एक हिंदू लड़की को उसके मुस्लिम बॉयफ्रेंड द्वारा बर्बर तरीके से मार दिया जाता है और तुम्हें मजाक सूझ रही है। अगर यह उल्टा होता तो फेविकॉल पी के शांत बैठी रहती। मौत पर व्यंग्य करके इंसान गिरने की सीमा से भी परे होकर गिर जाता है।
“भले ही सरकार तुम्हारी है, लेकिन हुकूमत हमारा चलता है। हमारी वजह से तुम्हारा हिंदुस्तान बसा हुआ है। तुम कितना भी कुछ कर लो, पलड़ा हम मुस्लिमों का ही भारी है और अगर हम अपने पर आ गए, तो तुम्हारे घर के बच्चों को भी नहीं छोड़ेंगे।”
हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा फैलाने की धमकी देने वाले और संविधान से पहले कुरान को मानने वाले विवादास्पद अभिनेता अजाज़ खान का एक और आपत्तिजनक वीडियो सामने आया है। एजाज़ खान की TikTok प्रोफाइल पर शेयर किए गए इस वीडियो में वह मुंबई पुलिस का मज़ाक उड़ाते नज़र आते हैं।
AIB ने यह साबित कर दिया है कि यह कुछ ऐसे लोगों का समूह है, जिनके पास रचनात्मकता के नाम पर ना ही पहले कुछ विशेष था और ना ही अब। आज के इस एडिटेड वीडियो से AIB ने जता दिया है कि उनसे नैतिक मूल्यों की उम्मीद करना आज भी अतार्किक ही है।
इस वीडियो को देखकर कोई बच्चा भी बता सकता है कि यह वास्तविक घटना का वीडियो नहीं है,बल्कि ग्राफिक्स का खेल है, लेकिन अफसोस पाक के मंत्री खुर्रम इस बात को नहीं समझ पाए और हंसी के पात्र बन गए।
"मेरे टोपी वाले भाइयों, कब निकलेंगे टोपियाँ पहन-पहनकर सड़क पर। हम 2 दिन सड़क पर उतर आएँ तो हिन्दुस्तान पूरा बंद हो जाए। खाली निकलना है सड़क पर। चालीस करोड़ लोग हैं हम, वैध और अवैध मिलाकर... एक बार निकलना है खाली।"
पायल ने लिखा है कि शायद यही वजह है कि उनका परिवार उन्हें हिन्दुओं के बारे में बात करने से रोकता है। साथ ही, पायल रोहतगी ने मुंबई पुलिस पर पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाने का भी आरोप लगाते हुए लिखा कि इसी कारण से वो हिन्दू होने के नाते इस देश में असुरक्षित महसूस करती हैं।
“मीडिया का एक सेक्शन है जो दीमक की तरह हमारे देश में लगा है। ये जो दोगली मीडिया है, बिकाऊ मीडिया है, जो ख़ुद को लिबरल कहती है, सेकुलर कहती है और कुछ भी नहीं है दसवीं फेल है... ये लोग सूडो लिबरल हैं और ये लोग बिल्कुल भी सेकुलर नहीं हैं।”
सेमीफाइनल मैच में रविंद्र जडेजा की पारी काफी सराहनीय रही। इसके बाद संजय माँजरेकर ने एक ऐसा ट्वीट कर दिया जिससे सभी क्रिकेट प्रेमी भड़क गए और अपनी प्रतिक्रियाएँ देने लगे।
मीडिया संस्थानों ने भी गौ तस्करी के इस मामले को इस प्रकार पेश किया जैसे गायों को वाहनों के जरिए ले जाने वाले लोग 'निर्दोष पशु व्यापारी' थे, जिन्हें कुछ गौ रक्षकों ने पकड़कर प्रताड़ित किया।