खालिस्तानी संगठन ने इन कार्यकर्ताओं के समर्थन में एक वेबसाइट बनाई है। उसका मानना है कि इन कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह का चार्ज लगाकर इनसे इनका प्रोटेस्ट का अधिकार छीना गया है।
रानी गाइदिन्ल्यू जिस हेराका आन्दोलन को चलाती रही, वो मुख्यतः अपनी सभ्यता-संस्कृति बचाने के लिए ही था। उन्हें बैप्टिस्ट ईसाइयों का हिंसक विरोध झेलना पड़ा।