Thursday, October 1, 2020
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पुलिस व डॉक्टरों से बदसलूकी की 25 ख़बरें: जब समुदाय विशेष ने कोरोना वारियर्स को भी नहीं बख्शा

कोरोना वायरस आपदा के बीच देश भर में समुदाय विशेष के लोगों और जमातियों ने डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों पर हमले के साथ-साथ कई ऐसी हरकतें की, जिनसे महामारी और ज्यादा फैली और इसे नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। यहाँ हम आपके समक्ष ऐसी ही हिंसक व अन्य घृणित करतूतों का एक ब्यौरा प्रस्तुत कर रहे हैं।

कोरोना वायरस आपदा के बीच देश भर में समुदाय विशेष के लोगों और जमातियों ने डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों पर हमले के साथ-साथ कई ऐसी हरकतें की, जिनसे महामारी और ज्यादा फैली और इसे नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। इससे पहले हमने पिछले 1 महीने की 30 ऐसी ख़बरों का ब्यौरा दिया था, जिसमें जमातियों ने इसी तरह की घृणित हरकतें की। अब हम आपके समक्ष समुदाय विशेष द्वारा की गई हिंसक व अन्य घृणित करतूतों का ब्यौरा प्रस्तुत कर रहे हैं।

कोरोना वायरस: जब समुदाय विशेष ने फैलाई हिंसा और घृणा

1 अप्रैल: तेलंगाना के गवर्नमेंट गाँधी अस्पताल के एक मरीज ने डॉक्टरों पर अचानक से हमला बोल दिया। उसका बड़ा भाई भी उसी हॉस्पिटल में भर्ती था, जिसकी मौत की ख़बर सुनते ही उसने उग्र होकर हमला बोल दिया। दोनों भाई दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ मस्जिद से लौटे थे। डॉक्टरों ने कहा था कि इस विकट परिस्थिति में जब मेडिकल कर्मचारी आगे बढ़ कर काम कर रहे हैं, उन्हें ऐसे लोगों के हमले भी झेलने पड़ रहे हैं।

1 अप्रैल: गुजरात के अहमदाबाद स्थित गोमतीपुर में भीड़ द्वारा पुलिस पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई। गोमतीपुर में पुलिस उन लोगों की तलाश में गई थी, जिन्होंने तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। तभी पुलिस पर हमला कर दिया गया। हमलावरों में महिलाएँ और किशोर उम्र के बच्चे भी शामिल थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि इलाक़े में मरकज़ से लौटे कई मुस्लिम छिपे हुए हैं।

2 अप्रैल: बेंगलुरु ने सादिक लेआउट में आशा कर्मचारियों पर हमला कर दिया गया। वो सभी हेल्थ सर्वे कर रही थीं। उन्हें प्रशासन द्वारा इलाक़े के उन लोगों का ब्यौरा जमा करने का काम सौंपा गया था, जिन्हें बुखार या सर्दी के लक्षण आ रहे हैं। हमलावर नमाज वाली टोपी पहने हुए थे। वो सभी स्थानीय ही थे। उन्होंने आशा की महिला कर्मचारियों को प्रताड़ित भी किया और सूचना देने से इनकार कर दिया।

2 अप्रैल: इंदौर में इरशाद नाम के युवक ने व्हाट्सएप पर ‘मस्ती की पाठशाला’ नाम से ग्रुप बना रखा था। इस ग्रुप में जुड़े कई युवक लगातार लोगों को संदेश भेजकर यह भ्रम फैला रहे थे कि कोरोना के इलाज की आड़ में जो डॉक्टर उनके मोहल्लों में आ रहे हैं, वे जहरीला इंजेक्शन दे रहे हैं। इसलिए उनका बहिष्कार करें। पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया। वह कोहिनूर कॉलोनी, आज़ादनगर का निवासी है।

2 अप्रैल: लॉकडाउन के बावजूद उज्जैन की एक मस्जिद में मौलवी बुधवार की रात 25-30 लोगों को नमाज अदा करवा रहा था। पुलिस ने मौलवी के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए मस्जिद में ताला लगवा दिया। रात 8.30 बजे प्रशासन को उज्जैन के आगर रोड स्थित गाँधी नगर के मोहम्मद मस्जिद में लोगों के इकट्ठा होने की खबर मिली। पुलिस मौके पर पहुँची। नमाज पढ़ते इन सभी लोगों को बाहर निकाला। मौलवी हाजी मोहम्मद युनूस वफाती खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

3 अप्रैल: कन्नौज में जुमे की नमाज अता करने के लिए जुटी भीड़ को हटाने गई पुलिस पर पत्थरबाजी हुई। इस घटना में कई पुलिस वाले गंभीर रूप से घायल हो गए। लॉकडाउन के बावजूद जुमे की नमाज के लिए जामा मस्जिद में नमाजियों की भीड़ जमा हो गई थी। कई पुलिसकर्मियों को वहाँ से जान बचा कर भागना पड़ा। इसके बाद उच्चाधिकारियों को घटनास्थल पर आना पड़ा लेकिन तब तक नमाजी रफूचक्कर हो चुके थे।

3 अप्रैल: राँची के हिंदपीढ़ी इलाके में मलेशिया की एक महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई। जिस घर से महिला मिली, उसके आसपास के घरों में रहने वालों के स्वास्थ्य की जाँच के लिए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम को वहाँ भेजा। टीम जैसै ही लोगों की जाँच करने पहुँची तो स्थानीय लोगों ने इनका विरोध किया। लोगों के विरोध के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम को वहाँ बैरंग लौटना पड़ा।

3 अप्रैल: इंदौर में महिला डॉक्टरों तक को नहीं बक्शा गया। एक वीडियो वायरल हुए, जिसमें पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स) पहने दो महिला डॉक्टरों पर हमला किया गया। उन पर लगातार पत्थरबाजी हुई। हमले के बावजूद महिला डॉक्टरों ने कहा कि इससे वो अपनी ड्यूटी करना नहीं छोड़ देंगी। ये दोनों एक सघन इलाक़े में टेस्टिंग के लिए गई थीं, जहाँ मुस्लिमों का ज्यादा प्रभाव है।

3 अप्रैल: अलीगढ़ में नमाज़ पढ़ रहे लोगों ने एक मस्जिद से निकल कर पुलिस को घेर लिया और हमला कर दिया। इसके तुरंत बाद पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ़्तार कर के मामले की जाँच शुरू की। सराय रहमान क्षेत्र में नेशनल लॉकडाउन के बावजूद 25-30 की संख्या में लोग जुट गए थे और उन्होंने नमाज पढ़ना चालू कर दिया। जब पुलिस वहाँ सूचना मिलने पर पहुँची तो उन्होंने पुलिस पर ही हमला कर दिया।

3 अप्रैल: कर्नाटक के हुब्बली स्थित एक मस्जिद में भारी संख्या में नमाजी जुट गए। उन सभी ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। मस्जिद में सारे के सारे सोशल डिस्टन्सिंग के नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए जुटे थे। पत्थरबाजी करने वालों में अधिकतर युवा थे। पत्थरबाजों में महिलाएँ भी शामिल थीं। एक महिला कॉस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गई। पुलिस को इलाक़े में बड़ी संख्या में जवान तैनात करने पड़े।

3 अप्रैल: बिहार के दरभंगा में डीएम त्यागराजन एसएम को जान से मारने की धमकी दी गई। सिर्फ़ इसीलिए, क्योंकि उन्होंने राज्य के बाहर से आए लोगों को स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी थी। इसके लिए सर्वेक्षण का काम चल रहा था। एक युवक ने डीएम दरभंगा के फेसबुक पेज पर एक कमेंट किया, जिसमें डीएम को गोली मारने वाले को दो लाख रुपए इनाम देने की बात कही गई। उसकी पहचान मो. फैजल के रूप में की गई।

4 अप्रैल: मधुबनी जिले के अंधाराठाढ़ी प्रखंड के हरना गॉंव में सामूहिक रूप से नमाज अदा की गई। यहॉं से तबलीगी जमात के 11 सदस्य क्वारंटाइन में भेजे गए हैं। बताया जाता है कि वे भी नमाज में शामिल थे। पुरुष जब भीतर नमाज अदा कर रहे थे दर्जनों औरतें लाठी और मिर्च पाउडर लेकर बाहर खड़ी थीं। सिवान के महाराजगंज के सिकटिया पंचायत के खानपुरा गॉंव की मस्जिद में भी शुक्रवार को नमाज अदा की गई। करीब 50 लोग इसमें शामिल हुए। 

5 अप्रैल: अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल में जमातियों ने दवा और इंजेक्शन लेने से इनकार कर दिया। उन मरीजों का कहना था कि सरकार उन्हें मार डालना चाहती है। 26 जमातियों को दरियापुर से लाकर आइसोलेशन सेंटर में रखा गया था। जमाती वहाँ एक कोने में जमा हो गए और कहने लगे कि उन्हें उनकी इच्छा के विपरीत वहाँ पर रखा गया है। इनमें से 6 नाबालिग थे। आलाधिकारियों से दरख्वास्त कर मुस्लिम डॉक्टरों की ड्यूटी लगवाई गई, जिसके समझाने पर वो माने।

5 अप्रैल: ओडिशा के कटक में जब कर्फ्यू लगाया गया तो समुदाय विशेष ने गुस्से में पुलिस पर पत्थरबाजी की। पुलिस ने इसके बाद एक केस रजिस्टर किया। ये घटना केशरपुर इलाक़े की है, जहाँ पुलिस ‘कम्प्लीट शटडाउन’ के बाद पेट्रोलिंग कर रही थी। तभी उन्हें मस्जिद के पास लोगों के जुटने की ख़बर मिली। जैसे ही पुलिस वहाँ पर पहुँची, समुदाय विशेष ने हमला बोल दिया। कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए।

6 अप्रैल: लखनऊ सदर के कसाईबाड़ा में स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया। उस क्षेत्र में 12 जमाती कोविड-19 पॉजिटिव मिले थे, इसीलिए मेडिकल टीम को चेकअप के लिए भेजा गया था। इसके बाद स्थानीय मुस्लिमों ने उनकी पिटाई शुरू कर दी। यहाँ तक कि महिला स्वास्थ्यकर्मियों तक को नहीं बख्शा गया। मेडिकल टीम के सर्वे रिपोर्ट को भी फाड़ने की कोशिश की गई।

7 अप्रैल: डॉक्टर दीपा शर्मा सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथियों के गुस्से का शिकार बनीं। उनका ‘गुनाह’ सिर्फ इतना था कि उन्होंने तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रम से लौटे डॉक्टर इदरीस अकबानी पर सवाल खड़ा किया था। अकबानी सेल्फ-क्वारंटाइन के बावजूद लोगों का इलाज करते रहे और हॉस्पिटल आकर दूसरों की ज़िंदगी भी ख़तरे में डालते रहे। कट्टरपंथियों ने दीपा पर फेक न्यूज़ फैलाने का आरोप लगाया।

7 अप्रैल: बिहार के मधुबनी के बिस्फी विधान सभा अंतर्गत रहिका प्रखंड के सतलखा मानी दास टोल में रविवार (अप्रैल 5, 2020) रात को दीप जलाने को लेकर हुए हिन्दू-मुस्लिम विवाद में कैली देवी की मुस्लिम परिवारों ने मिलकर हत्या कर दी। कैली देवी की हत्या करने वालों में सुलेमान नदाफ, खलील नदाफ, मलील नदाफ, जलिल नदाफ आदि शामिल थे। इन लोगों ने हिन्दू महिला को गला दबाकर मार दिया।

7 अप्रैल: भोला स्थित तलैया थाना क्षेत्र में इस्लामपुरा इलाके में विशेष समुदाय की भीड़ ने पुलिस पर धारधार हथियारों से हमला बोला और हमले में 2 से 3 पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया। रात के करीब साढ़े दस बजे एक बदमाश ने अपने दर्जन भर साथियों के साथ मिलकर छह पुलिस कर्मियों पर हमला किया और 2 पर चाकू चला दिया। इस हमले में एक पुलिसकर्मी के हाथ में और दूसरे पुलिसकर्मी के कंधे में चोट आई।

8 अप्रैल: छत्तीसगढ़ के भिलाई में जैसे ही 2 महिला स्वास्थ्यकर्मी एक व्यक्ति के यहाँ पहुँची और उनकी जानकारी माँगी, घर की महिलाएँ दोनों स्वास्थ्यकर्मियों पर भड़क उठीं। फिर उनपर हमला कर दिया। इस दौरान बीच-बचाव करने पर भीड़ से भी मारपीट हुई। इस संबंध में पुलिस ने 30 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। उन लोगों ने दोनों स्वास्थ्यकर्मियों को एनआरसी का सर्वे करने वाला बताया। फिर उनसे विवाद शुरू कर दिया।

15 अप्रैल: मुरादाबाद के हाजी नेब मस्जिद के पास मेडिकल टीम की एक गाड़ी पर हमला कर दिया गया, जिसमें कोरोना वायरस के संदिग्धों को ले जाया जा रहा था। इसके बाद पुलिस की गाड़ी उन डॉक्टरों को भीड़ के चंगुल से छुड़ाने आई, जिस पर पथराव किया गया। पुलिस ने बताया कि वहाँ कम से कम 1 हज़ार लोग उपस्थित थे। एम्बुलेंस के ड्राइवर ने बताया कि भीड़ ने अचानक से हमला कर कई डॉक्टरों को घायल कर दिया।

15 अप्रैल: भागलपुर जिले के नवगछिया नगर पंचायत से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहॉं के एक मुस्लिम बहुल वार्ड के 25 परिवारों ने स्क्रीनिंग से ही इनकार कर दिया। विवाद से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने संबंधित टीम को भी आगे बढ़ जाने को कहा। 25 मुस्लिम परिवारों के 250 लोगों ने स्क्रीनिंग कराने से ही इनकार कर दिया। पुलिस को सख्त कार्रवाई की हिदायत देनी पड़ी।

21 अप्रैल: हापुड़ जनपद में शहर कोतवाली क्षेत्र के सरावा गाँव में दो समुदायों के बीच शुरू हुई मामूली कहासुनी खूनी झड़प में बदल गई। जिसके बाद जमकर पथराव और चाकू से हमला हुआ जिसमें करीब 5 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मामले में इमरान, साजिद, हासम, मेहताब, नौशाद, इरफान, मोहसिन, अमन, परवेज आलम, यामीन. सफी उल्ला, गुल मोहम्मद, रिजवान और फुरकान को आरोपित बताया गया।

21 अप्रैल: हैदराबाद के एक परिवार के बारे में ख़बर छपी कि उस परिवार के एक मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार समुदाय विशेष ने किया। मृतक के भाई ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की इस ख़बर को नकारते हुए कहा कि कुछ समुदाय वहाँ आकर ख़ुद को मृतक का दोस्त बताने लगे और उन्होंने ख़ुद मदद की पेशकश की। फिर अंतिम संस्कार में भाग लेते हुए फोटो क्लिक करवा के पब्लिसिटी स्टंट किया गया।

22 अप्रैल: गया जिले के शेरघाटी नगर सुमाली मोहल्ले में लॉकडाउन के दौरान नियमों का उल्लंघन कर मंगलवार को कुछ दुकानें खुली हुई थीं। इस बात की जानकारी जब पुलिस को हुई तो पुलिस की एक टीम लॉकडाउन के बीच खुली दुकानों को बंद कराने के लिए पहुँच गई। जैसे ही वहाँ खुली चूड़ी की दुकान को पुलिस बंद कराने लगी ऐसे ही स्थानीय लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। कई पुलिसकर्मी घायल हुए।

26 अप्रैल: वार्ड में खाना देने गए वार्ड ब्वॉय को मारने के लिए दौड़े तो वह किसी तरह वहाँ से भागा। जमाती पीछे-पीछे नीचे तक उतर आए। वार्ड ब्वॉय ने पूरे घटनाक्रम से अस्पताल प्रशासन को अवगत कराया। जमाती खाना खाने से इनकार कर रहे थे और भड़के हुए थे। उन्होंने खाने की थाली में भी लात मार दी। इन सभी को तीसरी मंजिल पर रखा गया था। जबकि उन्हें चाय-नाश्ता सहित मिनरल वाटर और फल भी दिए जा रहे थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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