Saturday, December 10, 2022
Homeहास्य-व्यंग्य-कटाक्षअर्नब पर हमला न होकर रवीश पर होता तो नेशनल-इंटरनेशनल मीडिया में चलते ये...

अर्नब पर हमला न होकर रवीश पर होता तो नेशनल-इंटरनेशनल मीडिया में चलते ये 4 हेडलाइन

'हिन्दू-टेररिस्ट अटैक इंडियाज़् टॉप जर्नलिस्ट्' से लेकर 'जर्नलिस्ट्स आर बुचर्ड अंडर मोदीज़् हिन्दू-फासिस्ट रूल' जैसे हेडलाइन विदेशी वामपंथी मीडिया में चल चुका होता। फिर उसे 'द वायर' के थ्रू 'द टेलीग्राफ' तक पहुँचा कर, 'द प्रिंट' के माध्यम से लोगों को 'स्क्रॉल' करने को उकसाया जाता।

आज घर से दफ्तर अर्थात शयनकक्ष से अध्ययन कक्ष तक आते-आते एक गाँधी कीड़ा, एक वामपंथी मक्खी और एक जिहादी मच्छर पीछे पड़ गए। आपस में भिनभिनाने लगे और कहने लगे हमसे जो टकराएगा उसका हश्र अर्नब सा हो जाएगा।

मैंने उनसे संवाद करने की कोशिश कि चाहे कोई वामपंथी हो या दक्षिण पंथी, हैं तो सब पत्रकार ही। सबका पेशा तो एक ही है। आप नेहरू-ब्रांड के जिहादी-वाम हैं और बाकी आरएसएस-समर्थित आतंकवादी।

मेरी ये बात मानो उनको नस्तर की तरह चुभ गया हो। फिर क्या था तीनों पील पड़े मुझ पर! वामपंथी मक्खी भिनभिनाने लगी – तुम पत्रकार हो, तुम्हें इन सांप्रदायिक लोगों का पक्ष लेने का कोई हक़ नहीं। ये कहकर वो मुझे घर के एक कोने से दूसरे कोने तक खदेड़ने लगे।

गाँधी कीड़ा बिना खड्ग-ढाल की आज़ादी दिलाने का एहसान याद दिलाने लगा। जिहादी मच्छर बड़े ही चालाकी से संविधान और सेक्युलरिज़्म की महानता के कीर्तन से ब्रेनवाश करने में जुटा रहा।जब उन्हें लगा कि मैं ब्रेनवाश-इम्यून हो चूका हूँ तो उन्होंने अपना प्रॉपर-गन्दा मशीनरी का इस्तेमाल करना शुरू किया। फिर शुरू हुआ धमकियों का दौर- तुम अगर ऐसे ही खुलेआम हमारे खिलाफ बोलोगे तो तुम्हें कहीं नौकरी नहीं मिलेगी। तुम जानते नहीं हो हम कितने पावरफुल हैं, हम तुम्हारा करियर बर्बाद कर देंगे।

जब मैंने बड़ी विनम्रता से कहा कि साहब मैंने तो इसीलिए सालों पहले नौकरी ढूँढना बंद कर दिया था। अगर आप को रोज़ी रोटी चलाने के लिए नौकरी की आवश्यकता हो तो बताएँ! इस पर चिढ़कर तिलिस्मी-तिकड़ी ने मच्छर को मेरे ऊपर ‘लूला’ दिया।

मैं प्राण-रक्षार्थ कभी घर के इस कोने से उस कोने तक भागता रहा। मैं चाहता तो मच्छर को निमिषमात्र में मसल सकता था लेकिन उससे फासिस्ट कहलाने का खतरा और बढ़ जाता। रेप्यूटेशन रक्षार्थ, मैं सोसाइटी के गेट की ओर लपका, लेकिन ये डर लिए कि बाहर की दुनिया – जहाँ मच्छरों और वामों का बोलबाला है – मुझ को आक्रांता कहकर लाठी बरसाएगी।

हमारे पूर्वजों की सहिष्णुता एवं शांति-प्रियता को कायरता का जामा पहनाकर, हमें शोषित और प्रताड़ित कर हमें ही आक्रांता बताने का ये चलन अब ख़त्म होना चाहिए। और ख़त्म हो कर रहेगा। इस रक्त-पिपासु तिकड़ी को ये बात कब समझ आएगी कि इनके धृतराष्ट्र सी पक्षपात-पूर्ण दुर्नीति और दु:शासन-प्रेरित चरित्रहरण का चलन, एक आम व्यक्ति को भी जनता के नज़र में खास बना देता है।

राजनीति में इन्होंने ये गलती मोदी के साथ की और पत्रकारिता में अर्नब के साथ वही कर रहे हैं। मोदी आपकी दशकों से चले आ रहे प्रॉपर-गन्दा के दमपर आज देश का प्रधानसेवक बन बैठा है, और आप अर्नब को मीडिया का मोदी बनाए बिना मानेंगे नहीं।

सोसाइटी के गार्डन एरिया में बैठा मैं इन्हीं विचारों में खोया था उसी वक़्त न्यूटन जैसा एक ख़याली सेव सर पर आ गिरा – अच्छा अगर ये अटैक अर्नब पर न होकर रवीश पर होता तो क्या देश का चौथा स्तम्भ अब तक भरभराकर गिर नहीं गया होता? इंटरनेशनल मीडिया अब तक कलेजा-फाड़ चीख नहीं रहा होता?

वॉशिंगटन पोस्ट “जर्नलिस्ट्स आर बुचर्ड अंडर मोदीज़् हिन्दू-फासिस्ट रूल

न्यू यॉर्क टाइम्स “हिन्दू-टेररिस्ट अटैक इंडियाज़् टॉप जर्नलिस्ट्”

अल जज़ीरा: “मुस्लिम उम्मा मस्ट टेक इंडिया टू टास्क”

टीआरटी: “दिस इस द बिगिनिंग ऑफ़ मुस्लिम जेनोसाइड इन इंडिया”

और उसके बाद ये आर्टिकल ‘द वायर’ के थ्रू ‘द टेलीग्राफ’ तक पहुँचेगा, फिर ‘द प्रिंट’ के माध्यम से लोगों को ‘स्क्रॉल’ करने को उकसाएगा। कालांतर में उसको फिर ‘न्यूजलाउन्ड्री’ में धुला जाएगा और फिर ‘ऑल्टन्यूज़’ की मृगतृष्णा-मानिंद अग्निपरीक्षा के उपरांत ‘द हिन्दू’ में छप जाएगा।

अथ: श्री महाभारत कथा…

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Sanjay Pandey
Sanjay Pandey
A Small-Towner| Dreamer| Roving Reporter| Editor-Entrepreneur.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘वे अल्लाह को नहीं मानते, बुत पूजते हैं…हमें नफरत है उनसे’: पाकिस्तानी बच्चों ने उगला भारतीयों के लिए जहर, Video वायरल

सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पाकिस्तानी 'बच्चे' भारत से नफरत और हिंदू धर्म का अपमान करते नजर आ रहे हैं।

गुजरात में BJP की प्रचंड लहर के बीच AAP को मिला 13 प्रतिशत वोट: कौन हैं वो लोग जिन्होंने अरविंद केजरीवाल को तरजीह दी?...

गुजरात विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को पाँच सीटें मिलीं, लेकिन उसे 13 प्रतिशत वोट शेयर मिला है। आखिर ये लोग कौन है?

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
237,601FollowersFollow
417,000SubscribersSubscribe