Homeदेश-समाजCAA विरोधी मेधा पाटेकर को शरणार्थियों ने खदेड़ कर भगाया, कहा- हिम्मत है तो...

CAA विरोधी मेधा पाटेकर को शरणार्थियों ने खदेड़ कर भगाया, कहा- हिम्मत है तो Pak में रह कर दिखाओ

यहाँ तक कि वहाँ उपस्थित एक बच्चे ने भी मेधा पाटेकर की बात नहीं सुनी और उन्हें ज़ोर से फटकारा। पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए शरणार्थियों के बीच मोदी सरकार के इस क़ानून को लेकर ख़ुशी का माहौल है क्योंकि.....

नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर पाकिस्तान से भारत आए पीड़ित शरणार्थियों में ख़ुशी की लहर है। इस क़ानून से उन सभी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलने का राह प्रशस्त हो गया, जिन्हें अल्पसंख्यक होने की वजह से तीनों पड़ोसी इस्लामिक देशों अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके तहत ऐसे शरणार्थी आएँगे, जो दिसंबर 31, 2014 के पहले से भारत में रह रहे हैं। इस क़ानून को लेकर विपक्षी नेतागण पूरे देश में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली में कई मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है और उपद्रवियों व पुलिस के बीच कई जगह झड़प हुई है।

गुरुवार (दिसंबर 19, 2019) को वामपंथी नेताओं ने जगह-जगह निकल कर विरोध प्रदर्शन किया। कथित इतिहासकार रामचंद्र गुहा और ख़ुद को किसान नेता बताने वाले योगेंद्र यादव को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसी क्रम में पर्यावरण एक्टिविस्ट मेधा पाटेकर भी विरोध करने पहुँचीं, लेकिन पाक से आए हिन्दू शरणार्थियों ने उन्हें खदेड़ दिया। शरणार्थियों ने मेधा पाटेकर को खदेड़ते हुए कहा कि जो लोग सीएए का विरोध कर रहे हैं, वो पाकिस्तान में रह कर दिखाएँ। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में देखें:

यहाँ तक कि वहाँ उपस्थित एक बच्चे ने भी मेधा पाटेकर की बात नहीं सुनी और उन्हें ज़ोर से फटकारा। पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए शरणार्थियों के बीच मोदी सरकार के इस क़ानून को लेकर ख़ुशी का माहौल है क्योंकि उन्हें वही सारे अधिकार मिलने जा रहे हैं, जो एक आम भारतीय नागरिक को मिलता है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -