23 फ़रवरी की शाम दंगाई शाहदरा में घुसे। दिलबर सिंह नेगी को निशाना बनाया। हाथ, पैर काट दिए। फिर पास की दुकान में लगी आग में झोंक दिया। इसके बाद वहॉं भगदड़ मच गई। नेगी के परिजन इतने दहशत में हैं कि अब भी मौके पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।
26 फरवरी को रवीश कुमार ने जिस तरह से तथ्यों को प्राइम टाइम में पेश किया वह इस बात का सबूत है कि मेनस्ट्रीम मीडिया दंगाई के मुस्लिम होने पर न केवल उसका नाम छिपाता है, बल्कि उसे क्लीनचिट भी देता है।
'यूथ अगेंस्ट जिहादी हिंसा' शाम 5 बजे मार्च निकालेगी। मार्च जंतर-मंतर के पास स्थित केरल हाउस से शुरू होकर अशोका रोड स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगी। 'यूथ अगेंस्ट जिहादी हिंसा' ने AISA, PFI को बैन करने की भी माँग की है।
कुछ विडियो सामने आए थे जिसमें दंगाई ताहिर के छत से पत्थरबाजी करते और पेट्रोल बम फेंकते दिखे थे। अब उसके घर की छत से पत्थरों और पेट्रोल बम का जखीरा मिला है। आरोप है कि आईबी कॉन्स्टेबल की हत्या उसके घर से निकली भीड़ ने ही की थी।
सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने 12 फरवरी को जस्टिस मुरलीधर के स्थानांतरण की सिफारिश की थी। ऐसा रूटीन प्रक्रिया के तहत किया गया। जस्टिस मुरलीधर के अलावा दो और जजों के तबादले के आदेश जारी किए गए हैं। इनमें से एक मुंबई हाईकोर्ट से तो दूसरे कर्नाटक हाईकोर्ट से संबद्ध हैं।
"मुस्लिम लोग जो सीएए-एनआरसी का विरोध कर रहे हैं, लोगों को मार रहे हैं, ये बहुत गलत कर रहे हैं। इन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। इन्होंने कई घरों का नाश कर दिया। इसमें एक घर हमारा भी बर्बाद हो गया।"
दंगों में हुई मौत में अब तक मिली जानकारी के अनुसार सात हिन्दू हैं जबकि कुछ के नाम और पहचान अभी सार्वजनिक होने बाकी हैं। जिन 5 लोगों के बारे में अभी पता नहीं चला है कि उनके नाम क्या हैं, वो हिन्दू भी हो सकते हैं और दूसरे मजहब के भी।
दिल्ली जब जल रही थी, तब मीडिया का एक वर्ग क्या कर रहा था? कोई दिल्ली पुलिस को गाली दे रहा था तो कोई कपिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहरा रहा था। जान भी गँवाए दिल्ली पुलिस और गाली भी वही सुने? जिस उपद्रव में गाँधी को फासिस्ट बताया गया, उसे गांधीवादी कैसे साबित किया जा सकता है?