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किसी तो दिए ड्रग्स तो किसी का वर्षों तक किया रेप: दर्जनों पीड़िताओं ने बताया कैसे फँसाते हैं ‘लव जिहादी’, कहा- द केरला स्टोरी-2 जैसी फिल्में हैं जरूरी

डबल आइडेंटिटी' लेकर समाज में हिन्दू लड़कियों को फँसाने का जाल देशभर में चल रहा है। यही वजह है कि फिल्म 'द केरला स्टोरी 2- गोज बियॉन्ड' के मंच पर आनेवाली पीड़ित हिन्दू महिलाएँ बंगाल, बिहार, जम्मू, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड, दिल्ली-एनसीआर, यूपी हर जगह की थी।

‘लव जिहाद’ सिर्फ शब्द नहीं बल्कि एक लड़की की जिंदगी के जहन्नुम बनने का नाम है। इसका असर न सिर्फ लड़की पर पड़ता है, बल्कि पूरा परिवार इसकी जद में होता है। ‘लव जिहाद’ के बेस पर बनी फिल्म द केरला स्टोरी 2- गोज बियॉन्ड’ 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इसमें दिखाई गई तीन ‘लव जिहाद’ की घटनाओं को लेकर जब सवाल उठाए गए तो फिल्म प्रोड्यूसर ने इसको लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और इसमें ऐसी पीड़िताओं को मिलवाया, जिसकी आपबीती हर दिल को झकझोरने के लिए काफी है।

योजनाबद्ध तरीके से लड़कियों को फँसाना

‘लव जिहादी’ पहले लड़की को टारगेट करते हैं। ज्यादातर मामलों में ‘लव जिहादी’ अपना नाम बदलते हैं और हिन्दू लड़कियों के साथ प्यार का इजहार करते हैं। उन्हें प्रेम जाल में फँसा कर उसे पहले परिवार से दूर करते हैं। उसपर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया जाता है। मजबूरी में अगर लड़की ने हाँ कह दिया, तो नाम बदलकर उसका धर्मांतरण कर निकाह कर लेते हैं। उसे बीफ खाने पर मजबूर किया जाता है और उसे इस तरह तोड़ दिया जाता है कि मजबूर लड़की अपनी आवाज नहीं उठा सके।

भावनात्मक रूप से टूटने पर सहारा देने का नाटक

लड़कियों को तब फँसाया जाता है, जब वह भावनात्मक रूप से कमजोर हो। ‘लव जिहाद’ की पीड़िता नेशनल शूटर तारा सहदेव का कहना है कि उनकी माँ की मौत हो जाने और पिता के बीमार होने के वक्त उसे शादी का ऑफर आया। पिता और भाई ने पता लगाया और पूरी जाँच परख कर उसकी शादी पुलिस अधिकारी रंजीत कुमार से हुई। लेकिन शादी के अगले दिन ही उसे घर में भगवान की फोटो की जगह मक्का-मदीना की तस्वीर लगी मिली।

रंजीत कुमार बना नकीबुल हसन का असली चेहरा सामने आ गया। सवाल पूछने पर उसकी अम्मी ने थप्पड़ जड़ दिए। उसके घर पर काजी और कई सरकारी मुस्लिम अधिकारी आ गए। वह जज भी आया जिसने उसके रिश्ते की बात की थी। ऐसी परिस्थिति में उसे निकाह करने के लिए सिर्फ तीन बार ‘कबूल है’ कहने के लिए दबाव बनाया गया। लेकिन उसे अपना नाम बदलना गवारा नहीं था, इसलिए तारा सहदेव से शाहा परवीन बनने से इनकार करते हुए निकाहनामा पर दस्तखत करने के इनकार कर दिया और उसने हर तरह से लड़ाई लड़ी। 40 दिन दरिंदों के चंगुल से छूटने से लेकर 9 साल तक न्याय पाने की लड़ाई।

लड़कियों को किस तरह से फँसाया जाता है, इसे समझने के लिए तारा सहदेव की आपबीती सुन कर समझा जा सकता है। फिल्म की स्टोरी को लेकर कई जगहों पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। मीडिया का एक वर्ग प्रोपेगेंडा बता रहा है, उन्हें ऐसी महिलाओं से ‘सच’ जानना चाहिए।

डबल आइडेंटिटी लेकर समाज में हिन्दू लड़कियों को फँसाने का जाल देशभर में चल रहा है। यही वजह है कि फिल्म ‘द केरला स्टोरी 2- गोज बियॉन्ड’ के मंच पर आनेवाली पीड़ित हिन्दू महिलाएँ बंगाल, बिहार, जम्मू, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड, दिल्ली-एनसीआर, यूपी हर जगह की थी। इन ‘लव जिहाद’ की 49 पीड़िताओं और उनके परिवार के सदस्य में मंच पर आए और अपनी बात रखी।

‘लव जिहाद’ पीड़िताओं ने क्या-क्या कहा

सनातन धर्म को समझाना- पीड़िताओं का मानना है कि सिर्फ बेटी को पढाओ बोलकर स्कूली शिक्षा देने से कुछ नहीं होगा। बचपन से ही उसे सनातन धर्म को समझाना जरूरी है। बेटी को एजुकेशन देकर आर्थिक तौर पर हम खड़े कर रहे हैं, उन्हें सामाजिक तौर पर खड़ा करने के लिए साजिशों से आगाह करना बेहद जरूरी है। समाज में किस तरह से लड़कियों को टारगेट किया जाता है, क्यों किया जाता है, किस तरह से दोस्ती के नाम पर धोखा, प्यार के नाम पर साजिश और शादी के नाम पर निकाह करने के लिए मजबूर करना, चाहे रेप कर उसका वीडियो बना ब्लैकमेल किया जाए या सहमति से संबंध बना उसे धर्मपरिवर्तन के लिए मजबूर किया जाए।

पीड़िता इन लव जिहादियों को आतंकवादियों से कम नहीं मानती। इनका कहना है कि कई फोन, सिम्स का इस्तेमाल कर लड़कियों को फँसाना, एक साथ कई लड़कियों को इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर करना और निकाह कर फिर ‘नए शिकार’ की तलाश में लग जाना।

मंच पर मौजूद एक और पीड़िता गौरी सैला का कहना है कि 16 साल की उम्र में उनके साथ ‘लव जिहाद’ हुआ। अब वह लॉ की छात्रा हैं। उनसे प्रेम करने का नाटक किया गया। नाम बदल कर दोस्ती की थी। उसे अकेला मजार पर ले जाकर वशीकरण किया, एक ग्लास कड़वा पानी पिलाया।

ड्रग्स दिए गए और नशे की हालत में ब्रांदा कोर्ट में गोरी की जगह पलक लिखा कर निकाह रजिस्ट्रेशन कराया दिया। उसका धर्मांतरण कब हुआ उसे पता भी नहीं चला। उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। उसने खुदकुशी करने की कोशिश भी की। अंत में हिम्मत कर वह वहाँ से निकल पाई। महाराष्ट्र की रहने वाली इस पीड़िता का कहना है कि अगर ऐसी स्थिति में बच्ची फँस जाए तो कभी भी उसे अकेला मत छोडिए। उसे संभालिए वरना उसका बचना मुश्किल है।

समाज ऐसी बच्चियों के चरित्र पर सवाल उठाने के बजाए उसकी मदद करे। उसे फिर से जीवन जीने के लिए नई ताकत दे और प्रशासन ‘लव जिहाद’ के मामलों को संजीदगी से ले और जाँच के बाद दोषियों को सजा हो, इसकी व्यवस्था करे। तभी ‘लड़की बचाओ, लड़की पढ़ाओ’ जैसे नारे का कोई मतलब बनेगा।

पीड़िताओं का मत है कि सनातन समाज को बचपन से ही बच्चों में धर्म के प्रति आस्था, शिष्टाचार की शिक्षा दी जानी चाहिए। बच्चे स्कूल में तो किताबी शिक्षा ले लेते हैं, लेकिन आजकल धार्मिक ज्ञान नहीं मिल पाता। इसलिए इन बच्चों को बरगलाकर ‘लव जिहाद’ के चंगुल में फँसाया जा रहा है।

ऑपइंडिया ने ‘लव जिहाद’ के सैकड़ों मामले को अपने प्लेटफॉर्म पर जगह दी। 2022 में डेढ़ सौ से ज्यादा मामले हमने उठाए और पीड़िताओं की आवाज बनी। 2023 में 153 केस पर रिपोर्ट प्रकाशित की और 2024 में भी ऐसे सैकड़ों मामलों को उजागर कर बताया कि कैसे हिन्दू लड़कियों को ‘लव जिहाद’ में फँसाया गया। ज्यादातर मामलों में पीड़िता को हिन्दू पहचान बता कर दोस्ती करना, फिर प्रेमजाल में फँसाना।

इसमें सोशल मीडिया काफी मदद कर रहा है। इसके जरिए आसानी से अपना नाम छिपा कर दूसरी पहचान के साथ सामने आने में मदद मिलती है। फिर समाज और परिवार से दूर करना, ताकि जब उसे मदद की जरूरत पड़े तो कोई भी उसे सहारा देनेवाला न हो। लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन करवाना। इसके लिए वीडियो बना कर ब्लैकमेल करने से भी ये लोग पीछे नहीं हटते। फिर निकाह कर उसे ऐसे रास्ते पर ले जाना, जहाँ से वापसी संभव न हो।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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