मिशन शक्ति वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती धाक का एक वसीयतनामा है। नरेंद्र मोदी ने पिछले पाँच वर्षों के दौरान जिन कूटनीतिक रिश्तों को मजबूती दी है, वे सभी सरकार को परीक्षण करने का विश्वास दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए होंगे।
आपने अक्सर सुना होगा कि फलाँ कम्पनी चाँद पर ज़मीन बेच रही है या फलाँ उद्योगपति ने वहाँ ज़मीं ख़रीदी। यह सब आउटर स्पेस ट्रीटी की अस्पष्टता के कारण होता है। हालाँकि, ये संधि बाह्य अंतरिक्ष में अस्त्र-शस्त्र की तैनाती को रोकती है।
केजरीवाल उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के रोहिणी में एक जनसभा में कहा, "मुझसे लोग पूछते हैं कि अगर शीला जी ऐसे (बिना पूर्ण राज्य के दर्जे के) सरकार चला सकतीं हैं, तो आप क्यों नहीं?’
2012 में DRDO के प्रमुख वीके सारस्वत थे। एक दिन उन्होंने देश को चौंका दिया, यह घोषणा करके कि भारत के पास Low Earth Orbit और Polar Orbit में परिक्रमा करने वाले सैटेलाइट को निष्क्रिय करने लायक ऐंटी सैटलाइट वेपन की सारी तकनीक और उसे बनाने के लिए सारे कल-पूर्जे मौजूद हैं।
भारत ने अंतरिक्ष में आज एक और कामयाबी का परचम लहराया है और मिशन शक्ति की सफलता के साथ अमेरिका, चीन, रूस के बाद भारत दुनिया का चौथा सबसे शक्तिशाली देश बन गया है।
3 में सें 2 विधायकों ने विधायी शाखा का विलय किया है। इसका अर्थ यह हुआ कि वे दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में आने से बच गए हैं। क्योंकि इस कानून के तहत यह अनिवार्य है कि विलय के लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमति हो।
हमारे वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर दूर LEO (Low Earth Orbit) में एक लाइव सैटेलाइट को मार गिराया है। ये लाइव सैटेसाइट जो कि एक पूर्व निर्धारित लक्ष्य था, उसे एंटी सैटेलाइट मिसाइल (A-SAT) द्वारा मार गिराया गया है।
"भारत ने अपना नाम अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में दर्ज करा लिया है। अब तक अमेरिका, रूस और चीन को ही यह उपलब्धि हासिल है। भारत चौथा देश है जिसने आज यह सिद्धि प्राप्त की है।"