ध्रुव राठी की इस घटिया हरकत पर ट्विटर यूज़र्स ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उसे जमकर लताड़ लगाई। साथ ही, ध्रुव राठी को यह याद दिलाया कि पेट्रोल पम्प पर काम करने वाले लोगों की भी इज्जत होती है और वो एलिटिज्म के नाम पर समाज को तोड़ने के षड्यंत्र भी नहीं रचते हैं।
वीडियो में हम देख सकते हैं कि इसमें जर्नलिस्ट इमरान खान सरकार की जमकर खिंचाई कर रहा था, वहाँ बैठे सत्ताधारी PTI के सीनियर नेता मसरूर अली सियाल से ये देखा नहीं गया और वरिष्ठ पत्रकार इम्तियाज़ खान की तुरंत धुनाई शुरू कर दी।
इस वीडियो में देखा जा सकता है कि दीपिका अपने पिता के साथ एयरपोर्ट के अंदर जा रही हैं। लेकिन जब दीपिका एयरपोर्ट के अंदर एंट्री कर रही थीं, तभी एक सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें रोक लिया और उन्हें आवाज लगाते हुए पूछा- 'आईडी-आईडी'।
इस ट्विटर हैंडल को संचालित करने वाले को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का विशेष सहायक बताया जा रहा है। यहाँ तक कि खुद पाकिस्तान मीडिया ही उस फोटो को सचिन तेंदुलकर की बता रही है इसी वजह से पाकिस्तान के लोग ही अब उन्हें ट्रोल करने लग गए हैं।
अभिनेता और नेता परेश रावल ने भी इसको लेकर ट्वीट किया है। परेश रावल ने ट्वीट में लिखा है, "हाँ, ये नया इंडिया है राहुल जी, जहाँ कुत्ते भी आपसे ज्यादा होशियार हैं।"
वायरल वीडियो के चलते ट्विटर पर इस समय सानिया मिर्जा और पाकिस्तानी एक्ट्रेस वीना मलिक एक-दूसरे को जवाब देने में लगी हुई हैं। यह बात तब शुरू हुई जब वीना मलिक ने सानिया मिर्जा, उनके पति शोएब और बेटे के साथ जंक फूड खाते हुए वायरल वीडियो पर कमेंट किया।
एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक पाकिस्तानी लड़की पूरी पाकिस्तानी टीम को एक साथ खड़े करके मार देने की बात कहती है। वो कहती है कि जिस तरह से हिटलर ने अपनी पूरी टीम को एक साथ खड़ा करके मार दिया था, उसी तरह पूरी पाकिस्तानी टीम को एक साथ खड़े करके मार देना चाहिए।
"मेरी माँ ने अपनी पहली शादी में बहुत दु:ख झेले। उन्हें कई बार शारीरिक हिंसाओं का सामना करना पड़ा और यह सब उन्होंने मेरे लिए सहा। पिटने के बाद जब उनके माथे से ख़ून टपकने लगता था, तो मैं अक्सर उनसे पूछता था कि वह इसे क्यों झेल रही है। वो जवाब में सिर्फ मेरा नाम लेती थीं।"
BBC की 'चुप्पी' का मतलब तो यही निकलता है कि मलबा मिलते ही वायुसेना के अधिकारियों को तुरंत अपने घर से निकलकर मोटरसाइकिल में किक मार के हादसे वाली जगह तक दौड़ जाना चाहिए था।
क्या हमारे पास इतना समय है कि ऐसे सड़कछाप पत्रकारों के ट्वीट पर उसके घर दो पुलिस वाले को भेज कर उठवा लिया जाए जबकि हर मिनट बलात्कार हो रहे हैं? क्या सरकारों की पुलिस या कोर्ट जैसी संस्थाओं को पास ऐसी बातों को लिए समय है जबकि करोड़ से अधिक गंभीर केस लंबित पड़े हैं?