Tuesday, July 16, 2024
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स्पेन से आया, कन्याकुमारी में परिवार से बिछड़ा, 5 साल बाद मिलन के लिए जोधपुर हुआ एयरलिफ्ट: सफर एक गिद्ध की, कहानी की हैप्पी एंडिंग अब भी शेष

सिनेरियस प्रजाति का यह गिद्ध 2017 में स्पेन से कन्याकुमारी आया था। जब गिद्धों का झुंड कन्याकुमारी पहुँचा तो साइक्लोन की वजह से यह गिद्ध उड़ नहीं पाया था।

यह कहानी है एक गिद्ध की। यह गिद्ध स्पेन से आता है। भारत के कन्याकुमारी में अपने परिवार से बिछड़ जाता है। 5 साल बाद अपनों से उसके मिलन की कवायद शुरू होती है। इसी क्रम में उसे गुरुवार (3 नवंबर 2022) को एयरलिफ्ट कर राजस्थान के जोधपुर लाया गया। यहाँ उसे माचिया सफारी पार्क में रखा जाएगा, ताकि उस तक अपने पहुँच सके। ​वैसे इस कहानी में मिलन वाली हैप्पी एंडिंग कब आएगी, यह किसी को नहीं पता।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिनेरियस प्रजाति का यह गिद्ध 2017 में स्पेन से कन्याकुमारी आया था। जब गिद्धों का झुंड कन्याकुमारी पहुँचा तो साइक्लोन की वजह से यह गिद्ध उड़ नहीं पाया था। इसके बाद इसे उदयगिरी पार्क में रखा गया। इसके रहने के लिए अनुकूल जगह की तलाशी की जा रही थी। जोधपुर इसके लिए बेहतर स्थान पाया गया। जोधपुर में सिनेरियस प्रजाति के कई गिद्ध सर्दियों में आते हैं। मुख्य वन्यजीव वार्डन श्रीनिवास रामचंद्र रेड्डी ने कहा कि गिद्ध को ‘केरू’ साइट में छोड़ने से पहले जैविक पार्क में कुछ हफ्ते के लिए एक बड़े में रखा जाएगा, जो जोधपुर शहर के बाहर है।

केरू साइट में अन्य सिनेरियस गिद्ध भी रहते हैं। यहाँ उन्हें आसानी से भोजन मिल जाता है। सिनेरियस गिद्ध मूल रूप से यूरोप के उत्तरी भाग और साइबेरियाई क्षेत्र से आते हैं। वे हिमालय के ऊपर उड़ते हैं और ईरान, पाकिस्तान और भारत के उत्तरी भागों में आते हैं। वे शायद ही कभी तमिलनाडु जाते हैं, लेकिन कुछ साल पहले उन्हें मोयार और कोठागिरी में देखा गया था। इन गिद्धों की प्रजातियाँ धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं।

तमिलनाडु के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव सुप्रिया साहू ने कहा, “यह एक बहुत ही खास ऑपरेशन है। 2017 में रेस्क्यू किए जाने के बाद करीब चार साल तक इस पक्षी को पिंजरे में रखा गया था, लेकिन पिछले साल इसे फिर से बाहर निकालने के प्रयास किए गए। लंबी दूरी तक उड़ने वाले पक्षी को पिंजरे में रखने का कोई मतलब नहीं है। उम्मीद है कि ओखी नाम के गिद्ध को एक नया परिवार मिल जाए।”

विशेषज्ञों के मुताबिक, गिद्ध को उड़ान भरने के लिए हीट वेव की जरूरत होती है। साउथ का इलाका ठंडा होने की वजह से वहाँ गर्म हवाओं का असर न के बराबर होता है। ऐसे में गिद्ध उड़ान नहीं भर पा रहा था।

बता दें कि गिद्ध को एयरलिफ्ट करने के लिए स्पेशल पिंजरा बनाया गया था। इस गिद्ध के साथ तमिलनाडु फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम भी जोधपुर आई है। माचिया के वेटरनिरी डॉक्टर ज्ञान प्रकाश ने बताया कि यह टीम शुक्रवार (4 नवंबर 2022) को जोधपुर के पास केरू में बने डंपिग यार्ड का सर्वे करेगी। पता लगाया जाएगा कि इस प्रजाति के गिद्ध यहाँ आ रहे हैं या नहीं। यदि 25 से 30 गिद्ध इस प्रजाति के मिलेंगे तो इसे भी यहाँ छोड़ा जाएगा, नहीं तो इसके लिए दूसरी जगह देखा जाएगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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