आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘अपनापन’ पुस्तक का लोकार्पण करने जा रहे हैं, किताब में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक किस्सा लिखा है कि कैसे गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले महिला सशक्तिकरण के उस विजन को मध्य प्रदेश में उतारा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन: नरेंद्र मोदी के साथ मेरे अनुभव’ का लोकार्पण करेंगे। यह पुस्तक पीएम मोदी के साथ शिवराज सिंह चौहान के तीन दशक से अधिक लंबे सार्वजनिक और राजनीतिक अनुभवों का दस्तावेज है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व, नेतृत्व,
संगठन क्षमता, सुशासन और राष्ट्र-समर्पण से जुड़ी अनेक घटनाओं को साझा किया है।
पुस्तक के एक बेहद दिलचस्प अध्याय में शिवराज सिंह चौहान बताते हैं कि आज जिस प्रधानमंत्री मोदी को देश ‘नारी शक्ति’ के सबसे बड़े समर्थकों में गिनता है, महिलाओं और बेटियों के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कोई नई बात नहीं है। यह सोच उस दौर से चली आ रही है जब पीएम मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी सोच को सामाजिक आंदोलन का रूप देने में जुटे थे।
शिवराज लिखते हैं कि गुजरात में मोदी के नेतृत्व में चल रहे अभियानों को करीब से देखने का अवसर उन्हें तब मिला, जब मोदी मुख्यमंत्री थे। उस समय गुजरात में ‘कन्या केलवणी अभियान’ और बेटियों की शिक्षा को लेकर चल रहे जन-जागरण कार्यक्रमों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने देखा कि मोदी इस विषय को केवल सरकारी योजना नहीं मानते थे, बल्कि समाज के हर वर्ग, धार्मिक नेताओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को इसमें भागीदार बनाते थे।
शिवराज के अनुसार, मोदी का संदेश सीधा लेकिन प्रभावशाली था- “अपनी बेटियों की रक्षा करो, उन्हें शिक्षित करो और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर दो।” यही वह विचार था जिसने धीरे-धीरे सरकारी कार्यक्रम का रूप छोड़कर सामाजिक चेतना का स्वरूप ग्रहण कर लिया।
शिवराज बताते हैं कि उन्होंने गुजरात में स्वयं देखा कि किस तरह गाँव-गाँव जाकर बेटियों के स्कूल में दाखिले को उत्सव बनाया जाता था। सरकारी अधिकारी, मंत्री और जनप्रतिनिधि भीषण गर्मी में दूर-दराज़ के गाँवों तक पहुँचते थे और अभिभावकों को अपनी बेटियों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करते थे। मोदी स्वयं भी इन अभियानों में भाग लेते थे। यही मॉडल बाद में शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश में अपनाने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश में ‘बेटी बचाओ अभियान’ शुरू किया। इसके तहत राज्यभर में यात्राएँ निकाली गईं। सामाजिक कार्यकर्ताओं, संतों, स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को साथ लेकर गाँव-गाँव जागरूकता अभियान चलाया गया। रास्ते में बेटियों का सम्मान किया जाता, उनके माथे पर तिलक लगाया जाता और लोगों को समझाया जाता कि बेटी बोझ नहीं, परिवार और समाज की शक्ति है।
शिवराज लिखते हैं कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल बेटियों को स्कूल भेजना नहीं था। असली चुनौती यह सुनिश्चित करना था कि वे शिक्षा पूरी करें, आत्मनिर्भर बनें और सम्मानजनक जीवन जी सकें। इसी सोच से प्रेरित होकर मध्य प्रदेश में ‘लाडली लक्ष्मी योजना’ शुरू की गई। इस योजना के तहत बेटियों के नाम से निवेश किया जाता था, शिक्षा के विभिन्न चरणों में आर्थिक सहायता दी जाती थी और बाल विवाह को हतोत्साहित किया जाता था।
पुस्तक में शिवराज सिंह चौहान एक भावुक प्रसंग का भी उल्लेख करते हैं। एक सामूहिक विवाह समारोह में एक बुज़ुर्ग महिला ने उनसे कहा था कि समाज में लोग अक्सर कहते हैं, “बेटी को आने दो, फिर उसकी शादी के लिए पैसे कहाँ से आएँगे?” यह बात शिवराज को भीतर तक छू गई। तभी उन्होंने तय किया कि बेटियों के जन्म को आर्थिक चिंता नहीं, उत्सव का विषय बनाया जाना चाहिए।
यही सोच आगे चलकर ‘स्वागतम लक्ष्मी’, ‘मुख्यमंत्री कन्यादान योजना’, छात्रवृत्ति योजनाओं, साइकिल वितरण कार्यक्रम और बाद में मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी पहलों तक पहुँची। पुस्तक में दावा किया गया है कि इन प्रयासों का असर केवल सरकारी आँकड़ों में नहीं दिखा, बल्कि समाज की मानसिकता में भी दिखाई दिया। मध्य प्रदेश का लिंगानुपात 2001 में 919 से बढ़कर 2021 में 970 तक पहुँच गया और बेटियों के जन्म को लेकर सामाजिक स्वीकार्यता में उल्लेखनीय सुधार आया।
शिवराज सिंह चौहान का निष्कर्ष स्पष्ट है कि पीएम नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने महिला और बालिका कल्याण को सिर्फ सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे सामाजिक आंदोलन का रूप दिया। गुजरात में जिस विचार का बीजारोपण हुआ, उसी को मध्य प्रदेश में अपने तरीके से आगे बढ़ाकर उन्होंने जन-अभियान बनाया। और आज जब देश ‘नारी शक्ति’ को विकास के केंद्र में रखकर आगे बढ़ रहा है, तो उसकी जड़ें उस दौर तक जाती हैं जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और शिवराज उनके उस विजन को करीब से देख रहे थे।


