखे, डैमेज हो चुका है। वो कहते हैं न, सच छिपाए नहीं छिपता। शायद एनडीटीवी पर यही कहावत फिट बैठती है। वामपंथी 'अपने' ही चैनल से निराश हैं।