"मजहब से बड़े अपने पूर्वज होते हैं इसलिए मुसलमानों को खड़ा होकर समर्थन करना चाहिए। हमारे और मुसलमानों के डीएनए एक हैं, ये मक्का-मदीना से नहीं आए। पूर्वज हमारे एक है, राम हैं, कृष्ण हैं, शिव हैं।"
जम्मू कश्मीर के 100 से अधिक नेता व अलगाववादी पहले से ही नजरबन्द किए जा चुके हैं ताकि जनता को भड़काने की कोई भी कोशिश सफल न हो सके। आशंका जताई गई है कि गुलाम नबी आजाद के पहुँचने के बाद विपक्षी नेता जनता को उकसा सकते हैं।
वीना ने अपने ट्विटर पर सुषमा स्वराज के लिए न केवल अभद्र टिप्पणी है बल्कि इस बात का भी सबूत दिया है कि वो भारत और उसके राजनेताओं के बारे में कैसी सोच रखती है। उसने सुषमा स्वराज के जाने के बाद R.I.H लिखा और साथ में एक आग वाली ईमोजी भी लगाई।
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री आजाद का यह मानना है कि एनएसए डोभाल से बातचीत करने के लिए कश्मीरियों को रुपए दिए गए। ट्विटर पर लोगों ने आजाद से पूछा की क्या कश्मीरी जनता बिकाऊ है? लोगों ने इसे न सिर्फ़ डोभाल बल्कि कश्मीर के लोगों का भी अपमान बताया।
कर्ण सिंह ने कहा, लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने वाला निर्णय स्वागत योग्य है। अनुच्छेद 370 के कारण महिलाओं से जो भेदभाव किया जा रहा था, उसे ठीक करना ज़रूरी था। डॉक्टर सिंह ने लिखा कि 1965 में जब वे जम्मू कश्मीर के सदर-ए-रियासत थे, उन्होंने तभी राज्य के पुनर्गठन का प्रस्ताव दिया था।
जस्टिस रमना ने अधिवक्ता शर्मा को इन त्रुटियों को दूर करने को कहा और बताया कि इस मसले को उचित समयावधि के भीतर लिस्ट किया जाएगा। कॉन्ग्रेस नेता तहसीन पूनावाला ने भी कश्मीर में कर्फ्यू हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि सेवर थाना की पुलिस महिला को उठा कर ले गई थी, जहाँ उसे प्रताड़ित किया गया और गालियाँ दी गईं। महिला को पुलिस द्वारा आए दिन धमकियाँ दी जा रही थीं। इन सबसे तंग आकर दलित महिला ने यह क़दम उठाया।
गृहमंत्री शाह ने विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में घुसपैठ की समस्या का समाधान खोजने के मद्देनजर सीमा पार के लोगों से इस विषय पर भारत की चिंता को साझा किया है। जिसके बाद दोनों देशों के गृह मंत्रियों ने सीमा पार अपराधों के खतरे को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इमरान, खालिद और अनवर ने बर्थडे पार्टी को अनुच्छेद 370 से जुड़ा जश्न समझ कर धमकी दी। उसमें कहा कि यहाँ कोई जश्न नहीं होगा। इमरान ने धमकी दी कि यह कश्मीर नहीं पिड़ावा है और यहाँ जश्न नहीं चलेगा।
भारत ने अनुच्छेद-370 के अहम प्रावधानों को निरस्त कर दिया। इसका असर न सिर्फ़ भारत में बल्कि सीमा पार पाकिस्तान में भी देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान इस निर्णय से बौखलाया हुआ है और भारत का आंतरिक मसला होने के बावजूद इसमें टाँग अड़ाने को आतुर है। आर्थिक महासंकट से जूझ रहे पाकिस्तान के संसद में ही सिर फुटव्वल देखने को मिला।