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बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा, बेगम का मकबरा… सब UP सरकार की, JPC को बताया- जिन जमीन/संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का दावा, उनमें 78% सरकारी… उनके पास कागज नहीं

उत्तर प्रदेश सरकार की राजस्व विभाग ने संयुक्त संसदीय समिति को बताया कि वक्फ बोर्ड जिन जमीनों पर अपना दावा कर रहा है, उनमें से एक बड़ा हिस्सा राजस्व रिकॉर्ड में वर्ग 5 और वर्ग 6 के तहत दर्ज है। वर्ग 5 और 6 में सरकारी संपत्तियाँ और ग्राम सभा की संपत्तियाँ शामिल हैं। दरअसल, उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड 1.3 लाख से अधिक संपत्तियों पर दावा कर रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश की सरकार ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को बताया है कि राज्य की जिन संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड दावा कर रहा है, उसका 78 प्रतिशत हिस्सा सरकार का है। इन पर वक्फ बोर्ड का कोई कानूनी मालिकाना हक नहीं है। यूपी सरकार की ओर से राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण आयोग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मोनिका गर्ग ने अपनी बात रखी।

दरअसल, वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने मंगलवार (21 जनवरी 2025) को लखनऊ में क्षेत्रीय दौरे की अपनी अंतिम बैठक आयोजित की। यह बैठक JPC प्रमुख एवं भाजपा सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड तथा अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों सहित इससे प्रभावित सभी पक्षों ने भाग लिया।

रिपोर्ट के अनुसार, यूपी सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण आयोग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मोनिका गर्ग ने JPC को बताया कि वक्फ बोर्ड का दावा है कि उसके पास राज्य में 14,000 हेक्टेयर जमीन है। इनमें से आधिकारिक रिकॉर्ड में 11,700 हेक्टेयर जमीन सरकारी है। गर्ग ने कहा कि सच्चर कमिटी की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि वक्फ बोर्ड जिन 60 संपत्तियों पर दावा कर रहा है, वे सरकारी हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार की राजस्व विभाग ने संयुक्त संसदीय समिति को बताया कि वक्फ बोर्ड जिन जमीनों पर अपना दावा कर रहा है, उनमें से एक बड़ा हिस्सा राजस्व रिकॉर्ड में वर्ग 5 और वर्ग 6 के तहत दर्ज है। वर्ग 5 और 6 में सरकारी संपत्तियाँ और ग्राम सभा की संपत्तियाँ शामिल हैं। दरअसल, उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड 1.3 लाख से अधिक संपत्तियों पर दावा कर रहा है।

इन संपत्तियों में ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित) स्मारक, बलरामपुर का सरकारी अस्पताल, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की जमीनें सहित कई सरकारी संपत्तियाँ हैं। LDA और आवास विकास विभाग की जिन संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड दावा कर रहा है, उन्हें संबंधित नगरपालिकाओं से आधिकारिक तौर पर संबंधित विभागों को आवंटित की गई थीं।

यूपी सरकार ने JPC को बताया कि राज्य में वक्फ संपत्तियों को चिह्नित करने के लिए दिशा-निर्देश और नियम हैं। जब वक्फ बोर्ड किसी भूमि पर दावा करता है तो उस भूमि का 1952 के अभिलेखों से मिलान किया जाता है। मिलान में भूमि वक्फ बोर्ड के स्वामित्व की पाई जाती है तो वह सरकार से उस भूमि पर अतिक्रमण हटाने का अनुरोध कर सकता है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से यह भी कहा कि लखनऊ के प्रसिद्ध स्मारक बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा और अयोध्या में बेगम का मकबरा सरकारी संपत्ति हैं, लेकिन वक्फ बोर्ड गलत तरीके से इन संरक्षित स्मारकों के स्वामित्व का दावा कर रहा है। वक्फ बोर्ड ने जिन संपत्तियों पर अपना अधिकार जताया है, उनमें और भी कई नामी-गिरामी संपत्तियाँ हैं।

सांसद जगदंबिका पाल ने बताया कि JPC अगले संसद सत्र में 31 जनवरी को अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। उन्होंने कहा, “JPC पिछले 6 महीने से पूरे देश में लगातार बैठक कर रही है। मुझे पूरा भरोसा है कि हम सब एकमत होकर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। पिछली बार हमें इसे शीतकालीन सत्र में पेश करना था। हम इस रिपोर्ट को बजट सत्र में पेश करने जा रहे हैं।”

बता दें कि संसद का बजट सत्र 31 जनवरी 2025 से शुरू होकर 4 अप्रैल 2025 तक चलेगा। इस सत्र में केंद्रीय बजट 1 फरवरी 2025 को पेश किया जाएगा। वहीं, वक्फ संपत्तियों को विनियमित करने के लिए 1995 में बनाए गए वक्फ अधिनियम की कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और अतिक्रमण जैसे मुद्दों पर अंकुश लगाने के लिए मोदी सरकार तैयारी कर रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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