"मुझे एक ही बात पता चल रही है और वो ये कि तुम अभी सिर्फ़ अपने कैमरे के सामने कंट्रोवर्सी चाहते हो। ऐसा मत करो। ये हमारे देश का सवाल है। ये सिर्फ़ 'माइनॉरिटी प्रॉसिक्यूशन' नहीं बल्कि 'रिलीजियस माइनॉरिटी प्रॉसिक्यूशन' के लिए है।"
द क्विंट के चार पत्रकारों को रामनाथ गोयनका अवॉर्ड दिया गया। जिसमें से एक यौन शोषण का आरोपित है, तो दूसरी के खिलाफ सेना के एक जवान को आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए आरोप लगा था।
“पत्रकारिता एक कठिन दौर से गुजर रही है। फर्जी खबरें नए खतरे के रूप में सामने आई हैं, जिसका प्रसार करने वाले खुद को पत्रकार के रूप में पेश कर इस महान पेशे को कलंकित करते हैं।”
तनवीर जैसे अन्य कई 'बुद्धिजीवियों' ने सरेआम सड़कों पर उनके पोस्टर जलाए, उनके ख़िलाफ़ नारे लगाए गए, उनके मरने-मारने तक की बातें हुईं। लेकिन किसी ने भी एक बार नरेंद्र मोदी सरकार के उन कार्यों पर नजर नहीं डाली। जिसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ने सिर्फ़ अल्पसंख्यक समुदाय को समाज में ऊपर उठाने के लिए किया।
सबा नक़वी ने एक टीवी डिबेट के दौरान अपने चिरपरिचित अंदाज में हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला। न केवल कश्मीरी पंडितों के घाटी में लौटने को लेकर एतराज जताया बल्कि जम्मू-कश्मीर पर भारत के अधिकार को लेकर भी सवाल उठाए।
पाकिस्तान द्वारा जारी वीडियो में आगे कहा गया है- "भारत में ब्राह्मण हिंदुओं के इतिहास को देखते हुए, 'CJ पोस्ट' राणा अयूब की जान की सुरक्षा को लेकर आशंकित है।" ब्राह्मण और हिन्दुओं से घृणा, पाकिस्तान और उसकी राणा अयूब जैसी बहनों के लिए कोई नया विषय नहीं है।
फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने दी क्विंट के इस प्रोपेगैंडा को ध्वस्त करते हुए वेबसाइट को चैलेंज भी किया था कि वह साबित करें कि यह एक फेक और सोची समझी घृणा फैलाने के मकसद से जारी किया गया स्क्रिप्टेड वीडियो नहीं है या फिर इसे डिलीट कर दें।
अग्निहोत्री ने बताया कि 'द क्विंट' ने इस पूरे ड्रामे की साज़िश पहले ही रच ली थी। अर्थात, एक स्क्रिप्ट तैयार कर के एक जूनियर आर्टिस्ट को कैब ड्राइवर बनाकर NRC के नाम पर उससे अभिनय करवाया गया और दर्शकों को इसे सच बता कर परोस दिया गया। ये सब कुछ एक ड्रामा है।
आज हम आपके सामने इंडिया टुडे की पत्रकारिता की पोल खोलने के लिए उनकी 5 ऐसी खबरें लेकर आए हैं। जब इस समूह ने अपने पाठक और दर्शक को सूचना देने के नाम पर या तो मजाक उड़ाया या फिर फेक न्यूज़ और व्यंग्य को खबर बताया।
नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन को लेकर प्रोग्राम किया गया और उसमें स्कूल के छात्रों को ले जाया गया तो NDTV के पत्रकार सोहित राकेश मिश्रा ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूल में छात्रों को नागरिकता कानून के बारे में बताना राजनीति है, क्योंकि इसे अभी तक बड़े लोग नहीं समझ सके हैं।